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जानिये इस ख़ास रिपोर्ट में, क्यों नहीं हो पाएगी निर्भया केस के दोषियों को 1 फरवरी को भी फांसी

जानिये इस ख़ास रिपोर्ट में, क्यों नहीं हो पाएगी निर्भया केस के दोषियों को 1 फरवरी को भी फांसी

नई दिल्ली : निर्भया केस के दोषियों को 1 फरवरी को भी फांसी नहीं हो पाएगी। खबर है कि विनय शर्मा की ओर से राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के सामने दया याचिका दायर किए जाने के बाद तिहाड़ जेल प्रशासन ने फांसी की तारीख आगे बढ़ा दी है।

दिल्ली जेल मैन्युअल 2018 के मुताबिक, राष्ट्रपति के समक्ष पेश की जाने वाली दया याचिका जेल अधीक्षक द्वारा आगे बढ़ाई जाती है। याचिका के कवरिंग पेज पर जेल अधीक्षक लिखता है कि फांसी की अमूक तारीख तय थी, जिसे दया याचिका पर फैसला होने तक टाल दिया गया है। वहीं एक नियम यह भी कहता है कि जिस दिन राष्ट्रपति दया याचिका खारिज करते हैं, उसके 14 दिन तक का समय दोषी को मिलता है।

तिहाड़ जेल के एडि. आईजी राज कुमार के मुताबिक, विनय ने दया याचिका दायर कर दी है। अब जेल मैन्युअल के मुताबिक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बता दें, इससे पहले दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने चारों दरिदों, विनय शर्मा, मुकेश सिंह, पवन गुप्ता और अक्षय कुमार सिंह के खिलाफ 1 फरवरी का डेथ वारंट जारी किया था।

इसलिए नहीं दे सकते एक-एक को फांसी

निर्भया के दोषियों द्वारा कानून का गलत फायदा उठाया जा रहा है। मांग उठ रही है कि सभी को एक साथ फांंसी देने के बजाए अलग-अलग टांग दिया जाए, लेकिन नियानुसार ऐसा नहीं हो सकता है। नियम है कि अपराध में शामिल दोषियों को एक साथ ही फांसी दी जाए।

जाने आरोपी विनय ने अपनी दया याचिका में क्या लिखा है

विनय की ओर से उसके वकील ओपी सिंह ने याचिका दायर की है। 300 पेज की इस दया याचिका में लिखा गया है कि तिहाड़ जेल में उसके साथ बहुत बुरा बर्ताव हुआ है। उसने राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि वे उसके वकील ओपी सिंह को निजी तौर पर राष्ट्रपति भवन आकर सारी घटनाक्रम बयां करने की अनुमति दें।

वकील का भी कहना है कि विनय के साथ जो बर्ताव हुआ है, उसे लिखित में बयां नहीं किया जा सकता है, इसलिए राष्ट्रपति मुताकात की अनुमति दें।

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