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देहरादून के 170 गांव अब भी नेटवर्क से कटे, 69 ग्राम पंचायतों में टूटी फाइबर लाइन

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Thu, 15 Oct 2026 06:13 PM IST

देहरादून के 19 शैडो एरिया में चुनाव से पहले मोबाइल नेटवर्क पहुंचाने का अल्टीमेटम। जिले के 170 गांवों में BSNL सिग्नल नहीं, 69 पंचायतों में कटी फाइबर लाइन।

dehradun mobile network

मुख्य बातें

  • चकराता के 12 और मसूरी के 7 शैडो एरिया में पहुंचेगा नेटवर्क।
  • जिले के 170 गांव अब भी बीएसएनएल कनेक्टिविटी से वंचित।
  • भारतनेट की कटी फाइबर लाइन जोड़ने के लिए युद्धस्तर पर निर्देश।

देहरादून (15 अक्टूबर) : राजधानी देहरादून के दूरदराज और दुर्गम इलाकों में मोबाइल नेटवर्क न मिलने की समस्या पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने दूरसंचार कंपनियों और बीएसएनएल को दो टूक आदेश दिया है कि चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले जिले के सभी 19 ‘शैडो एरिया’ (नेटवर्क विहीन डेड जोन) में मोबाइल सिग्नल पहुंच जाना चाहिए।

गुरुवार को कलेक्ट्रेट में जिला टेलीकॉम समिति और नेशनल ब्रॉडबैंड मिशन की बैठक के दौरान यह चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया कि राजधानी जिले के 767 गांवों में से 170 गांव आज भी बीएसएनएल नेटवर्क से पूरी तरह कटे हुए हैं।

आचार संहिता से पहले खत्म होंगे सभी शैडो एरिया

समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि निष्पक्ष चुनाव कराने, पोलिंग बूथों की वेबकास्टिंग और कानून-व्यवस्था के रियल-टाइम समन्वय के लिए मोबाइल नेटवर्क पहली बुनियादी जरूरत है। जिले में चिह्नित कुल 19 शैडो एरिया में से सबसे ज्यादा 12 इलाके जनजातीय क्षेत्र चकराता विधानसभा में हैं, जबकि 7 इलाके मसूरी विधानसभा के पर्वतीय हिस्सों में आते हैं।

डीएम ने दूरसंचार कंपनियों को चेतावनी दी कि यदि इन क्षेत्रों में मोबाइल टावर लगाने के आड़े राजस्व भूमि या वन भूमि की कोई अड़चन आ रही है, तो उसे दबाकर न बैठें बल्कि तुरंत जिला प्रशासन के संज्ञान में लाएं। विभागों के बीच आपसी समन्वय बनाकर सभी फाइलों को 24 घंटे के भीतर निपटाया जाएगा।

राजधानी के 170 गांवों में अब तक नेटवर्क नहीं

समीक्षा के दौरान बीएसएनएल के अफसरों ने बताया कि जनपद के कुल 767 गांवों में से अब तक 597 गांवों में ही कनेक्टिविटी दी जा सकी है, जबकि 170 गांव अभी भी नेटवर्क का इंतजार कर रहे हैं। कुंआवाला से लच्छीवाला, दांडी से ऋषिकेश, रायवाला से हरिपुरकलां और दौड़वाला से दूधली के जंगलों में टावर लगाने में वन कानूनों के कारण मुश्किलें आ रही हैं।

अफसरों ने जानकारी दी कि फुलसानी, दिरनाद और सिल्ला में नए 4जी मोबाइल टावर लगाने के प्रस्ताव मंजूरी के लिए शासन को भेजे गए हैं। वहीं, 4जी सैचुरेशन योजना के तहत स्वीकृत 24 ग्राम पंचायतों में से 22 में काम पूरा हो गया है, जबकि रायपुर और सहसपुर की एक-एक पंचायत में वन भूमि की एनओसी न मिलने से काम अटका पड़ा है।

कटी फाइबर केबल जुड़ेगी, वन भूमि विवाद सुलझेगा

बैठक में भारतनेट परियोजना की जमीनी हकीकत भी खुलकर सामने आई। प्रथम चरण में जिले की जिन 209 ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ा गया था, उनमें से 69 पंचायतों में केबल कट जाने के कारण ब्रॉडबैंड सेवा पूरी तरह ठप पड़ी है। वहीं, दूसरे चरण में 228 में से 189 पंचायतों में ही काम हो पाया है और 39 पंचायतों में काम अधूरा है।

डीएम ने लोक निर्माण विभाग और दूरसंचार कंपनियों को निर्देश दिया कि सड़क चौड़ीकरण या अन्य निर्माण कार्यों के दौरान कटी फाइबर लाइनों को तुरंत दुरुस्त किया जाए। साथ ही प्राथमिक स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और ग्राम पंचायत भवनों को हाई-स्पीड इंटरनेट से जोड़ने के काम में कोई भी हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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