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सस्ते आवास देने के फैसले का कर्मचारी संगठनों ने किया स्वागत

  
सस्ते आवास देने के फैसले का कर्मचारी संगठनों ने किया स्वागत


सस्ते आवास देने के फैसले का कर्मचारी संगठनों ने किया स्वागत 


-कर्मचारी परिषद के अध्यक्ष जेएन तिवारी ने फैसले के लिए सीएम योगी का जताया आभार

-समूह ग और घ श्रेणी के कर्मियों के लिए सोचने वाली पहली सरकार : जेएन तिवारी

-माफियाओं से खाली कराई गई भूमि पर कर्मचारियों के लिए सस्ते मकान बनाएगी सरकार

-मुख्यमंत्री ने आवास विभाग को दिए हैं प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश

लखनऊ, 23 अक्टूबर (हि.स.)। राज्य कर्मियों के लिए सस्ते आवास बनाने के योगी सरकार के फैसले का कर्मचारी संगठनों ने स्वागत किया है। राज्य संयुक्त कर्मचारी परिषद के अध्यक्ष जेएन तिवारी ने समूह ग और घ श्रेणी के कर्मचारियों के लिए इसे सरकार की बड़ी सौगात बताया है।

जेएन तिवारी ने शनिवार को यहां कहा कि पहली बार किसी सरकार ने समूह ग और घ श्रेणी के कर्मचारियों के हित में ऐसा बड़ा फैसला लिया है। सरकार के इस कदम से कर्मचारियों में खुशी की लहर है। इस फैसले से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा। वे और बेहतर काम के लिए प्रेरित होंगे। कर्मचारियों की तरफ से मैं मुख्यमंत्री योगी को धन्यवाद देता हूं।

गौरतलब है कि मुख्तार, अतीक और बदन सिंह बद्दो जैसे तमाम माफियाओं के कब्जे से मुक्त कराई गई भूमि पर योगी सरकार कर्मचारियों के लिए आवास बनाने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आवास विभाग को योजना का प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया है।

राज्य सरकार के एक प्रवक्ता का कहना है कि प्रदेश में पहली बार भूमाफिया के खिलाफ ऐतिहासिक कार्रवाई करते हुए सरकारी और निजी अरबों रुपए की कीमत की डेढ़ लाख एकड़ से ज्यादा भूमि राज्य सरकार ने खाली कराई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2017 में प्रदेश की कमान संभालने के बाद भूमाफिया के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद प्रदेश में चार स्तरीय एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स का गठन कर कार्यवाही शुरू की गई थी।

राजस्व विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 15 अगस्त तक करीब 62423.89 हेक्टेयर यानि 1,54,249 एकड़ से अधिक भूमि को मुक्त कराया गया है। साथ ही राजस्व विभाग ने 2464 अतिक्रमणकारियों को चिह्नित करते हुए 187 भूमाफियाओं को जेल भेजा है और 22,992 राजस्व वाद, 857 सिविल वाद दर्ज करते हुए 4407 एफआईआर कराई गई है।

हिन्दुस्थान समाचार/पीएन द्विवेदी

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