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मप्र में शिवराज सरकार के 100वें दिन कांग्रेस ने मनाया 'काला दिवस'

  

भोपाल : मध्यप्रदेश में सत्ता बदलने और शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के मंगलवार को सौ दिन पूरे हो गए। इस मौके पर भाजपा ने तो कोई उत्सव नहीं मनाया, मगर कांग्रेस ने सत्ता में बदलाव को लोकतंत्र की हत्या करार देते हुए काला दिवस मनाया।

कांग्रेस ने शिवराज सरकार के खिलाफ समूचे प्रदेश में जिला और विकासखंड स्तर पर प्रदर्शन किया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार को, जनादेश प्राप्त सरकार को, साजिश रचकर गिरा दिया गया। भाजपा ने प्रदेश में किस तरह का खेल खेला, यह सभी ने देखा।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर हमला बोलते हुए कहा, खरीद-फरोख्त की सच्चाई को तो खुद जिम्मेदारों ने स्वीकारा कि किस प्रकार केंद्रीय नेतृत्व के इशारे पर कुछ लोगों के साथ मिलकर यह खेल खेला गया।

कांग्रेस की सरकार इसलिए गिरा दी गई, क्योंकि किसानों का कर्ज माफ किया जा रहा था, युवाओं को रोजगार दिया जा रहा था, महिलाओं को सम्मान व सुरक्षा मिल रही थी, प्रदेश में माफियाओं के खिलाफ अभियान चल रहा था, मिलावटखोरों पर अंकुश लगाने के लिए अशुद्ध के विरुद्ध युद्ध छेड़ा गया था, गौशालाएं बन रही थीं, प्रदेश में निवेश लाया जा रहा था, हम झूठी घोषणाएं नहीं कर रहे थे, प्रदेश की दशा-दिशा बदलने में लगे थे।

कमल नाथ ने आरोप लगाया कि भाजपा को भय था कि यदि ऐसे ही जनहितैषी कार्य होते रहे तो उसका वर्षो तक सत्ता में लौटना नामुमकिन है। उन्होंने कहा, भाजपा सरकार के 100 दिन भी सभी ने देखे हैं।

किस प्रकार आज किसान परेशान है, गरीब परेशान है, प्रवासी मजदूरों की स्थिति सभी ने देखी, भारी भरकम बिजली बिलों से जनता परेशान है। पेट्रोल-डीजल की मूल्यवृद्धि से आमजन परेशान है।

महंगाई की मार से सब परेशान हैं। कोरोना नियंत्रण में सरकार की असफलता सब देख रहे हैं। इन 100 दिनों में सिर्फ झूठी घोषणाएं करने वाली, केवल प्रचार-प्रसार वाली सरकार ही देखी है, जिसका जनहित से कोई सरोकार नहीं है।

काला दिवस मनाने के लिए आयोजित कार्यक्रमों में कांग्रेस के तमाम बड़े नेताओं ने हिस्सा लिया और भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला। वहीं भाजपा की ओर से सरकार के सौ दिन पूरा होने पर किसी तरह का समारोह व कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया। भाजपा को अभी पूर्ण बहुमत नहीं है, सत्ताधारियों की आस 24 सीटों पर होने वाले उपचुनाव पर टिकी हुई है।

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