ज्ञानवापी मामले में फैसले के लिए करना होगा इंतजार, 11 मई को फिर होगी सुनवाई

ज्ञानवापी मामले में फैसले के लिए करना होगा इंतजार, 11 मई को फिर होगी सुनवाई


—प्रतिवादी अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी ने तैयारी न होना बताकर न्यायालय से मांगा एक दिन का समय

वाराणसी, 10 मई (हि.स.)। ज्ञानवापी परिसर के सर्वे मामले से जुड़े मुकदमें में अभी फैसले के लिए इंतजार करना होगा। सिविल जज (सीनियर डिवीजन) रवि कुमार दिवाकर की अदालत में कोर्ट कमिश्नर बदलने की दाखिल याचिका पर बुधवार को फिर सुनवाई होगी। प्रतिवादी पक्ष अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से उनके अधिवक्ताओं ने तैयारी न होना बताकर न्यायालय से एक दिन का समय मांगा है ।

मंगलवार अपरान्ह न्यायालय में वादी और प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ताओं में लगभग दो घंटे तक बहस हुई। इस दौरान दोनों पक्षों ने अपनी दलीले पेश की। वादी पक्ष ने कमीशन की कार्यवाही सुनिश्चित कराने के लिए शासन-प्रशासन को निर्देश देने की अपील की । प्रतिवादी पक्ष ने एडवोकेट कमिश्नर को बदलने के लिए अपना पक्ष रखा। अदालत के सामने वादी पक्ष ने कमीशन की कार्रवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष की ओर से बाधा उत्पन्न किए जाने की जानकारी भी दी। वादी पक्ष के एक अधिवक्ता ने अदालत को मौके पर चलने का अनुरोध किया। उन्होंने इसके लिए दीन मोहम्मद बनाम सेक्रेटरी ऑफ़ इंडिया से सम्बंधित मुकदमें का हवाला भी दिया। इस संबंध में वादी पक्ष के एक अधिवक्ता सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने मीडिया कर्मियों को बताया कि न्यायालय से अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने अपनी आपत्ति देने के लिए कल का समय मांगा है। वादी पक्ष की ओर से सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत से एडवोकेट कमिश्नर को मौका मुआयना करने देने की अपील की गई है।

गौरतलब हो कि प्रतिवादी पक्ष अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के अधिवक्ताओं ने न्यायालय से सर्वे के लिए नियुक्त एडवोकेट कमिश्नर अजय कुमार मिश्र पर आपत्ति जताते हुए 7 मई को अदालत में प्रार्थना पत्र दिया था। प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ताओं का कहना है कि एडवोकेट कमिश्नर सर्वे का काम निष्पक्ष तरीके से नहीं कर रहे हैं, बल्कि वह पार्टी की तरह काम कर रहे हैं। इसलिए अदालत कोई और कमिश्नर नियुक्त करे। प्रतिवादी पक्ष के याचिका पर अदालत ने वादी और एडवोकेट कमिश्नर को उनका पक्ष दाखिल करने के लिए कहा है। फिलहाल प्रतिवादी पक्ष के एडवोकेट कमिश्नर को हटाने की मांग पर कोई फैसला नहीं हो सका है।

दिल्ली निवासी राखी सिंह सहित पॉच महिलाओं ने 18 अगस्त 2021 को ज्ञानवापी मस्जिद परिसर स्थित श्रृंगार गौरी में नियमित दर्शन पूजन को लेकर न्यायालय में याचिका दाखिल किया था। सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर की अदालत में याचिका दायर कर महिलाओं ने काशी विश्वनाथ धाम-ज्ञानवापी परिसर स्थित श्रृंगार गौरी और अन्य विग्रहों को 1991 के पूर्व स्थिति की तरह नियमित दर्शन-पूजन की मांग की है।

—साध्वी पूर्णाम्बा और शारदाम्बा ने न्यायालय में दिया प्रार्थना पत्र

श्री विद्या मठ से जुड़ी साध्वी पूर्णाम्बा और साध्वी शारदाम्बा ने सिविल जज सीनियर डिवीजन के न्यायालय में एक प्रार्थना पत्र दिया। दोनों ने अपने अधिवक्ता रमेश उपाध्याय के माध्यम से ज्ञानवापी मस्जिद से जुड़े सभी वादों की सुनवाई एक साथ करने की मांग की। न्यायालय ने उनकी याचिका पर उनके मुकदमें में पूर्व निर्धारित तिथि 6 जुलाई 2021 पर ही सुनवाई का निर्देश दिया। न्यायालय ने पहले से ही 6 जुलाई 2022 की डेट सुनवाई के लिए तय किया है। साध्वी पूर्णाम्बा ने बताया कि न्यायालय में चल रहे वाद से मिलते जुलते और भी वाद विचारधीन हैं, जिनकी सुनवाई एक साथ की जानी चाहिए।

इसमें एक वाद रंजना अग्निहोत्री बनाम उत्तर प्रदेश सरकार भी शामिल है। साध्वी के अधिवक्ता ने बताया कि अदालत में प्रार्थना पत्र देकर सभी मुकदमों की सुनवाई एक साथ करने की मांग की गई है। ताकि, जो भी फैसला हो, वह सभी के लिए एक साथ हो। इससे वादियों के साथ ही अदालत के समय की भी बचत होगी।

हिन्दुस्थान समाचार/श्रीधर

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