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गोवंश, पंचगव्य चिकित्सा एवं वैदिक उपचार में सहभागिता की जरूरतः उमेश चंद्र पोरवाल

  
गोवंश, पंचगव्य चिकित्सा एवं वैदिक उपचार में सहभागिता की जरूरतः उमेश चंद्र पोरवाल


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गुवाहाटी, 26 नवम्बर (हि.स.)। गौ माता ही इस धरती एवं मनुष्य जाति का संरक्षण करने में सक्षम हैं। इनकी उपयोगिता तथा शक्ति के आगे पूरा विश्व नतमस्तक है। बस जरूरत है वैज्ञानिकों तथा विद्वानजन की सहभागिता की। पूरे पूर्वोत्तर को गौ संवर्धन तथा गौ आधारित कृषि, रसायन मुक्त कृषि करने का दृढ़ संकल्प लेकर कार्य करने की जरूरत है। ये बातें आज भारतीय गौवंश रक्षण एवं संवर्धन परिषद (विहिप) के केंद्रीय मंत्री एवं पूर्वोत्तर भारत असम क्षेत्र पालक उमेश चंद्र पोरवाल आईआईटी गुवाहाटी के भ्रमण के दौरान कही।

पोरवाल शुक्रवार को आईआईटी गुवाहाटी में एक दिवसीय भ्रमण के तहत गोवंश की उपयोगिता तथा गोबर संयंत्र ऊर्जा की प्रयोगशाला प्रशिक्षण एनर्जी साइंस एंड टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट में पहुंचे थे। इस मौके पर प्रमुख तकनीकी अधिकारी डॉ. लीपाक्षी बारबर्न तथा प्रोजेक्ट मैनेजर जॉन मनी कलिता एवं डॉ. गौरव त्रिवेदी मौजूद थे।

पोरवाल ने बताया कि गो विज्ञान अनुसंधान केंद्र देवलापार, नागपुर (महाराष्ट्र) को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोमूत्र अर्क एवं गोमूत्र नीम के पांच पेटेंट प्राप्त हुए हैं। जो मानव स्वास्थ्य एवं कृषि के लिए श्रेष्ठ हैं। उन्होंने आईआईटी के वैज्ञानिकों के मुखातिब होते हुए कहा कि आप जैसे वैज्ञानिकों के अनूठे प्रयास से यह सब संभव है। साथ ही उन्होंने सौर ऊर्जा लैब की जानकारी ली। इस मौके पर डॉ. प्रतिमा अग्रवाल (भौतिक विभाग) ने यह स्वीकार लिया कि सौर ऊर्जा का कोई भी प्रोजेक्ट बिना गौ सयंत्र तथा ग्राम तक पहुंचे अधूरा है।

आईआईटी गुवाहाटी में वैदिक कैंसर लैब ट्रीटमेंट तथा टेलीमेडिसिन व मूंगा सिल्क के लिविंग कल्चर का एक बड़ा प्रोजेक्ट काम कर रहा है। उसकी सराहना करते हुए पोरवाल ने लैब इंचार्ज डॉ. लेखिका पाठक के साथ उनके लैब का दौरा किया तथा लैब के विभागाध्यक्ष विकुल दास की पुस्तक - एक वैज्ञानिक की हिंदुत्व यात्रा जो कि असमिया भाषा में है, उसकी भी सराहना की।

पोरवाल ने बताया कि भारत देश की जो देशी गाये हैं उसमें लक्खी गाय असम क्षेत्र की गाय को कहा जाता है। सरकार एवं हम सभी को इनके संवर्धन पर कार्य करने की विशेष आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की कल्पना (आत्मनिर्भर भारत, कर्जमुक्त किसान, गोवंश ग्राम, लोकल फॉर वोकल) को पूर्वोत्तर भारत में भी साकार करना है तथा आयुर्वेद संवर्धन एवं वैदिक प्राकृतिक चिकित्सा तथा पंचगव्य चिकित्सा के साथ ही भविष्य (स्वस्थ्य भारत - स्वस्थ्य विश्व) की कल्पना गोवंश के बिना पूरा नहीं हो सकता। इस मौके पर शशिकांत पाण्डेय, विराज बरफुकन, पृथ्वीराज, एकन आदि व्यक्ति भी मौजूद थे।

हिन्दुस्थान समाचार/ अरविंद/मुकुंद

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