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अधिकारों एवं कर्तव्यों के संतुलन वाला पवित्र दस्तावेज है संविधान- राज्यपाल

  
अधिकारों एवं कर्तव्यों के संतुलन वाला पवित्र दस्तावेज है संविधान- राज्यपाल


अधिकारों एवं कर्तव्यों के संतुलन वाला पवित्र दस्तावेज है संविधान- राज्यपाल


उदयपुर, 26 नवम्बर (हि.स.)। भारत का संविधान एक दस्तावेज नहीं बल्कि स्वयं एक संस्कृति है। यह हमारी उदात्त भारतीय परंपराओं को व्याख्यायित करती है। हमारा संविधान अधिकारों एवं कर्तव्यों के संतुलन वाला पवित्र दस्तावेज है।

यह बात राज्यपाल कलराज मिश्र ने शुक्रवार को संविधान दिवस के अवसर पर उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में नवनिर्मित संविधान पार्क, मुख्य द्वार एवं विभिन्न भवनों के लोकार्पण के बाद आयोजित समारोह में कही।

राज्यपाल मिश्र ने कहा कि संविधान में लोक कल्याण की बात प्रमुखता से कही गई है क्योंकि सबका हित इसी भावना में निहित है। उन्होंने संविधान में चित्रांकन परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि महाभारत, रामायण एवं पौराणिक आख्यानों को रेखांकित करते हुए प्रेरणा प्रदान करने के लिए संविधान में चित्र अंकित किए गए हैं। यह हमारी संस्कृति का ही प्रतिरूप है। हमारा संविधान अधिकारों एवं कर्तव्यों के संतुलन वाला पवित्र दस्तावेज है। इसकी प्रस्तावना दुनिया के तमाम संविधानों की प्रस्तावनाओं में सर्वश्रेष्ठ है।

राज्यपाल ने कहा कि अधिकारों की बात सब करते हैं और उसका गलत इस्तेमाल करते हुए अराजकता फैलाने की कोशिश भी करते हैं। ऐसे लोगों को कर्तव्यों की जानकारी नहीं होती। इसीलिए उन्होंने राज्यपाल बनने के बाद सार्वजनिक समारोहों में कर्तव्यों का वाचन शुरू करवाया। संविधान पार्क बनाने की संकल्पना रखी और मुझे प्रसन्नता है कि मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय पहला विश्वविद्यालय बन गया है जिसने कम समय में संविधान पार्क बनाया है। इसमें कर्तव्यों का उल्लेख किया गया है जिसको पढ़ कर विद्यार्थियों के मन में अधिकारों के साथ ही कर्तव्यों को निर्वहन करने की प्रेरणा जगेगी।

विश्वविद्यालय के परिसर विस्तार की बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि उनकी शुभकामनाएं हैं कि यह विश्वविद्यालय बहुसंकायात्मक विश्वविद्यालय बने और विश्व में अपना नाम कमाए। उन्होंने कहा कि वे शीघ्र ही निंबाहेड़ा के विस्तारित परिसर में भी आएंगे। विधानसभा अध्यक्ष डॉक्टर सीपी जोशी द्वारा की गई नाथद्वारा को टीएसपी क्षेत्र में जोड़ने की मांग पर उन्होंने कहा कि वे शीघ्र ही इस संबंध में अधिकारियों से बात करेंगे, बैठक करेंगे और शीघ्र ही स्वयं इन जिलों का दौरा भी करेंगे।

कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉक्टर सीपी जोशी ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र हम सब की आत्मा में बसा है और इसकी रक्षा करना हम सबका दायित्व है। उन्होंने कहा कि भारत एक विविधतापूर्ण परिवेश एवं विविध संस्कृतियों का देश है जिसमें सबके अधिकारों को सुरक्षित किया गया है। यही संसदीय लोकतंत्र की खूबसूरती है। उन्होंने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में जनता की भागीदारी भी सक्रिय रुप से होनी चाहिए। जनता को चाहिए कि वे मत देकर 5 साल तक भूले नहीं बल्कि जिस को वोट दिया है, वह सही काम कर रहा है या नहीं कर रहा है, उस पर भी पूरी नजर होनी चाहिए, तभी लोकतंत्र मजबूत बन पाएगा।

डॉ. जोशी ने कहा कि सत्ता के विकेंद्रीकरण के लिए कई काम किए गए लेकिन विकेंद्रीकरण के आधार पर निचले स्तर तक अधिकार नहीं पहुंच पाए। इसीलिए यह प्रक्रिया लोगों की आकांक्षाओं पर पूरी तरह खरी नहीं उतरी और शायद इसीलिए संसदीय लोकतंत्र इतना मजबूत नहीं हो पाता है जितना हम चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हर विषय पर डिबेट और डिस्कस होना चाहिए। जनता को वॉच डॉग की भूमिका निभानी चाहिए जनप्रतिनिधि काम कर रहे हैं या नहीं कर रहे इस पर नजर रखनी चाहिए। हम अपने अधिकारों के साथ कर्तव्यों को अभी समुचित ध्यान रखें तो संसदीय लोकतंत्र मजबूत हो पाएगा।

इस अवसर पर सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने कहा कि विश्वविद्यालय के कुलपति ऊर्जावान हैं और विधानसभा अध्यक्ष का उनको साथ मिला है। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रगति की ओर निरंतर अग्रसर होगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि निम्बाहेड़ा में ईस्ट ब्लॉक कैंपस का उद्घाटन भी शीघ्र किया जाएगा।

उदयपुर सांसद अर्जुन मीणा ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने राजसमंद जिले के आदिवासियों को टीएसपी में शामिल करने की जो मांग रखी है, वे उसका समर्थन करते हैं और इस संबंध में अगर राज्य सरकार प्रस्ताव भेजती है तो वे इसे केंद्र में आगे बढ़ाने एवं उस पर अमल कराने के लिए पूरा प्रयास करेंगे।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अमेरिका सिंह ने सभी का स्वागत करते हुए पिछले एक वर्ष की उपलब्धियों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि उनके विश्वविद्यालय में 2 लाख छात्र पढ़ते हैं लेकिन आदिवासी क्षेत्र के विद्यार्थियों को दूरस्थ इलाकों में रहने के कारण लाभ नहीं मिल पाता। वे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। उन्हीं के लिए परिसर विस्तार की योजनाएं बनाई गई है। प्रो. सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय की आदिवासी मिलाप योजना भी इसी का एक हिस्सा है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई विश्वविद्यालयों से आपसी सहयोग की बातचीत चल रही है। जो भी सहयोग मिलेगा उसे सबसे पहले आदिवासी क्षेत्र में पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।

इस अवसर पर मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के अब तक के इतिहास पर प्रकाशित महत्वपूर्ण ग्रंथ का लोकार्पण भी किया गया। अंत में समाज विज्ञान संकाय के अध्यक्ष एवं इतिहास ग्रंथ के संपादक प्रोफेसर एसके कटारिया ने धन्यवाद दिया।

हिन्दुस्थान समाचार/सुनीता कौशल/संदीप

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