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देहरादून : राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) के 21 वें भारत रंग महोत्सव का रंगारंग आगाज

देहरादून : भारत रंग महोत्सव (बीएमआर) के 21 वें संस्करण के समानांतर आयोजन का रंगारंग शुभारंभ हो गया। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) की ओर से आयोजित वार्षिक थिएटर महोत्सव का समानांतर आयोजन पहली बार देहरादून में हो रहा है जिसके दौरान देश-विदेश के बेहतरीन नाटकों को प्रस्तुत किया जाएगा। इस समारोह में विशिष्ट अतिथि के
  

देहरादून : राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) के 21 वें भारत रंग महोत्सव का रंगारंग आगाज

देहरादून : भारत रंग महोत्सव (बीएमआर) के 21 वें संस्करण के समानांतर आयोजन का रंगारंग शुभारंभ हो गया। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) की ओर से आयोजित वार्षिक थिएटर महोत्सव का समानांतर आयोजन पहली बार देहरादून में हो रहा है जिसके दौरान देश-विदेश के बेहतरीन नाटकों को प्रस्तुत किया जाएगा।

इस समारोह में विशिष्ट अतिथि के तौर पर राज्य के माननीय संस्कृति मंत्री श्री सतपाल महाराज, विशेष अतिथि के तौर पर प्रसिद्ध कवि एवं पत्रकार लीलाधर जगुड़ी और प्रसिद्ध रंगकर्मी एवं सिनेमा अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी ने अपनी गौरवमय उपस्थिति से समारोह की शोभा बढ़ाई। समारोह के बाद महाकवि भास द्वारा लिखित नाटक चारूदत्ता का भव्य प्रदर्शन हुआ जिसका निर्देशन भूपेश जोशी ने किया है।

विशिष्ट अतिथि उत्तराखंड के संस्कृति मंत्री सतपाल सिंह महाराज ने इस मौके पर कहा, ‘‘भारत रंग महोत्सव पिछले दो दशकों से दुनिया भर से बेहतरीन नाटकों को दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत करता रहा है। कला के तौर पर थिएटर में अलग-अलग तरह की प्रवृतियां आती-जाती रही है लेकिन आज भी यह गौरव के साथ गौरवमय गाथाओं को कहता है।’’

इस मौके पर उपस्थित प्रख्यात कवि एवं पत्रकार लीलाधर जगुड़ी ने कहा, ‘‘पिछले दो दशकों से भारत रंग महोत्सव में प्रस्तुत किए जाने वाले शीर्ष नाटकों के साथ-साथ कम ज्ञात क्षेत्रीय नाटकों को थिएटर प्रेमियों ने हार्दिक स्वागत किया है।

प्रख्यात थिएटर एवं सिनेमा हस्ती हिमानी शिवपुरी ने इस मौके पर कहा, ‘‘थिएटर एक ऐसी कला है जिसने अनेक बसंत देखे हैं और हमेशा यह हमारे साथ मजबूती के साथ उपस्थित रहेगा।

एनएसडी सोसायटी के कार्यकरी अध्यक्ष डा. अर्जुन देव चारण ने कहा, ‘‘थिएटर लोगों के लिए अर्थ प्रदान करता है। हमारे देश में जो थिएटर है उसमें अभिनेता की हैसियत बहुत उंची होती है। अभिनेता को अपनी भावनाओं के साथ-साथ किरदार की भावनाओं की भी समझ होनी चाहिए और इस समझ को मन में उतार लिया जाए तो हर एक को प्रभावित किया जा सकता है।’’

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