क्योंकि सच जानना आपका हक़ है
क्योंकि सच जानना आपका हक़ है

भारतीय सेना की दबंग महिला मेजर से छेड़छाड़ की फाइल दोबारा जांच के आदेश

भारतीय सेना की दबंग महिला मेजर से छेड़छाड़ की फाइल दोबारा जांच के आदेश

कोटा : कोटा के भीमगंज मंडी थाने में भारतीय सेना की दबंग महिला मेजर से छेड़छाड़ की फाइल पर स्थानीय पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट (एफआर) लगाकर खाक डाल दी।

पीड़िता ने पुलिस की रिपोर्ट को अदालत में चुनौती दी, और अदालत ने 22 जनवरी, 2020 को पुलिस की एफआर खारिज कर दी। अदालत ने मामले की दोबारा जांच के आदेश दिए हैं।

सूत्रों के मुताबिक, एफआईआर में नामजद आरोपी मेजर पदोन्नत होकर लेफ्टिनेंट कर्नल बन चुका है। सूत्रों ने बताया कि पीड़िता महिला मेजर भारतीय सेना की इंजीनियरिंग कोर में, जबकि आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल (घटना के समय मेजर) सेना की सप्लाई-कोर में इलाहाबाद में तैनात हैं।

इस मामले को लेकर मीडिया ने दिल्ली में मौजूद भारतीय सेना के जनसंपर्क अधिकारी अमन आनंद से भी बात की। उन्होंने कहा, काफी कोशिशों के बाद भी इस मामले में अभी तक मुझे कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। जैसे ही कुछ तथ्य मिलेंगे, बता दिया जाएगा।

पीड़ित महिला मेजर के बयान पर कोटा शहर के थाना भीमगंजमंडी में दर्ज की गई एफआईआर के मुताबिक, 24 जून, 2018 को रात करीब दो बजे (आधी रात के बाद) पीड़िता अपने सरकारी फ्लैट (कोटा डडवाडा मिल्रिटी कैंट) में अकेली थी। उसी समय आरोपी मेजर, पीड़िता के फ्लैट में जबरन घुस आया। उस वक्त आरोपी शराब के नशे में धुत्त था।

एफआईआर के मुताबिक, आरोपी ने महिला मेजर के बेडरूम में घुसने की असफल कोशिश की। आरोपी ने महिला मेजर के अंगों को छुआ। आरोपी की मंशा भांपते ही पीड़िता उसे धकियाते हुए पड़ोस में रहने वाले एक कर्नल के फ्लैट में जा पहुंची। परिस्थितियां विपरीत और खुद को फंसता समझ कर आरोपी घटनास्थल की छत (पहली मंजिल) से कूदकर भाग गया।

पीड़िता के मुताबिक, आरोपी को मेरे फ्लैट की छत से कूदकर ब-रास्ते खाली प्लाट से जाते हुए, उन कर्नल साहब ने भी देखा था, जिनके घर मैं आरोपी के चंगुल से छूटकर पहुंची थी। घटना वाली बाकी बची रात मैं पड़ोसी कर्नल और उनकी पत्नी के आग्रह पर उन्हीं के फ्लैट में छिपकर रही। अगले दिन आरोपी बीबी को साथ लेकर उन्हीं कर्नल साहब के फ्लैट में पहुंचा, जहां रात को मैं अपनी अस्मत बचाने की उम्मीद में जाकर छिप गई थी।

पीड़ित महिला मेजर ने मीडिया को फोन पर बताया, घटना वाली रात के अगले दिन जब आरोपी मेजर पत्नी के साथ मुझसे माफी मांगने फ्लैट पर पहुंचा, तो मैंने उसकी बातचीत रिकार्ड कर ली। रिकॉर्डिड बातचीत को बतौर सबूत भीमगंज मंडी थाना पुलिस कहीं रिकार्ड में लाई ही नहीं।

तो क्या घटना की शिकायत सीधे पुलिस में दर्ज कराई गई? या पीड़िता ने इस बारे में सेना से भी संपर्क किया? पीड़ित महिला मेजर ने मीडिया से कहा, मैंने घटना से सेना के संबंधित अधिकारियों को अवगत करा दिया था।

दो साल में विभागीय जांच कहां पहुंची? सेना की तरफ से मुझे इस बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं दी गई है। पहली बार जब मैं अंग्रेजी में शिकायत कोटा शहर के भीमगंजमंडी थाने में लिखकर ले गई, तो मुझे थाना वालों ने यह कहकर टरका दिया कि मैं शिकायत हिंदी में लिखवा कर लाऊं।

उन्होंने आगे कहा, हिंदी में लिखी शिकायत थाने लेकर पहुंची, तो पुलिस वालों ने एफआईआर दर्ज करते वक्त, संदिग्ध/अभियुक्त के कॉलम में मेरे द्वारा नामजद किए गए आरोपी मेजर का नाम दर्ज न करके उसे खाली छोड़ दिया।

पीड़िता के मुताबिक, इससे जाहिर है कि पुलिस की मंशा पहले दिन से ही आरोपी को बचाने की थी। नामजद शिकायत के बाद भी पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया।

दो साल पुराने इस मामले में भूचाल और कोटा पुलिस को पसीना तब आया, जब पीड़ित महिला मेजर की ओर से दिल्ली के वरिष्ठ क्रिमिनल लॉयर सतेंद्र शर्मा ने उत्तर कोटा (राजस्थान) की अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट शिल्पी बंसल की अदालत में पुलिस के एफआर के खिलाफ विरोध-याचिका दायर की।

विरोध याचिका के मुताबिक, आरोपी ने जांच के दौरान खुद माना कि वह घटना वाली रात पीड़िता के पास पहुंचा था। अगले दिन (24 जून, 2018) रात की घटना के लिए वह पत्नी के साथ पीड़िता से माफी मांगने पहुंचा। जिस दंपत्ति के घर वह माफी मांगने पहुंचा, उसके बयान भी तस्दीक के लिए काफी थे। जोकि मामले के जांच अधिकारी द्वारा ही दर्ज किए गए।

अब अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट, उत्तर कोटा (राजस्थान) सोनल पारिख की अदालत ने पुलिसिया जांच को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। 22 जनवरी, 2020 को जारी अदालती आदेश में कहा गया है, पीड़िता की लिखित शिकायत में उल्लेख के बाद भी एफआईआर के अभियुक्त/संदिग्ध के कॉलम में आरोपी का नाम दर्ज न किया जाना जांच-अधिकारी की लापरवाही को दर्शाता है।

आरोपी की मोबाइल रिकॉर्डिग, जोकि पीड़िता ने ही की थी, को भी दौरान-ए-तफ्तीश बतौर सबूत जांच अधिकारी द्वारा पड़ताल में शामिल नहीं किया गया। आरोपी के उस बयान की तस्दीक में भी अनुसंधान अधिकारी ने कोई दस्तावेज-सबूत पेश नहीं किए हैं, जिनमें आरोपी ने कहा है कि पीड़िता महिला मेजर इस तरह के आरोप लगाकर शिकायतें करने की पहले से ही आदी है। लिहाजा भीमगंज मंडी थाना पुलिस इस मामले में नियमानुसार अग्रिम अनुसंधान (जांच) करके, जांच-रिपोर्ट तत्काल पेश करे।

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More