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देहरादून में 21 वें भारत रंग महोत्सव के समानांतर कार्यक्रम का आयोजन होगा

देहरादून : राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) की ओर से आयोजित 21 वें भारत रंग महोत्सव (बीएमआर) के समानांतर आयोजन के तौर पर नाट्य महोत्सव का आयोजन देहरादून में पहली बार होने जा रहा है। यह आयोजन उत्तराखंड सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग के सहयोग से हो रहा है। सात दिनों तक चलने वाले इस
  

देहरादून में 21 वें भारत रंग महोत्सव के समानांतर कार्यक्रम का आयोजन होगा

देहरादून : राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) की ओर से आयोजित 21 वें भारत रंग महोत्सव (बीएमआर) के समानांतर आयोजन के तौर पर नाट्य महोत्सव का आयोजन देहरादून में पहली बार होने जा रहा है। यह आयोजन उत्तराखंड सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग के सहयोग से हो रहा है।

सात दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव की षुरूआत 6 फरवरी से होगी और यह 12 फरवरी तक चलेगा। भारत रंग महोत्सव, 2020 के समानांतरण संस्करणों का आयोजन देहरादून के अलावा दिल्ली, षिलांग, नागपुर, विल्लुपुरम और पुदुचेरी में भी हो रहा है।

एनएसडी के प्रमुख (टीआईई) श्री अब्दुल लतीफ खताना ने मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि इस महोत्सव का उद्घाटन 6 फरवरी 2020 को शाम 6.00 बजे न्यू ऑडिटोरियम में संस्कृति विभाग (उत्तराखंड सरकार) द्वारा किया जाएगा। इस मौके पर उत्तराखंड के मुख्य मंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत अपनी उपस्थिति से समारोह को गरिमामय बनाएंगे।

समारोह में विषिश्ट अतिथि के तौर पर राज्य के संस्कृति मंत्री श्री सतपाल महाराज भी उपस्थित रहेंगे। यह समारोह विषेश अतिथि के तौर पर प्रसिद्ध कवि एवं पत्रकार श्री लीलाधर जगुड़ी और प्रसिद्ध रंगकर्मी एवं सिनेमा अभिनेत्री श्रीमती हिमानी शिवपुरी की गौरवमय उपस्थिति में आयोजित होगा। उद्घाटन समारोह के बाद महाकवि भास द्वारा लिखित नाटक चारूदत्ता का भव्य प्रदर्षन होगा जिसका निर्देषन भूपेश जोशी ने किया है।

महोत्सव के दौरान, उत्साही थिएटर प्रेमियों को आधुनिक थिएटर के साथ-साथ क्षेत्रीय नाटकों से रूबरू होने का अनोखा अवसर मिलेगा। दर्षकों को क्षेत्रीय नाट्य स्वरूपों और अंतराश्ट्रीय नाटकों के लाजवाब सम्मिश्रण को देखकर अविस्मरणीय अनुभव प्राप्त होगा। देहरादून में 21 वें भारत रंग महोत्सव के दौरान भारत तथा विष्व भर से चुने गए सात सराहनीय नाटकों की षानदार प्रस्तुति होगी जिन्हें बहुत ही सलीके के साथ क्युरेट किया गया है।

इस महोत्सव में चार भारतीय नाटक और तीन विदेषी नाटकों का मंचन होगा। जिन भारतीय नाटकों का मंचन होगा उनमें दो नाटक बंगला में हैं, एक नाटक असमिया में तथा एक नाटक मलयालम में है जबकि श्रीलंका के नाटक अंग्रेजी में तथा नेपाल के नाटक नेपाली भाशा में होंगे।

6 फरवरी को उद्घाटन नाटक के तौर पर प्रदर्षित होने वाले नाटक चारुदत्ता की कथावस्तु न केवल उस कालखंड के भारतीय समाज का प्रतिनिधित्व करता है बल्कि आधुनिक समाज के पतनशील मूल्यों पर भी प्रकाश डालता है। इसमें दिखाया गया है कि किस तरह से प्यार और भाईचारे का स्थान धोखे, चालाकी और अपराध ने ले लिया है।

