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दिल्ली विधानसभा चुनाव में 200 से ज्यादा करोड़पति उम्मीदवार, 133 उम्मीदवारों के खिलाफ दर्ज हैं आपराधिक मामले

दिल्ली विधानसभा चुनाव में 200 से ज्यादा करोड़पति उम्मीदवार, 133 उम्मीदवारों के खिलाफ दर्ज हैं आपराधिक मामले

नई दिल्ली : दिल्ली विधानसभा चुनाव के मैदान में उतरे 133 उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं. इनमें से 104 उम्मीदवार गंभीर आपराधिक मामलों में आरोपी हैं.

नामांकन दाखिल करने के दौरान चुनाव आयोग को दिए हलफनामे में उम्मीदवारों ने यह जानकारी दी है. दिल्ली इवेक्शन वॉच और एडीआर (ADR) ने इन हलफनामों की समीक्षा के बाद ये जानकारी दी है.

बता दें कि दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों पर कुल 672 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं. इनमें से 200 से ज्यादा उम्मीदवार करोड़पति हैं. लेकिन राजनीतिक दलों से 50 प्रतिशत आरक्षण की मांग उठाने वाली महिलाओं का इसमें नंबर महज 12 प्रतिशत है.

133 उम्मीदवारों के खिलाफ दर्ज हैं आपराधिक मामले

एडीआर के अध्ययन के अनुसार, कुल उम्मीदवारों में 133 (लगभग 20 प्रतिशत) के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं. वहीं वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव के दौरान 673 उम्मीदवारों में से 114 (लगभग 17 प्रतिशत) ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी दी थी. इसके अलावा 104 उम्मीदवारों ने जानकारी दी है वो गंभीर आपराधिक मामलों के आरोपी हैं.

जानिए कितने हैं करोड़पति उम्मीदवार

दिल्ली विधानसभा चुनाव में बड़ी संख्या में करोड़पति प्रत्याशी भी उतरे हुए हैं. यहां ऐसे उम्मीदवारों की संख्या 243 के करीब है. दिल्ली के मुंडका से चुनाव लड़ रहे आम आदमी पार्टी (AAP) उम्मीदवार धर्मपाल लकड़ा की कुल संपत्ति तकरीबन 292 करोड़ है. जबकि आरके पुरम से आप की उम्मीदवार प्रमिला टोकस की कुल संपत्ति 80 करोड़ है.

वहीं, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) की टिकट पर चुनाव लड़ रहे राजेश कुमार की कुल संपत्ति मात्र 3600 रुपए है. जबकि शालीमार बाग सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ रही पूनम कौशिक छह हजार की मालिकन हैं.एडीआर की स्टडी के अनुसार, दिल्ली में विधानसभा चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 4.34 करोड़ रूपये की है.

चुनाव मैदान में महिलाओं को नहीं मिली पूरी भागीदारी

दिल्ली चुनाव में महिलाओं की भागीदारी काफी कम है. राजनीतिक दलों से हमेशा अपना प्रतिनिधित्व मांगने वाली महिलाओं की कैंडिडेट के रूप में संख्या उम्मीद से काफी कम है.

कुल प्रत्याशियों में महिला उम्मीदवारों की संख्या महज 79 (लगभग 12 प्रतिशत) है. चुनाव लड़ने वाली महिलाओं की संख्या से साफ जाहिर हो रहा है कि राजनीतिक दल महिलाओं को आबादी के अनुसार भागीदारी देने में असफल रहे हैं.

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