"क्योंकि सच जानना आपका हक है"

×
doon Horizon

भारतीय संविधान में विकास के समान अवसर : प्रोफेसर दुबे

  
भारतीय संविधान में विकास के समान अवसर : प्रोफेसर दुबे


भारतीय संविधान पर व्याख्यान


--भारतीय संविधान सर्व समाज के लिए विकास का सामाजिक दस्तावेज : कुलपति

प्रयागराज, 26 नवम्बर (हि.स.)। भारतीय संविधान जहां सभी को समानता का अधिकार देता है वहीं कमजोर वर्ग को मुख्यधारा में लाने के लिए विशेष अवसर प्रदान करता है। भारतीय संविधान की प्रस्तावना सभी नागरिकों की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सुरक्षा के साथ ही समानता, स्वतंत्रता एवं भ्रातृत्व पर बल देती है।

उक्त विचार डॉ शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय लखनऊ के प्रो. अश्वनी दुबे ने भारतीय संविधान एवं सामाजिक न्याय पर व्याख्यान के दौरान व्यक्त किया। उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में शुक्रवार को समाज विज्ञान विद्या शाखा के राजनीति शास्त्र विभाग की तरफ से संविधान दिवस के अवसर पर ऑनलाइन व्याख्यान का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान असहाय तथा पिछड़े हुए लोगों को मुख्यधारा में लाने के लिए विशेष अवसर प्रदान करता है, जिससे समाज का कोई भी वर्ग अपने आप को उपेक्षित न महसूस कर सके और सभी को विकास का समान अवसर मिले।

अध्यक्षता करते हुए मुक्त विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर सीमा सिंह ने कहा कि भारतीय संविधान की रचना ने देश को एक सूत्र में बांधकर सभी नागरिकों को समानता व स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान किया। संविधान दिवस पर हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम देश के एक अच्छे नागरिक बने और संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों के अंतर्गत समाज का विकास करें। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान नियमों का ग्रंथ ही नहीं बल्कि सर्व समाज के लिए विकास का सामाजिक दस्तावेज है।

संयोजक प्रो. एस कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन आयोजन सचिव डॉ दीपशिखा श्रीवास्तव ने तथा प्रतिभागियों का धन्यवाद सह संयोजक डॉ आनंदानंद त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर डॉ संजय कुमार सिंह, सुनील कुमार, डॉ दीपशिखा, डॉ त्रिविक्रम तिवारी, रमेश चंद यादव, डॉ अभिषेक सिंह समेत शोध छात्रों ने ऑनलाइन प्रतिभाग किया।

हिन्दुस्थान समाचार/विद्या कान्त

फेसबुक पर हमसे जुड़ने के लिए यहां क्लिक करें, साथ ही और भी Hindi News ( हिंदी समाचार ) के अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें.

Share this story