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पीरियड्स से पहले ब्रेस्ट में दर्द और भारीपन क्यों महसूस होता है? जानें इसके पीछे की वजह

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Rama Pun Updated Fri, 07 Aug 2026 10:57 AM IST

ब्रेस्ट में दर्द या भारीपन होना महिलाओं में एक आम समस्या है, जिसे मेडिकल भाषा में मास्टाल्जिया कहा जाता है। ज्यादातर मामलों में यह समस्या हार्मोनल बदलावों के कारण होती है और घबराने की जरूरत नहीं होती, लेकिन इसके सही लक्षणों को पहचानना जरूरी है।

Breast Pain Symptoms

Breast Pain Symptoms : महिलाओं की सेहत से जुड़ी कई समस्याओं में से एक है ब्रेस्ट पेन या भारीपन महसूस होना। इसे मेडिकल साइंस में ‘मास्टाल्जिया’ (Mastalgia) कहा जाता है।

अक्सर दर्द का अहसास होते ही महिलाएं किसी गंभीर बीमारी के डर से घबरा जाती हैं। हालांकि, सच यह है कि हर तरह का दर्द किसी बड़े खतरे का इशारा नहीं होता। ज्यादातर मामलों में यह अस्थाई और सामान्य शारीरिक बदलावों की वजह से होता है।

मास्टाल्जिया के दो मुख्य प्रकार

शरीर में होने वाले इस दर्द को सही ढंग से समझने के लिए इसे दो मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है:

साइक्लिकल मास्टाल्जिया (Cyclical Mastalgia): यह दर्द पूरी तरह से आपके पीरियड्स और हार्मोनल बदलावों से जुड़ा होता है।

अक्सर पीरियड्स शुरू होने से कुछ दिन पहले दोनों ब्रेस्ट में भारीपन, कोमलता या हल्का दर्द महसूस होता है और पीरियड्स आते ही खुद-ब-खुद ठीक हो जाता है।

यह कम उम्र की महिलाओं, किशोरियों या मेनोपॉज के करीब पहुंची महिलाओं में बेहद सामान्य है।

नॉन-साइक्लिकल मास्टाल्जिया (Non-Cyclical Mastalgia): इस दर्द का पीरियड्स के चक्र से कोई लेना-देना नहीं होता। यह दर्द किसी एक ही ब्रेस्ट में या उसके किसी खास हिस्से में चुभन और जलन के रूप में बना रह सकता है।

यह आमतौर पर सिस्ट, फाइब्रोएडेनोमा, किसी चोट या मांसपेशियों के खिंचाव की वजह से होता है।

दर्द की अन्य आम वजहें

हर बार ब्रेस्ट में होने वाले दर्द का कारण ब्रेस्ट टिश्यू ही नहीं होते। कई बार शरीर के दूसरे हिस्सों में उठने वाली तकलीफ भी यहां महसूस हो सकती है:

मांसपेशियों और पसलियों में सूजन: चेस्ट वॉल या पसलियों की मांसपेशियों में खिंचाव या सूजन के कारण भी दर्द का अहसास होता है।

गलत फिटिंग की ब्रा: सही साइज और सपोर्ट न देने वाली ब्रा पहनने से ब्रेस्ट के लिगामेंट्स पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

मानसिक तनाव: ज्यादा तनाव और एंग्जायटी से शरीर की दर्द सहने की क्षमता प्रभावित होती है, जिससे हल्का दर्द भी ज्यादा महसूस होने लगता है।

डॉक्टर से परामर्श कब जरूरी है?

ज्यादातर मामले सामान्य होते हैं, फिर भी कुछ लक्षणों को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:

  • दर्द लगातार बना रहे और दिन-ब-दिन बढ़ता जाए।
  • ब्रेस्ट या बगल में कोई नई गांठ महसूस हो।
  • त्वचा का रंग बदले, लालिमा आए या निप्पल से डिस्चार्ज हो।
  • दर्द इतना बढ़ जाए कि रोजमर्रा के काम या नींद प्रभावित होने लगे।

जांच और देखभाल का तरीका

अगर आप डॉक्टर के पास जाती हैं, तो वे आपकी उम्र और लक्षणों के हिसाब से जांच का सुझाव देते हैं। युवा महिलाओं में आमतौर पर अल्ट्रासाउंड कराया जाता है।

ज्यादातर मामलों में लाइफस्टाइल में छोटे-मोटे सुधार जैसे—सही फिटिंग वाली सपोर्टिव ब्रा पहनना, तनाव कम करना और सही खानपान से यह समस्या काफी हद तक ठीक हो जाती है।

शरीर के संकेतों को समझना और सही समय पर सही सलाह लेना ही आपकी सेहत का असली सुरक्षा कवच है।

Rama Pun

रमा पुन 'दून हॉराइज़न' में हेल्थ और लाइफस्टाइल संपादक के रूप में अपनी अहम जिम्मेदारी निभा रही हैं। स्वास्थ्य, फिटनेस, खानपान और मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) के विषयों पर उनकी पकड़ बेहद मजबूत है। रमा का फोकस हमेशा मेडिकल एक्सपर्ट्स की पुख्ता सलाह और वैज्ञानिक शोध पर आधारित (Evidence-based) खबरें लिखने पर रहता है। उनका स्पष्ट मानना है कि सेहत से जुड़ी कोई भी जानकारी शत-प्रतिशत प्रामाणिक होनी चाहिए। अपनी आकर्षक और तथ्यपरक लेखनी से वे पाठकों को एक स्वस्थ, तनावमुक्त और संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए निरंतर प्रेरित और जागरूक करती हैं।

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