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Uttarakhand RTO News : उत्तराखंड में DL में मोबाइल नंबर अपडेट करना अब नहीं होगा आसान, बदल गए नियम

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Sun, 10 May 2026 03:17 PM IST

उत्तराखंड परिवहन विभाग ने ड्राइविंग लाइसेंस (DL) और आरसी (RC) में मोबाइल नंबर अपडेट करने के लिए सख्त एसओपी जारी की है, जिसमें आधार और लाइसेंस के नाम का अक्षर-दर-अक्षर मिलना अनिवार्य कर दिया गया है। वहीं, युवाओं को परिवहन क्षेत्र से जोड़ने वाली 'वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना' पिछले पांच वर्षों में महज 10 लाभार्थियों तक ही सीमित रह गई है।

Uttarakhand RTO News : उत्तराखंड में DL में मोबाइल नंबर अपडेट करना अब नहीं होगा आसान, बदल गए नियम

मुख्य बातें

  • आधार और डीएल के नाम में एक भी अक्षर का अंतर होने पर मोबाइल नंबर अपडेट नहीं होगा।
  • बिना मोबाइल नंबर लिंक कराए वाहन का टैक्स, बीमा और फिटनेस जैसे कार्य रुक जाएंगे।25% सब्सिडी के बावजूद 5 साल में सिर्फ 10 युवा ही रोडवेज से अपनी बसें जोड़ पाए।

देहरादून, 10 मई 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड परिवहन विभाग (Uttarakhand RTO News) ने ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन संबंधी सेवाओं को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू कर दी है।

अब यदि किसी आवेदक के ड्राइविंग लाइसेंस (DL) और आधार कार्ड में दर्ज नाम के स्पेलिंग में एक अक्षर का भी अंतर पाया जाता है, तो सिस्टम मोबाइल नंबर अपडेट करने की अनुमति नहीं देगा। मोबाइल नंबर का पंजीकृत होना अब इसलिए भी अनिवार्य है क्योंकि डुप्लीकेट लाइसेंस और नवीनीकरण जैसी सेवाओं के लिए ओटीपी (OTP) की व्यवस्था अनिवार्य कर दी गई है।

नाम में अंतर होने पर अपनानी होगी लंबी प्रक्रिया

यदि किसी आवेदक के दस्तावेजों में नाम की भिन्नता है, तो उसे पहले अपने ड्राइविंग लाइसेंस में नाम संशोधित करवाना होगा। विभाग ने इसके लिए सख्त नियम तय किए हैं।

आरटीओ प्रशासन देहरादून, संदीप सैनी के अनुसार, आवेदकों को नाम सुधारने के लिए एक शपथ पत्र (Affidavit) के साथ-साथ किसी भी राष्ट्रीयकृत समाचार पत्र में प्रकाशित नाम संशोधन विज्ञापन की मूल प्रति प्रस्तुत करनी होगी। इन दस्तावेजों के भौतिक सत्यापन के बाद ही विभाग नाम में सुधार करेगा, जिसके बाद ही मोबाइल नंबर लिंक हो सकेगा।

आरसी सेवाओं पर भी पड़ेगा असर

विभाग ने स्पष्ट किया है कि मोबाइल नंबर का अपडेट होना केवल लाइसेंस तक सीमित नहीं है। अब वाहन की आरसी (RC) में भी सक्रिय मोबाइल नंबर का होना अनिवार्य है। यदि मोबाइल नंबर लिंक नहीं है, तो वाहन स्वामी अपने वाहन का टैक्स जमा करने, फिटनेस सर्टिफिकेट प्राप्त करने, बीमा अपडेट कराने या चालान का भुगतान करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य ऑनलाइन नहीं कर पाएंगे। विभाग का तर्क है कि यह कदम डेटा की सटीकता बढ़ाने और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए उठाया गया है।

वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना की सुस्त रफ्तार

परिवहन विभाग की सख्ती के बीच युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने वाली ‘वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना’ के परिणाम निराशाजनक रहे हैं। वर्ष 2019 में रोडवेज के बेड़े में निजी बसें अनुबंधित करने की इस योजना के शुरू होने के बाद से अब तक मात्र 10 लाभार्थी ही इससे जुड़ सके हैं। प्रदेश सरकार द्वारा बस खरीद पर 25 प्रतिशत तक की सब्सिडी और रोडवेज अनुबंध में प्राथमिकता देने के बावजूद युवाओं का रुझान कम बना हुआ है।

सूत्रों का कहना है कि रोडवेज के पुराने वित्तीय संकट और भुगतान में होने वाली देरी के डर से युवा बैंक लोन का भारी जोखिम नहीं उठाना चाहते। इसके अलावा, योजना के प्रचार-प्रसार की कमी और दुर्गम क्षेत्रों में जटिल आवेदन प्रक्रिया ने भी इसकी प्रगति को बाधित किया है। वर्तमान में, रोडवेज इन अनुबंधित बसों को आठ रुपये प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान करता है, जबकि डीजल और कंडक्टर की जिम्मेदारी रोडवेज खुद उठाता है।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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