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आंदोलन को हुआ एक साल, गाजीपुर बॉर्डर पहुंचे किसान

  
आंदोलन को हुआ एक साल, गाजीपुर बॉर्डर पहुंचे किसान


बागपत, 26 नवंबर (हि.स.)। जिले की तहसील बड़ौत क्षेत्र में कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन को शुक्रवार को एक साल पूरा हो गया है। इसी को लेकर किसान शुक्रवार को भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष नरेश टिकैत की अगुवाई में गाजीपुर बार्डर पहुंचे।

गाजीपुर बार्डर के लिए जाते समय भाकियू के अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने बड़ौत शहर में पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि आज किसान आंदोलन की एक साल की वर्षगांठ है। वर्षगांठ होने पर गाजीपुर बार्डर पर जा रहे हैं। सरकार किसानों को दिल्ली में जाने नहीं दे रही है। किसान यूपी बॉर्डर पर बैठे हैं। किसानों का कोई ऐसा उद्देश्य नहीं है कि सरकार को नीचा दिखाए, लेकिन हमारी प्रतिष्ठा की बात है। सरकार बात करे,अच्छा लगेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि हमने तीनों किसी कानून वापस ले लिया है, तो उनका भी स्वागत है और धन्यवाद है। यह मुंहजुबानी नहीं, लिखित में भी तो कुछ चाहिए, देखें आगे तो संयुक्त मोर्चा को है राइट ज्यादा और बारीकी का तो उनको ही पता है, पर हम यही चाह रहे हैं कि फैसला होना चाहिए और अच्छे तरीके से फैसला हो। बाकी तो किसान भी सम्मान के साथ अपने घर जाएं,सबसे बड़ी यही बात है। उन्होंने कहा कि हमारा कोई अड़ियल रवैया नहीं है। सरकार ने यहां तक बात पहुंचा दी, सरकार का ही जिद्दी रवैया है । हमारा किसानों का कोई जिद्दी रवैया नहीं है। किसानों की एमएसपी की मांग है। सरकार एक कानून बना दे कि इस रेट में आप की फसल खरीदी जाएगी। हमारे करीब 700 किसान शहीद हो गए । हमें कोई शौक थोड़े है । यह कोई हमारे फायदे का सौदा नहीं है। आंदोलन है । करोड़ों लोगों की निगाहें किसानों की आंदोलन पर लगी है। आंदोलन में किसानों को आतंकवादी, खालिस्तानी, पाकिस्तानी, आंदोलनजीवी कहा जा रहा है, लेकिन किसानों का फिर भी इतना बड़ा दिल है कि किसानों ने हंस कर टाल देते हैं।

हिन्दुस्थान समाचार/ गौरव साहनी

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