राष्ट्रीय स्तर पर एनआरसी तैयार करने को लेकर अभी तक नहीं लिया कोई फैसला : सरकार
राष्ट्रीय स्तर पर एनआरसी तैयार करने को लेकर अभी तक नहीं लिया कोई फैसला : सरकार
राष्ट्रीय स्तर पर एनआरसी तैयार करने को लेकर अभी तक नहीं लिया कोई फैसला : सरकार
राष्ट्रीय स्तर पर एनआरसी तैयार करने को लेकर अभी तक नहीं लिया कोई फैसला : सरकार

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राष्ट्रीय स्तर पर एनआरसी तैयार करने को लेकर अभी तक नहीं लिया कोई फैसला : सरकार

नई दिल्ली : गृह मंत्रालय ने लोकसभा में मंगलवार को एक लिखित जवाब में कहा कि सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) तैयार करने को लेकर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है। लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक सवाल के जवाब में, गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि अब तक
  

राष्ट्रीय स्तर पर एनआरसी तैयार करने को लेकर अभी तक नहीं लिया कोई फैसला : सरकार

नई दिल्ली : गृह मंत्रालय ने लोकसभा में मंगलवार को एक लिखित जवाब में कहा कि सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) तैयार करने को लेकर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है।

लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक सवाल के जवाब में, गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि अब तक सरकार ने एनआरसी पर कोई भी फैसला नहीं लिया है।

उन्होंने लिखित जवाब में कहा, “अबतक, राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय नागरिकों के लिए एनआरसी तैयार करने को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया है।”

यह सवाल सांसद चंदन सिंह और नागेश्वर राव ने पूछा। उन्होंने पूछा कि ‘क्या सरकार के पास देश में एनआरसी लाने की कोई योजना है और अगर सरकार इसकी योजना बना रही है तो इसकी अंतिम तिथि क्या है।’

इसके अलावा उन्होंने पूछा कि ‘क्या केंद्र ने इस बारे में राज्यों से कोई चर्चा की है? क्या सरकार ने राज्यों से एनआरसी को लागू नहीं करने को लेकर कोई पत्र प्राप्त किया है और अगर ऐसा कोई पत्र प्राप्त किया है तो राज्यवार इसकी क्या जानकारी है।’

गौरतलब है कि 22 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी कहा था कि सरकार ने 2014 में सत्ता में आने के बाद संसद या कैबिनेट में इस बारे में चर्चा नहीं की। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी पिछले शुक्रवार को दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में अपने संबोधन में एनआरसी का जिक्र नहीं किया था।

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एनआरसी के उन्नयन का काम केवल असम में हो रहा है।

लोकसभा में ही के नवासखनी ने एक प्रश्न में सरकार से जानना चाहा कि क्या मुस्लिम शरणार्थियों को अब भारत में नागरिकता प्रदान की जायेगी।इस पर गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लिखित उत्तर में कहा, ‘‘किसी भी श्रेणी के वैध प्रवासी देशीकरण अधिनियम की धारा 6 अथवा पंजीकरण अधिनियम की धारा 5 के माध्यम से भारतीय नागरिकता हासिल करने की मौजूदा कानूनी प्रक्रिया में कोई संशोधन नहीं हुआ है।’’

उन्होंने बताया कि पड़ोसी देशों के बहुसंख्यक लोगों वाले धर्म के कई प्रवासियों को भी उनके द्वारा सक्षम प्राधिकारी के समक्ष आवेदन किये जाने और उनके पात्र पाए जाने पर भारतीय नागरिकता प्रदान की गई।

उन्होंने कहा कि भारत के सभी वैध प्रवासियों को, चाहे वे किसी भी धर्म के हों, नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों के अनुसार, यदि वे पात्रता की शर्तों को पूरा करते हैं तो नागरिकता जारी रहेगी।

मंत्री ने अपने लिखित जवाब के साथ साल 2010 के बाद से भारतीय नागरिकता प्रदान किये गए विदेशी नागरिकों का वर्षवार ब्यौरा दिया।

इसके अनुसार, साल 2010 से 2019 के बीच 21408 विदेशी नागरिकों को भारतीय नागरिकता प्रदान की गई।

नित्यानंद राय ने कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 का उद्देश्य अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन पारसी और ईसाई समुदायों के ऐसे प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने की सुविधा देना है जिन्होंने अपने देश में धर्म के आधार पर उत्पीड़न होने अथवा ऐसे उत्पीड़न के भय के कारण भारत में शरण ले रखी है और जिन्होंने 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत में प्रवेश किया है।

केंद्र के इस स्पष्टीकरण के बाद उम्मीद है कि सीएए-एनआरसी-एनपीआर को लेकर देशभर में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों में कुछ नरमी आएगी।

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