स्वामित्व योजना: फिर खुला पोर्टल, आवेदक 30 सितम्बर तक कर पाएंगे आवेदन

मुख्यमंत्री शहरी निकाय स्वामित्व योजना के लिए पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करने से वंचित रह गए दुकानदारों को बड़ी राहत दी गई है। 
स्वामित्व योजना: फिर खुला पोर्टल, आवेदक 30 सितम्बर तक कर पाएंगे आवेदन

ऐसे दुकानदार जो स्वामित्व योजना में आवेदन करने से वंचित रह गए थे उनके लिए एक अच्छी खबर है। दरअसल, सरकार ने यह पोर्टल दोबारा खोल दिया है और अब दुकानदार 30 सितंबर तक इसमें आवेदन कर सकते हैं।

वंचित दुकानदार आवेदन के लिए दोबारा से कम दिलचस्पी दिखा रहे हैं यही वजह है कि नगर निगम ऐसे दुकानदारों के लिए काउंटर पर अधिक 2 कर्मचारी तैनात करेगी। साथ ही हर दुकानदारों को आवेदन प्रक्रिया समझाई जाएगी यदि फिर भी कम रुझान रहता है तो जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

मुख्यमंत्री शहरी निकाय स्वामित्व योजना के लिए पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करने से वंचित रह गए दुकानदारों को बड़ी राहत दी गई है। अब दुकानदार अगले 3 माह तक फिर से पोर्टल पर आवेदन कर सकेंगे। शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने भी पोर्टल खोल दिया है।

बता दें ये पोर्टल लंबे समय से वंचित रह गए लोगों की मांग पर खोला गया है। अभी तक 547 में से 293 ने ही आवेदन किया था। इसीलिए सरकार द्वारा शेष वंचितों को फिर से मौका दिया गया है।

आवेदन के लिए परिवार पहचान पत्र जरूरी

इस योजना के तहत नगर निगम के 20 वर्ष से किराए एवं लीज या फिर तहबाजारी पर दुकान लेने वालों को मालिकाना हक दिलाने के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने ये योजना शुरू की थी। पहले इस योजना में आवेदन के लिए अंतिम तिथि 31 मई थी। अब हरियाणा शहरी स्थानीय निकाय विभाग में नगर निकाय की दुकानों, घरों की बिक्री नीति खंड 5 के तहत स्वामित्व योजना की अवधि बढ़ा दी है।

मालिकाना हक लेने के लिए कर सकते हो ऑनलाइन आवेदन

नगर निगम के आयुक्त डॉ नरहरि बागड़ ने बताया कि दुकानदारों, नगर निगम के किरायेदारों को मालिकाना हक लेने के लिए मुख्यमंत्री शहरी स्वामित्व योजना पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। वही आयुक्त ने अपील की, कि शहरी स्थानीय निकाय की साइट पर आवेदन करते समय जल्दबाजी ना करें और जानकारी ध्यान पूर्वक भरें।

अभी भी दुकानदारों के मन में शंका

स्वामित्व योजना में मालिकाना हक पाने की अड़चनें दूर नहीं हो रही है। बीते साल ऑनलाइन आवेदन के लिए सरकार ने पोर्टल खोला था। आवेदन के बाद शर्त के हिसाब से अधिकतर दुकानदारों ने पहली किस्त के तौर पर 25-25% शुल्क जमा कर दिया था लेकिन डिमांड नोटिस ना मिलने के कारण बैंकों ने ऋण देने से इनकार कर दिया। दुकानदारों को जो पत्र निगम ने जारी किये है उन्हें भी बैंकों के अधिकारी ऋण देने के लिए आधिकारिक नहीं मान रहे हैं

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