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लांग टर्म कैपिटल गेन्स कर से सरकार को नहीं मिला फायदा : वित्तमंत्री

लांग टर्म कैपिटल गेन्स कर से सरकार को नहीं मिला फायदा : वित्तमंत्री

नई दिल्ली : वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को कहा कि बजट में लांग टर्म कैपिटल गेन्स (एलटीसीजी) कर हटाने का फैसला इसलिए नहीं लिया गया, क्योंकि सरकार को इससे अब तक कोई फायदा नहीं मिला।

उन्होंने कहा कि बाजार की स्थिति खराब रहने के कारण इस कर की उपयोगिता की जांच नहीं हो पाई, इसलिए सरकार इससे प्राप्त रिटर्न का आकलन नहीं कर पाई है।

उन्होंने यह बात बजट में इस कर को नहीं हटाने को लेकर पूछे गए सवाल पर कही।

वित्तमंत्री ने कहा, “अगर बाजार ऊंचा होता तो हम यह आकलन कर पाते कि इससे हमें कितनी राशि मिली। हमें कोई फायदा नहीं मिला इसलिए यह यथावत है।”

एलटीसीजी को यथावत रखने के फैसले के संबंध में वित्तमंत्री ने बताया, “बाजार ही नहीं बल्कि अनेक दूसरे लोगों की भी मांग थी। हमने कुछ समायोजन करने की कोशिश की। हमने डीडीटी का समायोजन किया, लेकिन एलटीसीजी का नहीं।”

उन्होंने कहा, “एलटीसीजी दो पहले लाई गई थी। इससे कुछ फासदा हम देखते कि इससे पहले बाजार ने गोता लगाया और इससे हमें कोई बड़ा रिटर्न नहीं मिला।”

वित्तमंत्री ने कहा, “अगर कर बहुत कुछ नहीं दे रहा है, जो उसे वापस लेना सही नहीं है क्योंकि हमें इसका आकलन नहीं भी नहीं है कि इससे क्या मिलेगा।”

बाजार में अधिकांश लोगों को अनुमान था कि सरकार इसे वापस ले सकती है।

एक साल से अधिक समय के म्यूचुअल फंड इक्विटी में निवेश पर रिटर्न को लांग टर्म कैपिटल गेन्स कहा जाता है और इस पर किसी वित्त वर्ष में एक लाख रुपये से अधिक की रकम पर 10 फीसद कर लगता है।

पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेटली ने इसे 2016 में दोबारा शुरू किया था।

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट 2020 में डीडीटी अर्थात डेवीडेंट डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स को हटा दिया, लेकिन यह शेयरधारक की आय में शामिल रहेगी।

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