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बजट 2020 : 2019-20 में शाहाकारी भोजन की थाली 29 फीसदी और मांसाहारी भोजन की थाली 18 फीसदी सस्‍ती हुई

बजट 2020 : 2019-20 में शाहाकारी भोजन की थाली 29 फीसदी और मांसाहारी भोजन की थाली 18 फीसदी सस्‍ती हुई

नई दिल्‍ली : इकोनॉमिक सर्वे 2020 में वेज और नॉन-वेज थाली की घटती कीमतों का भी जिक्र किया गया है. सर्वे में बताया गया है कि 2015-16 के मुकाबले इस समय शाकाहारी थाली की कीमतें कम हुई हैं. हालांकि, दाल और सब्जियों के दाम बढ़ने से अप्रैल-अक्‍टूबर 2019 में इसके दाम में उछाल भी आया था.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को संसद में आर्थिक समीक्षा 2019-20 पेश किया. समीक्षा में कहा गया है कि अब औद्योगिक श्रमिकों की दैनिक आमदनी के मुकाबले खाने की थाली सस्‍ती हो गई है. समीक्षा पेश करते हुए सीतारामण ने कहा कि 2006-2007 की तुलना में 2019-20 में शाहाकारी भोजन की थाली 29 फीसदी और मांसाहारी भोजन की थाली 18 फीसदी सस्‍ती हुई हैं.

25 राज्‍यों के 80 केंद्रों के उपभोक्‍ता मूल्‍य सूचकांक का किया इस्‍तेमाल

भारत में भोजन की थाली के अर्थशास्‍त्र के आधार पर की गई समीक्षा में पौष्टिक थाली के लगातार घटते दामों को लेकर यह निष्‍कर्ष निकाला गया है. इस अर्थशास्‍त्र के जरिये भारत में एक सामान्‍य व्‍यक्ति की ओर से एक थाली के लिए किए जाने वाले खर्च का आकलन करने की कोशिश की गई है.

आम भारतीयों के लिए दैनिक आहार से संबंधित दिशा-निर्देशों की सहायता से थाली के मूल्‍य का आकलन किया गया है. इसके लिए अप्रैल 2006 से अक्‍टूबर 2019 तक 25 राज्‍यों व केंद्रशासित प्रदेशों के लगभग 80 केंद्रों से औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्‍ता मूल्‍य सूचकांक से जुटाई गई कीमतों का इस्‍तेमाल किया गया है.

5 सदस्‍यों वाले शाकाहारी परिवार हो 10 हजार रुपये से ज्‍यादा की बचत

मुख्‍य आर्थिक सलाहकार कृष्‍णमूर्ति सुब्रमण्‍यन ने कहा कि पूरे भारत के साथ-साथ उत्‍तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम क्षेत्रों में पाया गया कि शाकाहारी भोजन की थाली की कीमतों में 2015-16 से काफी कमी आई है. ऐसा सब्जियों और दालों की कीमतों में पिछले साल की तेजी के रूझान के मुकाबले गिरावट का रूख रहने की वजह से हुआ है.

सर्वे के मुताबिक, 5 सदस्‍यों वाले औसत परिवार को दो पौष्टिक थालियों के भोजन में सालाना औसतन 10,887 रुपये का फायदा हुआ यानी उन्‍हें हर साल इतनी राशि की बचत हुई है. वहीं, मांसाहारी भोजन करने वाले पांच सदस्‍यों के परिवार को हर साल औसतन 11,787 रुपये का लाभ हुआ है. हालांकि, 2019 में इनकी कीमतों में तेजी रही.

पारदर्शी तरीके से कीमतें तय करने के कारण आम आदमी को मिला लाभ

आर्थिक समीक्षा के मुताबिक साल 2015-16 में थाली की कीमतों में बड़ा बदलाव आया. ऐसा 2015-16 में थालीनॉमिक्‍स यानी खाने की थाली के अर्थशास्‍त्र में बड़े बदलाव के कारण संभव हुआ. सरकार की ओर से 2014-15 में कृषि क्षेत्र की उत्‍पादकता और कृषि बाजार की कुशलता बढ़ाने के लिए कई सुधार किए गए.

इसके तहत ज्‍यादा पारदर्शी तरीके से कीमतें तय की गईं. इकोनॉमिक सर्वे 2020 में कहा गया है कि भोजन अपने आप में पर्याप्‍त नहीं है, बल्कि यह मानव संसाधन विकास का अहम घटक भी है. मानव संसाधन राष्‍ट्रीय संपदा के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है. सतत विकास लक्ष्‍य के तहत दुनियाभर के देश अपने एक भी नागरिक को खाली पेट नहीं सोने देने की नीति पर सहमत हुए हैं.

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