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कश्मीर में आतंकवाद के खात्मे के लिए अपनानी होगी चाणक्य और इजरायल नीति: प्रोफेसर शांति पंडित

  
कश्मीर में आतंकवाद के खात्मे के लिए अपनानी होगी चाणक्य और इजरायल नीति: प्रोफेसर शांति पंडित


धर्मशाला, 23 अक्तूबर (हि.स.)। जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान की ओर से पैदा की गई आतंकवाद और कट्टरता जैसी समस्याओं से निपटने के लिए हमें चाणक्य की नीति अपनानी होगी। केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के कश्मीर अध्ययन केंद्र की ओर से आयोजित साप्ताहिक व्याख्यानमाला के दूसरे दिन में बतौर मुख्यवक्ता प्रोफेसर शांति श्री पंडित ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि भारत की स्थापना का आधार ही सबका कल्याण रहा है। हिंदू परंपरा यह कहती है कि किसी की भी पद्धति से पूजा करें, वह ईश्वर तक पहुंचती है। लेकिन अब्राहमिक धर्मों में ऐसा नहीं है। वहां लोकशाही की कमी दिखती है, जबकि हिंदुत्व एक जीवनशैली है। इस्लामिक कट्टरता की वजह से ही आतंकवाद कश्मीर में बढ़ा है।

पुणे स्थित सावित्री बाई फुले यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर शांति श्री पंडित ने कहा कि भले ही हमारी विचारधारा वसुधैव कुटुंबकम की है, लेकिन जमीनी स्तर पर हमें सख्ती भी दिखानी होगी। उन्होंने कहा कि हमें आतंकवाद से निपटने के लि इजरायल जैसी नीति की जरूरत है ताकि वे भारत सरकार से डरें। यदि पाकिस्तान ने आतंकवाद को अपनी विदेश नीति का हिस्सा बना लिया है तो हमें उससे सख्ती से निपटना होगा। यदि आतंकी हमले में हमारे किसी एक जवान का बलिदान होता है तो फिर हमें 10 को मारना होगा। प्रोफेसर पंडित ने कहा कि आज देखते हैं कि आज जिहादियों और वामपंथियों का मिलन हो रहा है। यह हमारे लिए बहुत बड़ा धोखा है। ऐसे में जम्मू-कश्मीर की बात करें तो हमारी लड़ाई दो लेवल पर होनी चाहिए। एक वैचारिक स्तर पर है और दूसरी राजनीतिक एवं सैन्य स्तर पर है।

उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडितों का 1990 में जो उत्पीड़न हुआ था, उसकी उस स्तर पर आलोचना और प्रतिक्रिया हिंदू समाज की ओर से नहीं हुई, जैसी होनी चाहिए थी। प्रोफेसर पंडित ने कहा कि हमें लिखना और बोलना होगा ताकि सभी को इस बारे में पता चल सके। उन्होंने कहा कि 1971 के युद्ध में पाकिस्तान की 13 दिनों में ही हार हो गई थी। इस पराजय के बाद उन्होंने किसी तरह से भारत का मुकाबला करने के लिए प्रयास शुरू किए थे। पाकिस्तान ने तब से ही आतंकवाद को अपनी विदेश नीति का हिस्सा बना लिया है।

प्रोफेसर शांति श्री पंडित ने कहा कि कश्मीर समस्या के लिए समाधान के लिए हमें भारत केंद्रित नैरेटिव दुनिया के आगे रखना होगा। उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडितों को जिस प्रकार के जनसंहार का सामना करना पड़ा था, उसकी दुनिया भर में चर्चा नहीं हुई थी। ऐसे में हमें इसके बारे में दुनिया को बताना होगा और एक तरह से छत पर चढ़कर चिल्लाना होगा।

कश्मीर अध्ययन केंद्र की ओर से 22 से 28 अक्टूबर तक व्खाख्यानमाला का आयोजन चल रहा है। शनिवार को प्रोफेसर शांति श्री पंडित ने जम्मू-कश्मीर में पाक प्रायोजित आतंकवाद और नरसंहार को लेकर अपनी बात रखी। इससे पहले शुक्रवार को आशुतोष भटनागर का व्याख्यान था।

हिन्दुस्थान समाचार/सतेंद्र

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