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पाकिस्तान में भड़का शिया विरोधी आंदोलन, सांप्रदायिक सुरक्षा को लेकर छिड़ी बहस

  

कराची : पाकिस्तान के कराची में हजारों लोग शिया-विरोधी प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतर आए। कराची में शिया समुदाय से संबंध रखने वालों को धर्म के प्रति विश्वास व्यक्त न करने वाला करार दिया जा रहा है। लोगों द्वारा शिया काफिर हैं के नारे बुलंद किए जा रहे हैं। ऐसे नारों के बुलंद होने के बाद देश में चल रहे आतंकी संगठनों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के पाकिस्तान के इरादों पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।

आतंकी संगठन सिपाह-ए-सहाबा पाकिस्तान (एसएसपी) की अगुवाई में निकाली गई रैली में हजारों लोगों ने हिस्सा लिया। यह रैली मुख्य एम. ए. जिन्ना मार्ग पर दिन के उजाले में निकाली गई। एसएसपी पाकिस्तान में शिया अल्पसंख्यकों की हत्या में शामिल रहा है।

रैली के दौरान शिया काफिर हैं के नारे बुलंद किए जा रहे हैं, और लोगों द्वारा आतंकी संगठन सिपाह-ए-सहाबा पाकिस्तान के बैनर लहराए जा रहे हैं। इसके साथ ही देश में दंगों की आशंका पैदा होने लगी है।

पाकिस्तान के आर्थिक के आर्थिक केंद्र कराची में एक आतंकी संगठन के बैनर तले एक समुदाय विशेष के खिलाफ हुई इस बड़ी रैली को देख आम जनता को भी झटका लगा है। यही नहीं रैली में शिया विरोधी नारे लगाने वाले लोगों को किसी प्रशासन या अधिकारियों का भी डर नहीं लग रहा था, जो कि इमरान खान की अगुवाई वाली सरकार की ओर से देश में आतंकी संगठनों को जड़ से उखाड़ने के इरादों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

इस शिया विरोधी रैली का मंचन मुहर्रम पर आशूरा जुलूस के प्रसारण के दौरान शिया नेता द्वारा कथित तौर पर एक टेलीविजन शो में इस्लाम के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी देने के बाद किया गया था।

शिया अधिकार कार्यकर्ता गुल जहरा रिजवी ने कहा, जब कराची में खुलेआम शिया-विरोधी रैली निकाली जा सकती है, तो यह दर्शाता है कि सांप्रदायिक हिंसा जारी रहेगी। यह रैली एक आतंकी संगठन द्वारा निकाली गई थी, जो पाकिस्तान में गैर-कानूनी संगठनों की आधिकारिक सूची में सूचीबद्ध है।

रिजवी ने कहा, फिर भी, वे रैली करने में सक्षम थे। यह चिंताजनक है।

उन्होंने कहा, मुहर्रम की शुरूआत के बाद से, हम कई शिया समुदाय के लोगों को धार्मिक ग्रंथों को पढ़ने और आशूरा स्मरणोत्सव में भाग लेने के लिए लक्षित के तौर पर देखते रहे हैं।

एक अन्य शिया अधिकार कार्यकर्ता अरफीन ने कहा, इस प्रदर्शन को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। खासकर तब, जब हमारे भाइयों और बहनों का अपहरण करने और उनकी मान्यताओं के लिए उन्हें मार दिया जाता है।

शिया नेताओं ने शिया मुसलमानों के खिलाफ घृणा फैलाने वाले कृत्यों को समर्थन देने के लिए प्रधानमंत्री की सख्त जवाबदेही का आह्वान किया है।

अरफीन ने कहा, कुछ साल पहले पाकिस्तान में शियाओं को गुमनाम संदेश मिल रहे थे, जिसमें कहा गया था कि शियाओं को मार डालो। जहां अशूरा जुलूस हो रहे थे, वहां पर आतंकवादियों ने हथगोले फेंके।

उन्होंने कहा, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि क्या पाकिस्तान सरकार ने ज्ञात आतंकवादियों को दूर-दूर तक शिया विरोधी बयानबाजी फैलाने की अनुमति दी है। इमरान खान को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

शिया विरोधी रैली पर एक और ट्विटर यूजर ने लिखा, कल मेरा शहर काफिर-काफिर, शिया काफिर के नारों से गूंज उठा। कुछ घंटे बाद ही हिंसा को कवर करने वाले पत्रकार बिलाल फारूकी को गिरफ्तार कर लिया गया है। यह शियाओं का नरसंहार नहीं तो और क्या है?

बता दें कि पाकिस्तान में ईशनिंदा एक संवेदनशील मुद्दा है और अक्सर इसी मुद्दे पर शिया समुदाय और अल्पसंख्यकों को इसका दोषी करार देते हुए प्रताड़ित किया जाता है।

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