मप्र: सहकारी संस्थाओं, एसएसजी, वेयर हाउस संचालकों को 20 करोड़ के नुकसान का अनुमान

मप्र: सहकारी संस्थाओं, एसएसजी, वेयर हाउस संचालकों को 20 करोड़ के नुकसान का अनुमान


बैतूल, 10 मई (हि.स.)। खुले बाजार में गेहूं की बढ़ती कीमतों से ई उपार्जन के तहत पंजीकृत किसानों ने समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने से दूरी बढ़ा ली है। खुले बाजार में गेहूं के अच्छे दाम मिलने से किसानों को जबरदस्त फायदा हो रहा है, परंतु समर्थन मूल्य पर सहकारी खरीदी नहीं के बराबर होने से ई उपार्जन से जुड़ी सहकारी संस्थाओं, महिला स्वसहायता समूहों सहित गोदाम संचालकों को करोड़ों रुपए के नुकसान का अनुमान है।

बता दें कि 4 अप्रैल से बैतूल जिले में समर्थन मूल्य पर शुरू हुई गेहूं की खरीदी के 36 दिनों में सिर्फ 757 किसानों से 3486 टन गेहूं खरीदा गया है, जबकि शुरूवाती दौर में जिले में गेहूं की खरीदी का लक्ष्य 2 लाख मीट्रिक टन था जो बाद में कम आवक के मद्देनजर घटाकर 45 हजार टन कर दिया गया। सरकारी स्तर पर गेहूं खरीदी नहीं होने से गेहूं खरीदी के लिए नियुक्त खरीदी एजेंसी सहकारी संस्थाएं, महिला स्व सहायता समूह को मिलने वाला कमीशन, गेहूं भण्डारण पर गोदाम वेयर हाऊस संचालकों को मिलने वाले किराए का लगभग 20 करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है।

जिला आपूर्ति अधिकारी एके कुजूर ने बताया कि ई उपार्जन योजना के तहत बैतूल जिले में 30 हजार 646 किसानों ने समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए ऑनलाइन पंजीयन कराया था। उन्होंने बताया कि गेहूं खरीदी के लिए बैतूल जिले में 90 खरीदी केंद्र बनाए गए हैं परंतु 9 मई तक 39 केंद्रों पर 757 किसानों ने 3486 टन गेहूं की खरीदी की गई है। डीएसओ बैतूल के मुताबिक शुरुआती दौर में जिले में 2 लाख टन गेहूं की खरीदी का लक्ष्य निर्धारित कर खरीदी परिवहन एवं भण्डारण के पुख्ता इंतजामात किए गए थे। परंतु खुले बाजार में गेहूं के दाम अधिक होने के कारण पंजीकृत किसान भी समर्थन मूल्य पर गेहूं नहीं बेच रहे हैं जिसके चलते आवक कम होने के मद्देनजर खरीदी का लक्ष्य घटाकर 45 हजार टन किया गया है। उन्होंने बताया कि 16 मई तक समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी की जाएगी।

लक्ष्य के मुताबिक समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी नहीं होने से खरीदी के लिए तैनात की गई सहकारी समितियों एवं महिला स्वसहायता समूहों को जबरदस्त नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। गेहूं खरीदी की व्यवस्थाओं पर सहकारी समितियां सहित एसएसजी ने लाखों रुपए खर्च कर दिए हैं परंतु 51 केंद्रों में तो खरीदी का खाता भी नहीं खुला है। जिन 39 केंद्रों पर गेहूं की खरीदी हो रही है वह भी ऊंट के मुंह में जीरा के समान है।

उल्लेखनीय है कि गेहूं खरीदी करने वाली सहकारी समितियों एसएसजी को प्रति क्विंटल गेहूं खरीदी पर 43 रुपये भुगतान का प्रावधान है, जिसमें 16 रुपये हम्माली, भाड़ा, 11 रुपये कमीशन एवं 16 रुपये खरीदी की व्यवस्थाओं पर खर्च होने वाली राशि शामिल है। जानकारों का मानना है कि यदि बैतूल जिले में निर्धारित लक्ष्य 2 लाख टन गेहूं खरीदी होती तो खरीदी करने वाली सहकारी संस्थाओं महिला स्वसहायता समूहों को हम्माली, भाड़ा, कमीशन खर्च के रूप में लगभग 8 करोड़ 60 लाख रुपये की राशि का भुगतान किया जाता जिसमें 3 करोड़ 20 लाख रुपए कमीशन की राशि शामिल है, परंतु सरकारी खरीदी नगण्य होने से समितियों, एसएसजी को राशि मिलना तो दूर उनके द्वारा खरीदी के व्यवस्थाओं पर खर्च की गई राशि की भरपाई भी नहीं हो पा रही है।

समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी नहीं होने से गेहूं के भण्डारण के लिए अनुबंध किए ज्वाइंट वेंचर स्कीम के 40 गोदाम वेयर हाऊस खाली पड़े हुए हैं। जिससे गोदाम वेयर हाऊस संचालकों को बतौर किराया लगभग 15 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है।

उल्लेखनीय है कि गेहूं के भण्डारण के लिए ए ग्रेड के वेयर हाऊस गोदाम को 83 रुपये प्रति टन प्रतिमाह एवं बी ग्रेड के वेयर हाऊस गोदाम को 78 रुपए प्रतिमाह प्रतिदिन भुगतान का प्रावधान है।

हिन्दुस्थान समाचार/विवेक

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