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रतलाम: चार लाख से अधिक मठ-मंदिर सरकार के नियंत्रण में, उन्हें मुक्त किया जाना चाहिए: महंत रविन्द्रपुरी महाराज

  
रतलाम: चार लाख से अधिक मठ-मंदिर सरकार के नियंत्रण में, उन्हें मुक्त किया जाना चाहिए: महंत रविन्द्रपुरी महाराज


रतलाम: देश के चार लाख से अधिक मठ, मंदिर सरकार के नियंत्रण में है, जिन्हें मुक्त किया जाना चाहिए-महंत रविन्द्रपुरी महाराज


रतलाम, 26 नवंबर (हि.स.)। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविन्द्रपुरी महाराज ने यहां कहा कि देश के चार लाख मठ, मंदिर सरकार के नियंत्रण में है, जिन्हें मुक्त किया जाना चाहिए। सरकार इन मंदिरों की मालिक नहीं हो सकती। यह भक्तों के नियंत्रण में होना चाहिए तथा इन मंदिरों की संपत्ति, चढ़ावे तथा दान की राशि का उपयोग सनातन धर्म की रक्षा और उन्नति के लिए किया जाना चाहिए।

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविन्द्रपुरी महाराज ने यह बात आज यहां पत्रकारों से चर्चा करते हुए कही। वे यहां एक आयोजन के सिलसिले में आए हुए हैं। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म काफी पुराना धर्म है, इस पर आज कई खतरे मंडरा रहे हैं तथा विघटन के प्रयास हो रहे हैं। सनातन धर्मावलंबियों को चाहिए कि वह जाग्रत होकर धर्म की रक्षा के लिए कार्य करें। उन्होंने कहा कि मठ,मंदिरों की संपत्ति और चढ़ावे की राशि का उपयोग धर्म रक्षा के साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य तथा निर्धनों के उत्थान जैसे सामुदायिक कार्यों पर खर्च किया जाना चाहिए, जबकि कई स्थानों पर विशेषकर दक्षिण भारत में अन्य धर्मों पर व्यय हो रहा है।

महंतजी ने कहा कि चढ़ावे और मठ मंदिरों की संपत्ति के दुरूपयोग को रोकने के लिए शासन नियंत्रण की भूमिका अदा कर सकता है, लेकिन स्वामी नहीं हो सकता। अतएव मठ, मंदिरों को सरकार के नियंत्रण से मुक्त रखने की भावना अखाड़ा परिषद की है।

देश के विभिन्न जिलों और गांवों में मठ,मंदिरों और हो रहे कुठाराघात को देखते हुए लोगों को जागरूक होना होगा। देश में छ: लाख छत्तीस हजार गांव है, हर जिले में सनातन संस्कृति की सुरक्षा होना चाहिए। जहां-जहां त्रुटियां है उन्हें जनसहयोग सेे ठीक किया जाना चाहिए। हमारी सोच सकारात्मक हो यह जरूरी है।

उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर भी चर्चा की और कहा कि उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री इस दिशा में काफी सक्रिय है । मुख्यमंत्री योगी का नेतृत्व काफी कुशल है, वे सादगीभरा जीवन जीते हैं। प्रदेश की कमान संभाले हुए हैं। उन पर कोई आरोप लगा नहीं सकता।

उनके साथ ही मंदिर निर्माण समिति एवं राम मंदिर से जुड़ी अन्य समितियां ने काफी संघर्ष किया है, जिसके अब सार्थक परिणाम सामने आए हैं। मथुरा-वृंदावन में भगवान कृष्ण की जन्म भूमि के मामले में कहा कि भगवान कृष्ण सर्वव्यापी है, मन-मन में बसे हैं, इससे जुड़ी समितियां तो सार्थक प्रयास कर ही रही हैं,लेकिन जब भगवान कृष्ण चाहेंगे वह स्वयं ही अपनी जन्मभूमि को मुक्त करवा लेंगे।

पत्रकारों से चर्चा केे दौरान महामंडलेश्वर स्वामी चिदम्बरानंद महाराज मुंबई तथा महामंडलेश्वर स्वामी आत्मानंदपुरी महाराज पंजाब ने भी सनातन संस्कृति पर हो रहे कुठाराघात पर चिंता जताई और कहा कि सनातन धर्मवलंबियों को जागरूक होकर संस्कृति की रक्षा करना होगी। मठ,मंदिरों को सरकार के नियंत्रण से मुक्त करवाने के लिए भी प्रयास करना होंगे। संतद्वय ने सनातन संस्कृति और सनातन धर्म पर प्रकाश डाला। इनके साथ ही महामंडलेश्वर महेश्वरानंदपुरी महाराज पाली, महामंडलेश्वर पुरूषोत्तम आनंद सरस्वती सीतापुर, महा संविदानंद सरस्वती मुंबई भी उपस्थित थे।

ज्ञातव्य है संत समाज की समस्या को दूर करना आमजन का मागदर्शन करना ही अखाड़ा परिषद का उद्देश्य है, साथ ही अखाड़ों को एकजुट कर धर्म संस्कृति का उत्थान व युवा वर्ग का मार्गदर्शन कर राष्ट्र और मानव सेवा में योगदान के लिए प्रेरित करना ही लक्ष्य है। अखाड़ा परिषद साधु, संतों की सर्वोच्च संस्था है, जिसमें 13 अखाड़े शामिल हैं।

हिन्दुस्थान समाचार/शरद जोशी

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