देहरादून (11 अक्टूबर) : अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर उत्तराखंड सरकार ने डिजिटल शिक्षा और बालिकाओं के भविष्य को लेकर बड़ा नीतिगत फैसला किया है। देहरादून के आईआरटीडी प्रेक्षागार में आयोजित ‘बालिका शिक्षा प्रोत्साहन कार्यक्रम’ के दौरान उत्तराखंड बोर्ड की 149 मेधावी छात्राओं को स्मार्टफोन सौंपने के साथ ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बड़ा ऐलान किया कि अब राजकीय विद्यालयों के कक्षा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को टैबलेट खरीदने के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे बैंक खाते में धनराशि भेजी जाएगी।
शारदीय नवरात्रि के पहले दिन आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने दोटूक कहा कि कन्या पूजन केवल पारंपरिक रस्म तक सीमित नहीं रह सकता; इसकी वास्तविक सार्थकता तभी है जब बेटियों को आधुनिक तकनीक, समान अवसर और भयमुक्त सुरक्षा कवच मिले।
बोर्ड परीक्षार्थियों के खाते में टैबलेट के लिए सीधी राशि
संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने साफ किया कि आज के दौर में डिजिटल शिक्षा किसी भी छात्र के करियर की अनिवार्य जरूरत बन चुकी है। बोर्ड परीक्षाओं में परचम लहराने वाली 149 छात्राओं को स्मार्टफोन देने का उद्देश्य उन्हें उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए सरकार ने अब सरकारी स्कूलों के 10वीं और 12वीं के सभी छात्र-छात्राओं को टैबलेट देने का रास्ता साफ किया है।
खरीद प्रक्रिया में होने वाली देरी और बिचौलियों की भूमिका खत्म करने के लिए यह बजट सीधे छात्र-छात्राओं या उनके अभिभावकों के बैंक खातों में डीबीटी के जरिए भेजा जाएगा। कार्यक्रम में मौजूद महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि सरकार का यह कदम बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के योग्य तैयार करने में अहम भूमिका निभाएगा।
महिला आरक्षण से लेकर पॉक्सो पीड़ितों के लिए कानूनी मदद

मुख्यमंत्री ने राज्य की बेटियों और युवाओं के लिए तैयार किए गए कानूनी सुरक्षा तंत्र की जमीनी हकीकत भी सामने रखी। उन्होंने बताया कि प्रदेश की महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत का मजबूत क्षैतिज आरक्षण दिया जा रहा है, जबकि अनाथ बच्चों के लिए भी 5 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया है। कानून-व्यवस्था और बाल सुरक्षा के मोर्चे पर बड़ा ब्योरा देते हुए उन्होंने कहा कि पॉक्सो (POCSO) मामलों से पीड़ित बच्चों को कानूनी सहायता, समय पर न्याय और मानसिक संबल देने के लिए हर जनपद में विशेष ‘सपोर्ट पर्सन’ तैनात किए गए हैं।
इसके अलावा बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं पर रोक लगाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर सख्त निगरानी रखी जा रही है। युवाओं के भविष्य पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में देश का सबसे कड़ा नकल विरोधी कानून लागू है, जिसके दम पर पिछले पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरियां मिली हैं।
नंदा गौरा योजना और स्वरोजगार से बदलती जमीनी तस्वीर
शिक्षा को आर्थिक तंगी से बचाने के लिए चल रही योजनाओं का हवाला देते हुए सीएम ने कहा कि नंदा गौरा योजना के तहत बेटी के जन्म पर 11 हजार रुपये और 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने पर 51 हजार रुपये की सीधी वित्तीय मदद दी जा रही है, जिसका लाभ अब तक 4 लाख से अधिक बेटियां ले चुकी हैं। इसके अलावा कक्षा 1 से 12वीं तक मुफ्त पाठ्य पुस्तकें, निशुल्क साइकिल वितरण और दूरदराज के क्षेत्रों में महिला छात्रावासों की सुविधा दी जा रही है।
केवल स्कूली शिक्षा ही नहीं, बल्कि आजीविका के लिए ‘ड्रोन दीदी’, ‘आलम्बन आर्ट’, ‘आलम्बन गांव’, ‘आलम्बन कैफे’ और उधम सिंह नगर व हरिद्वार में किशोरियों के हुनर तराशने के लिए ‘नव्या 2.0’ जैसे प्रोजेक्ट्स जमीन पर उतारे गए हैं। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री खजान दास, अपर सचिव कर्मेंद्र सिंह और विभागीय निदेशक बंशीलाल राणा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।