कहानी में दिखाया गया है कि उज्जैनी का समृद्ध निवासी चारूदत्त अपनी दयालु और उदारता के कारण निर्धन आदमी बन जाता है। दरबार नर्तकी वसंतसेना षहर की गौरव है। वह दयावान, उदार और सुंदर युवती है। चारुदत्त के असाधारण गुणों से प्रभावित होकर वह उसके प्यार में पागल हो जाती है।

यद्यपि कहानी संस्कृत साहित्य में यथार्थवाद का एक अनूठा उदाहरण है, लेकिन साथ ही साथ यह समकालीन भारतीय रंगमंच के लिए भी उपयुक्त है।

एनएसडी के कार्यवाहक अध्यक्ष, डा. अर्जुन देव चरण ने कहा, “भारत रंग महोत्सव का उद्देश्य लोगों को एक सूत्र में बांधना है। हमने राश्ट्र के इस उत्सव का विस्तार इस उद्देष्य के साथ किया है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़ सकें। भारत रंग महोत्सव अनोखे तौर पर काफी अधिक संख्या में लोगों को आकर्शित करने वाला बहुत ही प्रभावी महोत्सव रहा है और हमें उम्मीद है कि इस साल भी यह पहले की तरह सफलतापूर्वक सम्पन्न होगा।’’

महोत्सव के बारे में बताते हुए, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) के प्रभारी निदेषक श्री सुरेश शर्मा, ने कहा, “21 वां भारत रंग महोत्सव का मुख्य आधार दर्षकों को आकर्षक अनुभव प्रदान करना है। इसमें ऐसे षो हैं जो दर्षकों को केवल इस बात का अहसास नहीं कराएंगे कि वे कुछ देख रहे हैं बल्कि उनके मन-मस्तिश्क पर गहरी छाप भी छोड़ेंगे। यहीं नहीं दर्षक परिवेष, डिजाइन और वातावरण के महत्व का भी अनुभव कर सकेंगे।”

हर शाम होने वाले नाटकों के अलावा, न्यू ऑडिटोरियम कैम्पस में संबंधित कार्यक्रम होंगे जिनमें पारंपरिक नृत्य और लोक प्रदर्शन भी शामिल होंगे।

21 वें भारत रंग महोत्सव में कुल 91 नाटकों का प्रदर्षन किया जाएगा। यह नई दिल्ली में 1 फरवरी से शुरू होकर 21 फरवरी 2020 तक चलेगा।

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) के बारे में:

1959 में स्थापित, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय भारत में अपनी तरह का एकमात्र विद्यालय है। यह एक स्वायत्त संस्था है जो पूरी तरह से संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वित्तपोषित है। यह विश्व में सबसे अग्रणी रंगमंच प्रशिक्षण संस्थान में से एक है।

एनएसडी को संगीत नाटक अकादमी के तत्वावधान में शुरू किया गया और 1975 में यह स्वतंत्र संस्था बन गई। यह रंगमंच के हर पहलू में 3 साल का पूर्णकालिक, आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदान करता है जिसके तहत सद्धांतों के व्यावहारिक कार्यान्वयन पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाता है।

इसके पूर्व छात्रों और संकाय सदस्यों की सूची अत्यंत उल्लेखनीय है और इन्होंने इस बात को सुनिष्चित किया कि यह यह संस्था मंचीय कला के शीर्ष पर कायम रहे। इस प्रतिश्ठित संस्था से निकलने वाले अनेक रंगकर्मियों जिनमें नाटककार, अभिनेता, निर्देशक, सेट एंड लाइट डिजाइनर और संगीत निर्देशकों षामिल हैं, ने भारतीय रंगकर्म को समृद्ध किया है और वे आज भी ऐसा कर रहे हैं।

थिएटर के अलावा एनएसडी के पूर्व छात्रों की कलात्मक अभिव्यक्तियों ने अक्सर अन्य मीडिया में भी एक अमिट छाप छोड़ी है। एनएसडी के मंचीय प्रभाग हैं – रिपर्टरी कंपनी और थिएटर-इन एजुकेशन कंपनी (टीआईई) जो क्रमशः 1964 और 1989 में शुरू हुई थीं। नई दिल्ली के साथ, एनएसडी के भारत भर में अपने क्षेत्रीय संसाधन केंद्र हैं। ये वाराणसी, गंगटोक, त्रिपुरा और बेंगलुरु में स्थित हैं।

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