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किसान जागरूकता कार्यक्रम : आईआईटी रुड़की ने कृषि-मौसम सेवाओं के बारे में किसानों को किया जागरूक

  

रुड़की : आईआईटी रुड़की के जल संसाधन विकास एवं प्रबन्धन विभाग में संचालित ग्रामीण कृषि-मौसम सेवा परियोजना अंतर्गत रुड़की ब्लॉक के बहादरपुर सैनी गाँव में चौपाल लगाकर किसानों को जागरूक किया गया.

किसान गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए परियोजना के नोडल अधिकारी प्रो० आशीष पाण्डेय ने कहा कि वर्ष 2021 में कृषि-मौसम परामर्श सेवाओं की सीधी पहुँच हरिद्वार जनपद के प्रत्येक गाँव तक हो जाए ऐसा टीम जीकेएमएस का प्रयास रहेगा.

इसके लिए शीघ्र ही जनपद के सभी छः विकासखण्ड के खण्ड विकास अधिकारी से सम्पर्क करके इस कार्य में सहयोग का आग्रह किया जाएगा. विकासखण्ड स्तर पर कार्यरत ग्राम विकास अधिकारी द्वारा संचालित व्हाट्सप्प ग्रुप के माध्यम से मौसम पूर्वानुमान व कृषि परामर्श बुलेटिन को अधिक से अधिक किसानों तक पहुँचाने की योजना है.

इसके अतिरिक्त कृषि-मौसम परामर्श सेवाओं को किसानों के बीच लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से "कृषि-मौसम सेवा, किसान के द्वार" अभियान के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा किसानों को जागरूक किया जाएगा.

कृषि-मौसम प्रक्षेत्र इकाई रुड़की का यह प्रयास रहेगा कि इस वर्ष हरिद्वार जनपद के प्रत्येक गाँव से कम से कम एक किसान सामाजिक पहल के अंतर्गत 'मौसम मित्र' की भूमिका निभाते हुए व्हाट्सप्प ग्रुप के माध्यम से उक्त गाँव के सभी किसानों तक इन सेवाओं को प्रसारित करने की अभिनव पहल की शुरुआत की जाए.

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की के पूर्व निदेशक प्रो० आर डी सिंह ने  किसानों को बताया कि जहाँ पहले मौसम पूर्वानुमान प्रदेश स्तर पर प्राप्त होता था, वह बाद के समय में जनपद स्तर पर प्राप्त होने लगा.

आज मौसम पूर्वानुमान ब्लॉक स्तर पर प्राप्त हो रहा है तथा वह दिन दूर नहीं जब मौसम वैज्ञानिकों द्वारा किये जा रहे निरंतर शोध के परिणाम स्वरुप हमारे किसान भाइयों को मौसम पूर्वानुमान न्याय पंचायत स्तर पर मिलना शुरू हो जाएगा.

उन्होंने कहा कि पहले की अपेक्षा अब पूर्वानुमान की सटीकता का प्रतिशत भी काफी अच्छा है, जो आने वाले समय में और अधिक सटीक होने की सम्भावना है. इसलिए आज आवश्यकता इस बात की है कि हमारे किसान भाई इन सेवाओं को अपने खेती-किसानी के दिन-प्रतिदिन के कार्यों में प्रयोग करने की आदत डालें.

कृषि-मौसम परामर्श सेवाओं से लम्बे समय से जुड़े हुए प्रगतिशील कृषक तथा भू-अमृत फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी (एफपीओ) के चेयरमैन रवि किरन सैनी ने किसान गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए किसानों को इन सेवाओं के लाभ के बारे में अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा किया.

उन्होंने इस अवसर पर किसानों को जैविक खेती के लाभ तथा एफपीओ के बारे में भी विस्तारपूर्वक अवगत कराया. गोष्ठी में किसानों द्वारा मौसम पूर्वानुमान, कृषि-मौसम सलाहकारी सेवाओं, जैविक खेती, एफपीओ इत्यादि के बारे में उनकी जिज्ञासाओं का विशेषज्ञों द्वारा समाधान भी प्रस्तुत किया गया.

किसान गोष्ठी का सञ्चालन करते हुए परियोजना के तकनीकी अधिकारी डॉ० अरविन्द कुमार ने कहा कि ग्रामीण कृषि-मौसम सेवा परियोजना के राष्ट्रीय समन्वयक तथा भारत मौसम विभाग, कृषि-मौसम परामर्श सेवा अनुभाग नई दिल्ली के प्रमुख डॉ० के के सिंह के निर्देश पर आईआईटी रुड़की स्थित कृषि-मौसम प्रक्षेत्र इकाई रुड़की द्वारा किसानों से इन सेवाओं के बारे में नियमित अंतराल पर फीडबैक भी एकत्र किया जा रहा है.

फीडबैक के माध्यम से अब इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि किसानों को एडवाइजरी बुलेटिन में किस प्रकार की सूचना अपेक्षित है तथा इन सेवाओं से किसानों को कितना आर्थिक लाभ हो रहा है, इसका भी मूल्याङ्कन करने का प्रयास चल रहा है.

गोष्ठी को प्रगतिशील कृषक बीर सिंह चौहान ने सम्बोधित करते हुए इन सेवाओं के बारे में अपने व्यक्तिगत अनुभव किसानों से साझा किया. कार्यक्रम में इस किसान गोष्ठी के संयोजक प्रगतिशील कृषक तथा बहादरपुर सैनी ग्राम के पूर्व प्रधान कालूराम सैनी ने सभी प्रतिभागियों का धनयवाद ज्ञापित किया.

किसान गोष्ठी में प्रगतिशील कृषक गुरविन्दर सिंह, मांगेराम, नितीश कुमार सैनी, बाबूराम, सत्यपाल सिंह, इलम सिंह, मौसम प्रेक्षक रोहित गिरी, शोध छात्र संदीप चौरसिया, मनीष रावत सहित अन्य किसान मौजूद रहे.

इस अवसर पर प्रक्षेत्र भ्रमण कार्यक्रम के अंतर्गत किसान कालूराम के खेत पर आलू की फसल का अवलोकन भी किया गया.

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