बुरहानपुर : भ्रष्टाचार के मामले में रिकार्ड तोड़ रहा बुरहानपुर

बुरहानपुर : भ्रष्टाचार के मामले में रिकार्ड तोड़ रहा बुरहानपुर


- 10 दिन में दूसरी बड़ी कार्रवाई, पहले निगम उपयंत्री पकड़ाए, अब परियोजना प्रबंधक

- लोकायुक्त इंदौर की टीम ने 25 हजार रूपए की रिश्वत लेते डे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की जिला प्रबंधक को पकड़ा

-चेहरे पर पछतावे की बजाए नजर आई हल्की मुस्कान

बुरहानपुर, 09 मई (हि.स.)। इन दिनों बुरहानपुर जिला विकास से दूर और भ्रष्टाचार से करीब हो गया है। आलम यह है कि महज 10 दिन के भीतर ही यहां लोकायुक्त की दो कार्रवाई हो गई। कार्रवाई भी ऐसे जिम्मेदार विभागों के अफसरों पर हुई जिससे जनता का सीधा जुड़ा शहर और गांव तक जुड़ा है। 10 दिन पहले नगर पालिक निगम के उपयंत्री और प्रभारी कार्यपालन यंत्री सगीर अहमद खान को देड़ लाख की रिश्वत लेते रंगेहाथों पकड़ा गया था तो वहीं सोमवार को मप्र डे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की जिला प्रबंधक सरिता स्वामी रंगेहाथों 25 हजार की रिश्वत लेते पकड़ी गई। खास बात यह रही कि लोकायुक्त की कार्रवाई के दौरान मीडिया के सामने आने पर उनके चेहरे पर पछतावे की बजाए हल्की मुस्कान नजर आई।

सोमवार को लोकायुक्त पुलिस इंदौर ने जिला परियोजना प्रबंधक मप्र डे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन सरिता स्वामी को 25 हजार रूपए की रिश्वत लेते हुए पकड़ा। इसकी शिकायत फरियादी विजय पवार ब्लॉक प्रबंधक ने लोकायुक्त से की थी। शिकायत में कहा गया था कि जिला प्रबंधक एरियर की राशि जारी करने के बदले में 40 हजार रूपए रिश्वत मांग रही है। साथ ही पीड़ित ने लोकायुक्त के सामने बार बार परेशान किए जाने का हवाला भी दिया था।

बातचीत टेप कर पकड़ा

लोकायुक्त निरीक्षक विजय चौधरी ने बताया कि परियोजना प्रबंधक की मोबाइल पर बातचीत टेप कराई और सोमवार दोपहर जिला पंचायत कार्यालय स्थित राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के कार्यालय में उन्हें रंगेहाथों रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया। लोकायुक्त की टीम में निरीक्षक विक्रमसिंह चौहान, विजय चौधरी, प्रधान आरक्षक रामप्रसाद सिसौदिया, पवन परोठिया, आरक्षक अनिल परमार, आशीष नायडु आदि शामिल थे।

बेखौफ हो गए अफसर

महज 10 दिन पहले ही नगर निगम उपयंत्री पर कार्रवाई के बाद भी अफसरों में रिश्वतखोरी का डर नहीं रहा। यह भी नहीं सोचा गया कि 10 पहले ही कार्रवाई हुई है। बेखौफ होकर अपने ही कर्मचारी से एरियर की राशि के बदले रिश्वत मांगना परियोजना जिला प्रबंधक को मंहगा साबित हुआ।

हिन्दुस्थान समाचार/निलेश जूनागढ़े

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