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नेता विहीन होती जा रही बसपा, प्रदेश में कांग्रेस की स्थितियां भी अनुकूल नहीं

  
नेता विहीन होती जा रही बसपा, प्रदेश में कांग्रेस की स्थितियां भी अनुकूल नहीं


प्रतिकात्मक फोटो


- बसपा में ब्राह्मण -दलित गठजोड़ का फार्मूला इस बार नहीं बैठ रहा ठीक, पार्टी में भगदड़ की हो गयी है स्थिति

-कांग्रेस में प्रियंका तो दिखा रही सक्रियता, लेकिन दूसरे लेयर के नेताओं का है अभाव

लखनऊ, 26 नवम्बर (हि.स.)। एक तरफ मायावती ब्राह्मण-दलित गठजोड़ मुद्दे को जोर-शोर से उठा रही हैं। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी उत्तर प्रदेश के चुनाव को लेकर काफी सक्रिय हैं लेकिन इन दोनों दलों के बड़े नेता पार्टी से किनारा कर दूसरे दलों की ओर रुख कर रहे हैं। इससे आने वाले चुनाव में इनकी वोट बैंक पिछले विधानसभा से भी नीचे खिसकने के आसार बढ़ते जा रहे हैं।

अब तक बसपा के 11 विधायक दूसरे भाजपा अथवा सपा में जा चुके हैं। वहीं कांग्रेस की नेता रायबरेली की विधायक अदिति सिंह, जितिन प्रसाद सहित कई दिग्गज भाजपा का दामन थाम चुके हैं। अभी भी दोनों दलों से कई नेता पाला बदलने की फिराक में लगे हुए हैं। इससे चुनाव आते-आते तो दोनों पार्टियां एक तरह से नेता विहीन की स्थिति में आ जाएंगे।

इस संबंध में राजनीतिक विश्लेषक राजीव रंजन सिंह का कहना है कि प्रियंका वाड्रा ने लखीमपुर में किसानों की मौत के बाद जो सक्रियता दिखाई, उसके बाद तो लगा कि कांग्रेस में कुछ जान आ जाएगी लेकिन जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे कांग्रेस का ग्राॅफ नीचे की ओर खिसकता हुआ दिख रहा है। राजनीति में कब क्या होगा, यह तो कुछ कहा नहीं जा सकता, लेकिन इतना जरूर है कि अभी कांग्रेस और बसपा की स्थितियां ठीक नहीं हैं।

वहीं वरिष्ठ पत्रकार अनिल सिंह राणा का कहना है कि इस बार तो जो दलित वर्ग में एक विशेष जाति बसपा की तरफ ही रहता था, वह भी खिसकता जा रहा है। इस वोट बैंक को भाजपा अपनी तरफ मोड़ने में लग गई है। यदि बसपा के खिसके वोट को भाजपा खुद लेने में सफल हो जाती है तो फिर आने वाले चुनाव में उसका ग्राॅफ काफी बढ़ सकता है।

यह बता दें कि गुड्डू जमाली के बसपा छोड़ने के बाद वहां ज्यादा हड़कंप मचा हुआ। बसपा अब तक जमाली के भरोसे मुस्लिम समुदाय को अपने से जोड़ने के लिए प्रयोग करने वाली थी लेकिन उसके पास अब कोई वैसा मुस्लिम चेहरा नहीं बचा है। पार्टी छोड़ने का सिलसिला कहां जाकर थमेगा, यह कहना कठिन है। अब तक पार्टी असलम, चौधरी, मो. मुजतबा, असलम राइनी, सुषमा पटेल, डाॅ. हरगोविंद भार्गव, और हाकिम लाल बिंद ने बसपा छोड़कर सपा का दामन थाम लिया है। वहीं वंदना सिंह बसपा छोड़कर भाजपा जा चुकी हैं। रामअचल राजभर और लाल जी वर्मा का बसपा से निष्कासन ही हो गया। मुख्तार अंसारी को पहले ही टिकट न देने का बसपा ने फैसला किया है। वहीं कांग्रेस के पास पूरब में हारे हुए नेता अजय राय व कुशीनगर से अजय कुमार लल्लू ही बचे हैं।

हिन्दुस्थान समाचार/उपेन्द्र

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