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देहरादून : शनिवार और रविवार को नहीं लगेगा लॉकडाउन, प्रशासन या सरकार ने नहीं दी कोई सहमति 

  

देहरादून : कोविड-19 के चलते चैपट हो चुके व्यापार के बावजूद एक बार फिर से दो दिनी लॉकडाउन की पैरवी देहरादून में व्यापारियों द्वारा की जाने लगी है। इन दो दिनी लॉकडाउन से आखिर कोरोना को रोकने में कैसे सफलता मिल सकती है जब तीन महीने के पूर्ण लॉकडाउन में कोरोना का कहर नहीं थम सका।

वहीं केन्द्रीय गाइडलाइन के अनुसार किसी भी प्रदेश के किसी भी हिस्से में लॉकडाउन के लिए सरकार को केन्द्र सरकार से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। उत्तराखण्ड में जिस तरह से कोरोना का कहर दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है उसको देखते हुए लॉकडाउन की सख्त जरूरत व्यापारियों द्वारा बताई जा रही है।

व्यापारी वर्ग देहरादून में सप्ताह के अंत में दो दिनों के लिए लॉकडाउन की मांग कर रहा है। दून उघोग व्यापार मंडल ने बीते रोज ही डीएम से मिल कर कहा कि व्यापारी तीन सप्ताह तक दो दिन के लिए अपनी दुकानें बंद रखेंगे।

ऐसा वे कोरोना संक्रमण की चेन तोडऩा चाहते हैं जबकि यह स्पष्ट उल्लेखनीय है कि कोरोना संक्रमण की चेन तोडऩे के लिए कम से कम 14 दिनों का लॉकडाउन अनिवार्य है। दो दिन के लॉकडाउन से कोई असर कोरोना संक्रमण पर नहीं पडऩे वाला है।

व्यापार मंडल द्वारा स्वत: ही दुकानें बंद रखने की बात कही गई है और प्रशासन से भी सहयोग मांगा है। हालांकि केन्द्र सरकार की यह स्पष्ट गाइडलाइन है कि अब केन्द्रीय परामर्श के बिना कोई राज्य लॉकडाउन नहीं लगा सकते हैं।

इस संबंध में आदेश जारी होने के बाद से यहां होने वाले दो दिन के लॉकडाउन की व्यवस्था को भी समाप्त कर दिया गया था। तो अब व्यापार मंडल की एकाएक दो दिन के लॉकडाउन की बात कहनी शुरू कर दी है।

यहां यह साफ है कि प्रशासन या सरकार ने लॉकडाउन के लिए कोई सहमति नहीं दी है और न ही इसका समर्थन किया है। व्यापार मंडल स्वयं ही दो दिन का लॉकडाउन कर दुकानें बंद रखने की बात कर रहा है।

सोचने लायक बात तो यह है कि दो दिन के लॉकडाउन से कोरोना का संक्रमण कैसे रोका जा सकता है। इन दो दिनों में केवल बाजार ही तो बंद रहेगा लेकिन कार्यालय जाने वाले लोग घरों से बाहर तो निकलेंगे ही।

रोजाना मजदूरी कर या सामान बेच कर अपने परिवार को भरण पोषण करने वाले लोग लॉकडाउन होने पर कैसे अपने बच्चों का पेट भर पायेंगे। भारत में कोरोना का कहर जब बढऩे लगा था तो उस समय तीन माह का पूर्ण लॉकडाउन लगाया गया था।

इस तीन माह के पूर्ण लॉकडाउन में ही जब कोरोना की गति को नहीं रोका जा सका तो भला अब दोकृदो दिन के लॉकडाउन से कैसे संक्रमण को रोका जा सकता है। व्यापार मंडल केवल त्योहारों के मद्देनजर ऐसा कदम उठाने जा रहा है लेकिन इन दो दिनी लॉकडाउन से छोटे छोटे कामधंधे करने वाले बिल्कुल बेरोजगार हो जाएंगे और दिहाड़ी मजदूरी करने वालों को भी रोजी रोटी के लाले पड़ जाएंगे।

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