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क्या आपका भी बच्चा करता है सबके सामने जिद, तो फॉलो करें ये टिप्स

Ganga । DHNN
25 Nov 2022 1:45 AM GMT
क्या आपका भी बच्चा करता है सबके सामने जिद, तो फॉलो करें ये टिप्स
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जब आपका बच्चा जिद्दी हो तो उसके साथ शांति से पेश आएं। कई माता-पिता ऐसे होते हैं जो बच्चे के जिद करने पर खुद चिल्लाने और बहस करने लगते हैं, जिससे वह और भी चिड़चिड़ा हो जाता है।

इन दोनों बातों को समझना और बच्चों को संभालना बेहद मुश्किल है, लेकिन नामुमकिन भी नहीं है। बच्चे कब और किसके सामने किस बात की जिद करने लगे, इसका कोई भरोसा नहीं है।

वे हालात बहुत मुश्किल होते हैं जब आपका बच्चा कई लोगों की मौजूदगी में गुस्सैल या जिद्दी हो जाता है। ऐसे में आपको समझ नहीं आता कि करें तो क्या करें। संतान की जिद से न सिर्फ आप परेशान हैं, बल्कि आपके सामने खड़े दूसरे लोग भी परेशान हो सकते हैं।

ऐसे में बच्चे को संभालना जरूरी हो जाता है। लेकिन आप अपने बच्चे को सरेआम थप्पड़ या चिल्ला नहीं सकते, जो कि गलत भी है। ऐसे में आप कुछ तरीके आजमाकर अपने बच्चे की जिद और गुस्से पर काबू पा सकते हैं।

अपने बच्चे को समझो

बच्चा अकेले में, किसी और के सामने भी जिद्दी हो सकता है, लेकिन इसका कोई कारण जरूर है। इसलिए पहले समझें कि आपका बच्चा क्या कहना चाह रहा है। अगर आप अपने बच्चे की जिद की वजह समझ जाते हैं तो उसे भी समझना आपके लिए आसान हो सकता है।

बच्चे से बहस न करें

जब आपका बच्चा जिद्दी हो तो उसके साथ शांति से पेश आएं। कई माता-पिता ऐसे होते हैं जो बच्चे के जिद करने पर खुद चिल्लाने और बहस करने लगते हैं, जिससे वह और भी चिड़चिड़ा हो जाता है।

बच्चे को चुप कराने के लिए झूठे वादे न करें।

अक्सर देखा जाता है कि लोग अपने बच्चे को भीड़ में चुप कराने का झूठा वादा करते हैं, जैसे कि उन्हें खिलौने या चॉकलेट मिलेंगे, लेकिन फिर वे इस बात को भूल जाते हैं, जिससे बच्चे को बाद में उन बातों की याद आ जाती है।

वह बार-बार रोता है और धीरे-धीरे उसके अंदर जिद और गुस्सा बढ़ने लगता है, जिससे अगली बार उसका गुस्सा फिर फूट सकता है।ऐसे में माता-पिता को अपने बच्चे को शांत करने के लिए प्यार और शांति से बात करनी चाहिए।

अपने बच्चे का सम्मान करें

अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा किसी के सामने आपका अपमान न करे और जिद न करे तो उसकी और उसकी बातों का सम्मान करें। हमें लगता है कि केवल हमें ही सम्मान चाहिए।

लेकिन बच्चे भी चाहते हैं कि हर कोई उनके साथ अच्छा व्यवहार करे और उनकी बातों को समझे। इसलिए बच्चे को आदेश देने के बजाय उसकी बातों को समझने में ही समझदारी है।

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