राजस्थान : सवा दो लाख से अधिक बच्चे पाटी-पोथी छोड़ कचरे में बीन रहे भविष्य

राजस्थान : सवा दो लाख से अधिक बच्चे पाटी-पोथी छोड़ कचरे में बीन रहे भविष्य


जयपुर, 6 मई (हि.स.)। प्रदेश में स्कूली शिक्षा के सुधार और बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए हर वर्ष करोड़ों रुपए खर्च किए जाने के बावजूद लाखों बच्चे आज भी शिक्षा से महरूम हैं। इतना ही नहीं, हजारों गरीब बच्चे आज भी स्कूलों से ड्रॉपआउट होकर कचरा बीनने और भिक्षावृत्ति जैसे कार्यों में लगे हुए हैं। शिक्षा विभाग की ओर से पिछले साल करवाए गए सर्वे के अनुसार प्रदेश में सवा दो लाख बच्चे स्कूलों की दहलीज लांघकर कचरा बीनने और भिक्षावृति सरीखे कामों में जुट चुके हैं। अब राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ऐसे ड्रॉपआउट बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए कमर कस रहा है।

हर वर्ष शिक्षा विभाग डोर-टू-डोर सर्वे कर प्रवेशोत्सव अभियान चलाता है, बावजूद इसके प्रदेश में 2 लाख 29 हजार 481 स्कूल से ड्रॉपआउट है। प्रदेश में हर वर्ष शैक्षिक सत्र के प्रारंभ में शिक्षा से वंचित बच्चों को सरकारी स्कूलों से जोड़ने के लिए प्रवेशोत्सव अभियान के अंतर्गत सर्वे कार्य करवाया जाता है। विभाग की ओर से वर्ष 2021-22 में भी ऐसा ही एक सर्वे कराया गया, जिसमें सर्वाधिक शिक्षा से वंचित बच्चे जयपुर में 19 हजार 907 और अलवर में 19 हजार 699 पाए गए। इसके अलावा जोधपुर में 17 हजार 549, बीकानेर में 12 हजार 930, नागौर में 12 हजार 465, बाड़मेर में 10 हजार 556 और अजमेर में 10 हजार 17 बच्चे शिक्षा से वंचित मिले।

शिक्षा विभाग की ओर से प्रदेश में शिक्षा से वंचित बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें, मिड डे मील योजना चलाई जा रही है। साथ ही शैक्षिक भ्रमण, विद्यार्थी दुर्घटना बीमा, प्रवेशोत्सव, छात्रवृत्ति, ट्रांसपोर्ट वाउचर, बैक टू स्कूल, विशेष प्रशिक्षण शिविर, आवासीय विद्यालय व छात्रावास की सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इन दिनों राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग और शिक्षा विभाग, 'शिक्षित बचपन सुरक्षित बचपन' संभागस्तरीय कार्यशाला आयोजित कर प्रदेश के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का कार्यक्रम चला रहा है।

आयोग की अध्यक्ष संगीता बेनीवाल का कहना है कि स्कूल से ड्रॉपआउट बच्चों, भिक्षावृत्ति और बाल मजदूरी जैसे कार्य में लिप्त शिक्षा से वंचित बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने और उनके पुनर्वास के लिए आयोग भी जल्द ही एक प्रोजेक्ट तैयार कर काम शुरू करने की तैयारी कर रहा है। अभी भरतपुर में 9257, बांसवाड़ा में 4545, बारां में 2116, भीलवाड़ा में 7205, बूंदी में 2637, चित्तौड़गढ़ में 3171, चूरू में 6593, दौसा में 4328, धौलपुर में 6037, डूंगरपुर में 2812, श्रीगंगानगर में 5366, हनुमानगढ़ में 4427, जैसलमेर में 3767, जालोर में 8365, झालावाड़ में 2359, झुंझुनूं में 4596, करौली में 3709, कोटा में 3219, पाली में 6970, प्रतापगढ़ में 2110, राजसमंद में 4018, सवाई माधोपुर में 4053, सीकर में 9109, सिरोही में 3981, टोंक में 3007 और उदयपुर में 8601 बच्चे शिक्षा की मुख्यधारा से दूर हो चुके हैं।

हिन्दुस्थान समाचार/रोहित/ ईश्वर

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