Chanakya Niti: अगर बनना चाहते है अमीर, तो चाणक्य की इन बातो का रखें ध्यान

आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में उन बातों का उल्लेख किया है जिसका अनुसरण करके मनुष्य धन यानी पैसे को बचा सकता है
Chanakya Niti: अगर बनना चाहते है अमीर, तो चाणक्य की इन बातो का रखें ध्यान

डिजिटल डेस्क : अपने बुद्धि बल, ज्ञान और नीतियों से नंदवंश का अंत करने वाले आचार्य चाणक्य को कुशल राजनीतिज्ञ और अर्थशास्त्री माना गया है। उन्होंने अपने नीतियों के बल पर बालक चंद्रगुप्त मौर्य को भारत का सम्राट बनाया।

 उनकी ये नीतियां मनुष्य के जीवन में काफी उपयोगी मानी गई हैं। उनकी नीतियों के मार्ग पर चलकर इंसान सफलता प्राप्त कर सकता है।  अपने नीति शास्त्र में उन्होंने धनवान बनने को लेकर कुछ बातों पर जोर दिया है।  उनकी इन नीतियों को ध्यान में रखने वाला मनुष्य पैसे को लेकर हमेशा सुखी रहता है...

हालाँकि आपको आचार्य चाणक्य की नीतियां काफ़ी कठिन लगे लेकिन उनके द्वारा बताई गई हर बात आपके जीवन में किसी न किसी रूप मेंसच्चाई जरूर दर्शाती है।

उनके विचारों को आप चाहे नजरअंदाज ही क्यों न कर दें लेकिन ये वचन जीवन के हर मोड़ पर आपकी मदद करेंगे।आचार्य चाणक्य के इन्हीं विचारों में से आज हम एक और विचार की जानकारी लेंगे। आज का ये विचार धन के लाभ पर आधारित है।

हाथ से बनाई हुई माला ईश्वर को करें अर्पित

चाणक्य नीति के अनुसार, अगर आप ईश्वर को प्रसन्न करना चाहते हैं तो इसके हेतु कुछ जाने माने उपाय करना भी आवश्यक है।

चाणक्य जीके अनुसार  से खरीदी हुई माला ईश्वर को चढ़ाने से लाभ नहीं मिलता बल्कि स्वयं ही अपने हाथों से ईश्वर के लिए माला बनानी चाहिए। येकाफी लाभदायी माना जाता है और ऐसा करने से घर में सुख शांति  आती है।

अपने हाथ से ही घिसे चंदन

चाणक्य नीति के अनुसार, भगवान को चढ़ाने हेतु दूसरों के द्वारा घिसा हुआ चंदन उपयोग नहीं करना चाहिए। इससे किसी भी प्रकार का लाभ नहींमिलता है। इसलिए बेहतर होगा कि आप स्वयं ही अपने हाथों से चंदन घिस कर भगवान को चढ़ाए।

खुद ही लिखे स्तुति

चाणक्य जी के अनुसार ईश्वर के प्रति हर मनुष्य के भाव भिन्न–भिन्न  होते हैं। दूसरे के द्वारा लिखी गयी स्तुति से आपके मन के भाव उन तक अच्छेतरीके से नहीं पहुंचते।

ऐसे में ईश्वर के प्रति अपने भावों को पूर्णताया रूप से प्रकट करने के लिए स्वयं ही भगवान की स्तुति लिखें और ईश्वर केसमक्ष पढ़ें। ऐसा करने से ईश्वर प्रसन्न होते हैं।

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