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ब्रोन्कियल थर्मोप्लास्टी अब राजस्थान अस्पताल में उपलब्ध, दिल्ली तक दौड़ से मिलेगी राहत

  
ब्रोन्कियल थर्मोप्लास्टी अब राजस्थान अस्पताल में उपलब्ध, दिल्ली तक दौड़ से मिलेगी राहत


ब्रोन्कियल थर्मोप्लास्टी अब राजस्थान अस्पताल में उपलब्ध, दिल्ली तक दौड़ से मिलेगी राहत


-प्रदेश में अस्थमा के गंभीर मरीजों के लिए नजदीकी विकल्प उपलब्ध

-ब्रोन्कियल थर्मोप्लास्टी तकनीक से पुराने अस्थमा मरीज को किया ठीक

जयपुर, 26 नवम्बर (हि.स.)। ब्रोन्कियल थर्मोप्लास्टी तकनीक से अब जयपुर में भी उपचार उपलब्ध है। अब तक तक इसके लिए दिल्ली तक दौड़ लगानी पड़ती थी। इस तकनीक से उपचार जयपुर के राजस्थान अस्पताल में उपलब्ध हो गया है और बरसों से अस्थमा की पीड़ा भोग रहे मरीजों को लाभ भी हुआ है।

राजस्थान अस्पताल की इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी कन्सलटेंट एवं डायरेक्टर लंग सेंटर डॉ. शीतू सिंह ने बताया कि अस्थमा तब गंभीर रूप ले सकता है जब दवाइयों से रोगी को लक्षणों में राहत नहीं मिले। इस बीमारी में इनहेल्ड स्टेरॉयड आज सर्वमान्य दवा है। जिन अस्थमा के रोगियों को इनहेलर लेने के बावजूद भी सांस में तकलीफ बार-बार होती है, उनके फेफड़ों की क्षमता भी कम हो जाती है। इसके अलावा “बार बार बीमार और बार बार ठीक” की प्रक्रिया से रोगी को बार-बार गुज़रना पड़ता है। यह स्थिति रोगी के लिये न केवल तनावपूर्ण होती है बल्कि भयावह भी। जीवन के हालात तब और भी ख़राब हो जाते हैं जब अस्थमा की वजह से काम से अनुपस्थिति, डिप्रेशन और संसाधनों की कमी का दबाव बढ़ता है।

ऐसी ही स्थिति में पहुंचे एक 63 वर्षीय पुरुष रोगी को इनहेल्ड स्टेरॉयड की हाई डोज के साथ ओरल स्टेरॉयड भी बार-बार लेना जरूरी हो रहा था। उन्हें ब्रोन्कियल थर्मोप्लास्टी की सलाह दी गई जिसे परिवारजनों ने स्वीकारा।

डॉ. सिंह ने बताया कि उनकी देख-रेख में थर्मोप्लास्टी प्रोसीजर लगभग 3 सप्ताह के अन्तराल से तीन बार किया गया। हर बार रोगी को 24 घंटों के लिए भर्ती किया गया। डॉ. सिंह ने बताया कि प्रदेश में यह पहली थर्मोप्लास्टी की शुरुआत हुई है। अगस्त, सितम्बर और अक्टूबर में एक-एक करके तीन सीटिंग के बाद अब मरीज स्वस्थ है। मरीज की वाइटल कैपेसिटी भी 51 प्रतिशत से बढ़कर 61 फीसदी हो गई है।

जानिये ब्रोन्कियल थर्मोप्लास्टी के बारे में

-ब्रोन्कियल थर्मोप्लास्टी के बारे में डॉ. शीतू सिंह ने बताया कि अस्थमा में जब सांस नली की दीवार मोटी हो जाती हैं, तब सांस नली का अन्दर का आकार सिकुड़ जाता है। ऐसी अवस्था में सांस नली की दीवार पतला करना अस्थमा के रोग में आराम पहुंचाने का अच्छा विकल्प है। इन्हें पतला करने के लिए पूर्ण नियंत्रित गर्मी प्रदान करने की क्रिया को थर्मोप्लास्टी कहते हैं। इसके बाद सांस लेने की प्रक्रिया में काफ़ी आराम मिलता है। प्रक्रिया में किसी भी तरह का चीरा नहीं लगता है। मुंह में ब्रॉन्कोस्कोप की सहायता से ब्रोन्कियल थर्मोप्लास्टी की जाती है।

अमेरिका की एफडीए एवं भारतीय ड्रग कंट्रोलर से मान्यता प्राप्त इस प्रक्रिया से रोगी को लक्षणों में लम्बी राहत मिलती है, जिससे क्वालिटी ऑफ लाइफ में सुधार के साथ ही अस्पतालों की इमरजेंसी या एडमिशन की दौड़ धूप से निजात मिलती है।

हिन्दुस्थान समाचार/सुनीता कौशल

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