"क्योंकि सच जानना आपका हक है"

×

लेख : नजरिया बदलने की आवश्यकता है

  

 प्रमोद कुमार चौहान : हमारा इतना विशाल ब्रह्मांड है जो कि पूर्णता सकारात्मक अच्छाइयों से, ऊर्जावान सफलताओं से भरा हुआ है जिसमें सिर्फ और सिर्फ अच्छाइयाँ ही अच्छाइयाँ है कहीं कोई बुराई नहीं है। यदि हम सूर्य को देखते हैं तो सूर्य अनादि काल से अपनी ऊष्मा रूपी किरणों से सभी प्राणी जगत को निश्चित समय पर निरंतर ऊष्मा उपलब्ध करा रहा है जो अविरम, निश्चल, और निरंतर है।

ऐसे ही पृथ्वी निरंतर रूप से   पेड़, पौधे, फल, लकड़ी हवा पानी हर वह चीज प्राणी जगत को देने का प्रयास कर रही है , जिसे जिस की आवश्यकता है पृथ्वी ने कभी किसी को लेने से मना नहीं किया ना ही पृथ्वी ने कभी किसी से यह कहा कि मुझे इसके बदले किसी चीज की लालसा है।

पृथ्वी आवश्यकतानुसार पेड़, फल जीव जंतुओं के लिए लकड़ी खाने की भुजा सामग्री सब कुछ उपलब्ध करा रही है जो जीवित रहने के लिए प्राणी जगत को आवश्यक है इसी कड़ी मे अनादि काल से चंद्रमा अपनी चांदनी सतत रूप से विखेर रहा  है।  

तारे आकाश में टिमटिमाते हैं, वर्षा अपने कालखंड के अनुसार होती है , ग्रीष्म ऋतु आती है, बसंत ऋतु आती है, हवा बहती है, पेड़ पौधे निश्चित रूप से अपने कार्य में तल्लीन है अर्थात जहां देखें वहां हमें पृथ्वी और प्रकृति में सिर्फ और सिर्फ सकारात्मकता ही सकारात्मक दिखाई देती है।

इसके अलावा हमें कोई नकारात्मकता हमारे वायुमंडल में हमारी पृथ्वी में हमारे इस प्रकृति में कहीं भी दिखाई नहीं देती है इसके बाद भी पता नहीं कुछ लोग कहां से अपने अंदर नकारात्मकता को लेकर आते हैं और वह अन्य लोगों के
सामने भी नकारात्मकता का भोजन परोसते हैं।

जबकि प्रकृति ने हमें किसी प्रकार से कोई नकारात्मकता नहीं दी है यदि हम अच्छे और खुले मन से इस पर बिचार करें किसी भी चीज का तो सिर्फ और सिर्फ उसमें अच्छाई और सकारात्मकता ही दिखाई देती है। लेकिन यह निर्भर करता
है आपके सोचने आपकी कार्यशैली आपकी विविधता पर यदि गिलास में आधा दूध भरा है तो शेष आधे गिलास में हवा है खाली नहीं है।

यही हमारे जीवन की प्रमाणिकता भी है कि हमारे जीवन में सब प्रकार की घटित घटनाएं चलती रहती हैं लेकिन सिर्फ और सिर्फ हमें अपने जीवन में सकारात्मकता को ही प्रवेश कराते हुए अपने जीवन को जीना है।

तभी हमारा और प्रकृति का मेल सही हो सकता है यदि किसी के द्वारा आपके समक्ष नकारात्मकता का विचार रूपी भोजन परोसा जाता है तो आप उसे ना ग्रहण करें इससे आप बचें क्योंकि नकारात्मकता आप को कमजोर बनाती है।

आपको मानसिक रूप से पीड़ित करती है, शारीरिक रूप से आपको पीछे धकेलती है, आप के परिणामों में कमी लाती है, आप की वृद्धि रूकती है, आपकी उन्नति कम होती है, आपकी समृद्धि घटती है, आपका तनाव और आपकी चिंता बढ़ती है तो फिर हम नकारात्मकता को क्यों ग्रहण करते हैं तो आइए हमारे आसपास के आवरण में फैले हुए उस सकारात्मक संवेदनाओं को ग्रहण करते हुए अपने जीवन को सकारात्मकता से भरपूर करते हुए खुशहाल जीवन जीये और अपने जीवन में पेड़ पौधों की तरह हरियाली तथा सूर्य की तरह चमक और चंद्रमा की तरह चांदनी बिखेरते हुए अपने जीवन को हम सफल बनाएं।

हम एक या दो व्यक्ति को ही अपना आधार मानकर जीवन की बागडोर उसके हवाले कर देते हैं और हो सकता है यह व्यक्ति आपको नकारात्मकता की ओर ले जा रहा हो या अपने अंदर नकारात्मकता बहुत ज्यादा रखता हो परंतु वह आपके साथ रहता है और आप उसे सकारात्मकता में स्वीकार करते हैं ऐसी स्थिति में आप पाएंगे कि आप मेहनत करते हैं, बहुत अच्छा काम करते हैं परंतु उसका परिणाम जो मिलना चाहिए वैसा आपको नहीं मिलता है।  

उसका बहुत बड़ा कारण है कि जो व्यक्ति आपके साथ है वह आपकी सकारात्मकता को खुद की नकारात्मकता से कम कर देता है ऐसे व्यक्तियों से हमें बचने की आवश्यकता है।

यदि आप इस प्रकार के व्यक्तियों से अपने आपको दूर कर लेते हैं और उसके बाद वही काम उतनी क्षमताओं से आप करते हैं तो आप पाएंगे कि आपके कार्य की प्रमाणिकता पहले की अपेक्षा बहुत ज्यादा होती है।

आपके परिणाम में बहुत ज्यादा उछाल होता है, आपकी कार्य की प्रशंसा होती है और आपका मान सम्मान मेमें गुणोत्तर  वृद्धि होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आपने अपने आपको नकारात्मक व्यक्ति से बचाते हुए। आपने अपने आपको सकारात्मक माहौल में खड़ा किया इसलिए हम अपने जीवन में यह हमेशा ध्यान रखें कि हमारे आसपास के आवरण में रहने वाले व्यक्ति के विचार, कार्यशैली, उसके करने का तरीका, सोचने का तरीका, किस प्रकार है यदि आपको लगता है कि वह नकारात्मकता को ज्यादा अपने पास रखते जीवन को जीता है।

हर काम में कमी निकालता है, हर एक में गलत प्रतिक्रिया देता है, ऐसी स्थिति में आपको ऐसे व्यक्तियों से बचने की आवश्यकता है। जिस प्रकार जब ग्रहण  लगता है तो ग्रहण की स्थिति में सूर्य की चमक रूपी किरणों को ग्रहण रूपी नकारात्मक चीजें सूर्य की सकारात्मक किरणों को भी कुछ पल के लिए ढक लेती हैं।

ऐसे ही हमारे जीवन में भी होता है इसलिए ऐसे लोगों के प्रति हम सबको नजरिया बदलने की आवश्यकता है और तभी अपने आपके कार्य को समाज में हम प्रमाणिकता से सिद्ध कर सकते हैं।

सूर्य हमें लालिमा की रोशनी देता |
चंद्रमा हमें शांत भरी चांदनी देता ||
नकारात्मकता फिर  देता है कौन ,
आवरण  हमे सकारात्मकता देता ||

फेसबुक पर हमसे जुड़ने के लिए यहां क्लिक करें, साथ ही और भी Hindi News ( हिंदी समाचार ) के अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें.

Share this story