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देहरादून में 15 हजार मुकदमें पेंडिंग, डीएम ने जताई नाराजगी

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Thu, 24 Sep 2026 12:20 PM IST

देहरादून कलेक्ट्रेट में 15,540 लंबित राजस्व मुकदमों पर डीएम ने कड़ी नाराजगी जताई। अब सॉफ्टवेयर से मुकदमों की मॉनिटरिंग होगी और निर्विवाद विरासतन के मामले तुरंत निपटेंगे।

Dehradun DM Ashish Chauhan

मुख्य बातें

  • देहरादून जिले में 15,540 राजस्व मुकदमों के निस्तारण पर डीएम ने नाराजगी जताई।
  • तहसील स्तर पर निर्विवाद विरासतन (Inheritance Mutation) मामलों को तुरंत निपटाने के आदेश दिए।
  • धारा 229बी के 841 और धारा 176 के 1,157 मामले अदालतों में लंबित मिले।
  • फाइलों की स्थिति और तारीखों की निगरानी के लिए बनेगा अलग स्मार्ट सॉफ्टवेयर।

दून हॉराइज़न, देहरादून (24 सितंबर) : देहरादून कलेक्ट्रेट के ऋषिपर्णा सभागार में देर शाम चली मैराथन समीक्षा बैठक के दौरान राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रशासनिक रुख देखने को मिला। जिले की विभिन्न तहसीलों और अदालतों में पेंडिंग पड़े मुकदमों की फेहरिस्त सामने आते ही जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कड़े तेवर दिखाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना किसी ठोस आधार के मुकदमों को वर्षों तक लटकाए रखने वाले अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय होगी।

जमीनों के पारिवारिक बंटवारे, मालिकाना हक और दाखिल-खारिज के लिए जनता को कलेक्ट्रेट और तहसील कोर्ट (Revenue Court) के चक्कर न काटने पड़ें, इसके लिए अब एक नया डिजिटल खाका खींचा जा रहा है।

15 हजार से अधिक मुकदमों का बोझ, धारा 229बी और 176 पर नाराजगी

कलेक्ट्रेट सभागार में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक जिले भर में कुल 15,540 राजस्व मामले लंबित हैं। इनमें भूमि पर मालिकाना हक की घोषणा से जुड़े धारा 229बी के 841 मामले शामिल हैं। इसी तरह भूमि विभाजन यानी धारा 176 के तहत 1,157 मुकदमे अभी भी विचाराधीन पाए गए। समीक्षा में यह भी खुलासा हुआ कि अगस्त के पूरे महीने में धारा 176 के सिर्फ 13 मुकदमों का ही निस्तारण हो सका, जबकि 3 से 5 साल पुराने 179 मामले अब भी फाइलों में बंद हैं। इसके अलावा जमीनों के अवैध हस्तांतरण से जुड़ी धारा 166/167 के 82 पुराने वाद एसडीएम और तहसीलदार न्यायालयों में धूल फांक रहे हैं।

एसडीएम सदर, डोईवाला और ऋषिकेश सहित सभी उप जिलाधिकारियों को चेतावनी देते हुए निर्देश दिए गए कि वे अपने कोर्ट के दिन मुकर्रर कर नियमित सुनवाई करें। तारीख पर तारीख देने की परिपाटी पर अब रोक लगनी चाहिए।

स्मार्ट सॉफ्टवेयर सिस्टम से होगी फाइलों की रियल-टाइम ट्रैकिंग

लंबित मुकदमों की निगरानी के लिए प्रशासन अब एक आईटी-आधारित स्मार्ट मॉनिटरिंग सिस्टम (Smart Monitoring System) विकसित करने जा रहा है। इस सॉफ्टवेयर डैशबोर्ड पर प्रत्येक वाद की वर्तमान स्थिति, लंबित रहने की ठोस वजह, सुनवाई कर रहे पीठासीन अधिकारी का नाम और निस्तारण की अंतिम तय सीमा एक क्लिक पर दिखेगी। शासन स्तर यानी मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव या सचिव कार्यालय से भेजे गए संदर्भों और हाईकोर्ट के आदेशों के अनुपालन (Compliance) का ब्योरा भी इसी प्लेटफॉर्म पर रोजाना अपडेट किया जाएगा।

निर्विवाद विरासतन पर राहत की राह, अगली बैठक में पेश करना होगा ब्योरा

बैठक में सबसे बड़ा निर्देश जमीन की पैतृक विरासत यानी निर्विवाद विरासतन (Undisputed Inheritance Mutation) को लेकर जारी हुआ। डीएम ने कहा कि जिन मामलों में कोई पारिवारिक या कानूनी विवाद नहीं है, उन्हें महीनों अटका कर रखना प्रशासनिक लापरवाही है। ऐसे प्रकरणों का तत्काल परीक्षण कर खतौनी में नाम दर्ज करने के आदेश जारी किए गए हैं।

समीक्षा बैठक में एडीएम वित्त एवं राजस्व के.के. मिश्रा, एडीएम प्रशासन स्मृता परमार, नगर मजिस्ट्रेट राकेश तिवारी, एसडीएम सदर अपूर्वा सिंह, एसडीएम डोईवाला अपर्णा ढौंडियाल, एसडीएम ऋषिकेश कुमकुम जोशी और जिला शासकीय अधिवक्ता गुरू प्रसाद रतूड़ी मौजूद रहे। सभी अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि अगली मासिक समीक्षा बैठक में वे फाइलों के ठोस निस्तारण के अद्यतन ब्योरे के साथ ही उपस्थित हों।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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