एसजीपीजीआई में डिजिटल लाइब्रेरी का हुआ उद्घाटन

एसजीपीजीआई में डिजिटल लाइब्रेरी का हुआ उद्घाटन


लखनऊ, 06 मई (हि.स.)। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान में शुक्रवार को संस्थान के निदेशक प्रोफेसर आर.के. धीमन ने अत्याधुनिक पुस्तकालय का उद्घाटन किया। पुस्तकालय पूरी तरह से डिजिटल है और सभी संसाधन 24x7x365 दिनों संस्थान परिसर के भीतर व बाहर उपलब्ध हैं। पुस्तकालय की सेवाएं मोबाइल के माध्यम से भी उपलब्ध हैं। संस्थान में अब डिस्कवरी सर्विसेज उपलब्ध है और यह राज्य का एकमात्र संस्थान है, जिसके पास यह सुविधा है।

एस जी पी जी आई ने अपने संकाय सदस्यों के लेखों और केस रिपोर्ट के प्रकाशन के लिए प्रतिष्ठित ''ब्रिटिश मेडिकल जर्नल, यूके'' के साथ भी करार किया है। बीएमजे ओपन एक्सेस जर्नल में छात्र बिना किसी एपीसी शुल्क के भुगतान के इसका लाभ उठा सकते हैं। संस्थान के संकाय सदस्यों और छात्रों के लाभ के लिए उन्नत क्लिनिकल टूल और संसाधनों जैसे क्लिनिकल की, बीएमजे, अप टूडेट और ओविड कलेक्शंस की भी सदस्यता प्राप्त की गई है।

यह संस्थान गुणवत्ता में सुधार, लागत कम करके और रोगी के अनुभव को बढ़ाकर अपने रोगियों को इष्टतम देखभाल प्रदान करना चाहता है। प्रोफ़ेसर आर के धीमान ने कहा कि पुस्तकालय किसी भी शोध संस्थान का केंद्र बिंदु है और यह नई डिजिटल लाइब्रेरी हमें सभी चिकित्सकों की देखभाल को मानकीकृत करने, देखभाल में परिवर्तनशीलता को कम करने, सुरक्षित रोगी देखभाल को सक्षम करने, उचित दवा का उपयोग करने और व्यवहार को निर्धारित करने, चिकित्सा त्रुटियों को कम करने, अनावश्यक नैदानिक परीक्षण को रोकने में मदद करेगी। अस्पताल में रूकने की अवधि को कम करना, मृत्यु दर को कम करना, नवीनतम अनुसंधान, सूचना विकास, वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति से अवगत रहना भी सम्भव होगा। यह पुस्तकालय संस्थान में होने वाले नवीनतम शोध प्रकाशित करने के लिए विंडो प्रदान करेगा।

पुस्तकालय के प्रभारी अरुण श्रीवास्तव, प्रोफेसर, न्यूरोसर्जरी ने बताया कि भविष्य के चिकित्सक, आज के चिकित्सक की तरह नैदानिक से लेकर डिजिटल तक, कई प्रकार की दक्षताओं के जानकार होंगे और बीमारी के बजाय स्वास्थ्य संरक्षण में भागीदार होंगे। इन नई सुविधाओं से अनुसंधान आउटपुट और संस्थान की रैंकिंग में वृद्धि होने की उम्मीद है। वर्तमान पुस्तकालय में 1000 से अधिक ई-जर्नल्स, 1100 ई-बुक्स, लर्निंग टूल्स और साक्ष्य-आधारित नैदानिक निर्णय समर्थन उपकरण शामिल होंगे, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करते हुए सबसे जटिल प्रश्नों का उत्तर देने में समर्थ होंगे। आज के डिजिटल युग में बीमारी के स्थान पर समग्र स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है और एसजीपीजीआई उस दिशा में आगे बढ़ रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार/ बृजनंदन

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