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IIT और IIM की संयुक्त पहल एनपीटीएल ने सतत विकास के नए कोर्स शुरू किए

पूरे देश के शिक्षार्थियों के लिए उपलब्ध एनपीटीईएल के 500 से अधिक निःशुल्क कोर्स आईआईटी और आईआईएससी के शिक्षक पढ़ाते हैं - इच्छुक व्यक्ति के लिए कहीं भी और कभी भी कोर्स करने की सुविधा कोरोना काल में वरदान
  
IIT और IIM की संयुक्त पहल एनपीटीएल ने सतत विकास के नए कोर्स शुरू किए

चेन्नई : नेशनल प्रोग्राम ऑन टेक्नोलॉजी एन्हांस्ड लर्निंग (एनपीटीईएल) आईआईटी और आईआईएससी की संयुक्त पहल है जिसने जुलाई 2021 सेमेस्टर के लिए इलेक्ट्रिक वाहन और अक्षय ऊर्जा, आईओटी के लिए डिजाइन, व्यापार और सतत विकास पर नए कोर्स शुरू किए हैं जो स्वयं प्लैटफॉर्म पर उपलब्ध होंगे।

शिक्षार्थी एनपीटीईएल के कोर्स घर पर आराम से कर सकते हैं। जुलाई-दिसंबर 2021 सेमेस्टर के लिए नामांकन शुरू है। एनपीटीईएल कोर्स के पहले सेट के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 2 अगस्त 2021 है।
कोर्स के अध्यापक आईआईटी और आईआईएम के शिक्षक हैं। शिक्षार्थी https://swayam.gov.in/NPTEL पर एनपीटीईएल कोर्स में नामांकन कर सकते हैं।

पूरे देश के शिक्षार्थियों के लिए एनपीटीईएल के 500 से अधिक निःशुल्क कोर्स ऑनलाइन उपलब्ध हैं। कहीं भी और कभी भी सीखने की इस संभावना से अध्ययन-अध्यापन शिक्षार्थी-केंद्रित और इनोवेटिव हो गया है। शिक्षा का ऑनलाइन माध्यम कोरोना काल में वरदान साबित हुआ है।

एनपीटीईएल की अनोखी पहलुओं को समाने रखते हुए आईआईटी मद्रास के एनपीटीईएल कॉर्डिनेटर प्रो. विग्नेश मुथुविजयन ने कहा, ‘‘स्वयं-एनपीटीईएल वर्तमान में पूरे देश के 4,000 से अधिक इंजीनियरिंग, कला, विज्ञान, वाणिज्य और प्रबंधन शैक्षिाक संस्थानों के साथ काम कर रहे हैं।

इनके विद्यार्थी और शिक्षक ज्ञान और कौशल बढ़ाने के लिए एनपीटीईएल कोर्स करते हैं। एनपीटीईएल प्लेटफॉर्म के विशेष लोकप्रिय कोर्स में शामिल हैं इंजीनियरों के लिए डेटा साइंस, पायथन, सी, सी$$ में प्रोग्रामिंग के कोर्स, मशीन लर्निंग का ज्ञान, सॉफ्ट स्किल्स, प्रोजेक्ट प्लानिंग एवं कंट्रोल आदि।

एनपीटीईएल एमओओसी फॉर्मेट में सर्टिफिकेशन कोर्स उपलब्ध कराता है। शिक्षार्थियों को ऑनलाइन वीडियो देखना, साप्ताहिक/मासिक असाइनमेंट जमा करना होता है और पंजीकरण करा कर प्रॉक्टर्ड अंतिम परीक्षा देने का विकल्प भी होता है। सर्टिफिकेशन के लिए व्यक्तिगत प्रॉक्टर्ड परीक्षा देने के लिए मामूली शुल्क लिया जाता है। एनपीटीईएल सर्टिफिकेशन परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद शिक्षार्थी क्रेडिट ट्रांस्फर करने का आवेदन कर सकते हैं यदि वे जिस शैक्षिक संस्थान से संबद्ध हैं वह इसकी मंजूरी देता हो।

एनपीटीईएल प्लेटफॉर्म पर इंजीनियरिंग, मानविकी, बुनियादी विज्ञान और प्रबंधन आदि के विभिन्न कोर्स उपलब्ध हैं। एनपीटीईएल में अब तक 1.4 करोड़ से अधिक शिक्षार्थियों ने नामांकन किए हैं। एनपीटीईएल के वीडियो अब तक एक अरब से अधिक बार देखे गए हैं और यूट्यूब पर एनपीटीईएल चैनलों के 3.1 मिलियन से अधिक सबस्क्राइबर हैं।

शिक्षार्थियों के प्रयासों को सही दिशा देने और क्षेत्र की विशेषज्ञता प्राप्त करने में उनके मार्गदर्शन करने के लिए एनपीटीईएल ने ‘डोमेन सर्टिफिकेशन‘ के कांसेप्ट की शुरुआत की है।

किसी डोमेन के अंदर कोर और इलेक्टिव एनपीटीईएल कोर्स का एक सेट होता है। डोमेन सर्टिफिकेशन का कोई अतिरिक्त चार्ज/शुल्क नहीं है। अब तक 12 विषयों में 51 डोमेन उपलब्ध हैं और आज की तिथि तक 85 शिक्षार्थियों ने एनपीटीईएल  से डोमेन सर्टिफिकेशन प्राप्त किए हैं।

एनपीटीईएल के जरिये कोर्स करने में शिक्षार्थी की उम्र कभी बाधक नहीं रही है। एनपीटीईएल के सबसे कम उम्र के शिक्षार्थियों में एक सावित्री बाई फुले हाई स्कूल, नांदेड़, महाराष्ट्र के छात्र श्री हर्षवर्धन पाटिल केवल 15 साल के हैं और एनपीटीईएल के माध्यम से पांच सर्टिफिकेशन कोर्स पूरे कर लिए हैं जिनके नाम हैं प्रभावी लेखन, सॉफ्ट स्किल विकास, तनाव प्रबंधन, जैव रसायन और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अंग्रेजी भाषा।

एनपीटीईएल की एक शिक्षार्थी कडपा (आंध्र प्रदेश) की सुश्री सिंगम निर्मला देवी ने कहा, ‘‘एनपीटीईएल कोर्स से प्राप्त ज्ञान, ‘पायथन की मदद से कम्प्युटिंग करने की खुशी‘ के साथ मुझे एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी लेने में मदद मिली। एनपीटीईएल के कोर्स से पायथन का कांसेप्ट समझना आसान हो गया और मैं साक्षात्कार में पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दे पाई।”

एनपीटीईएल की शुरुआत 2003 में सात भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (मंुबई, दिल्ली, कानपुर, खड़गपुर, मद्रास, गुवाहाटी और रुड़की) ने भारतीय विज्ञान संस्थान, बंगलुरु के साथ मिल कर की। आज एनपीटीईएल भारत का सबसे बड़ा एमओओसी  प्रदाता है।

साथ ही, विश्वसनीय प्रॉक्टर्ड सर्टिफिकेशन परीक्षा का आयोजन करता है जो कोर्स करने वाले शिक्षार्थियों को सुयोग्य बनाती है और अन्य शिक्षार्थियों की तुलना में निस्संदेह विशिष्ट पहचान देती है।
 

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