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क्या आप भी अनजाने में खा रहे हैं जहर? खरीदने से पहले जान लीजिए असली और नकली का यह बड़ा फर्क

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Rama Pun Updated Sun, 05 Apr 2026 08:18 AM IST

बाजार में बिकने वाली ज्यादातर ठंडी चीजें असली आइसक्रीम नहीं बल्कि वनस्पति तेल से बनी फ्रोजन डेजर्ट हैं, जो सेहत के लिए हानिकारक हो सकती हैं। असली आइसक्रीम दूध और क्रीम से बनती है, जबकि फ्रोजन डेजर्ट में सस्ते वेजिटेबल फैट और ट्रांस फैट का इस्तेमाल किया जाता है।

Ice Cream Side Effects

मुख्य बातें

  • असली आइसक्रीम डेयरी मिल्क और क्रीम से तैयार की जाती है, जबकि फ्रोजन डेजर्ट में वनस्पति तेल (Vegetable Oil) मुख्य सामग्री होती है।
  • फ्रोजन डेजर्ट में मौजूद ट्रांस फैट कोलेस्ट्रॉल बढ़ाकर दिल की बीमारियों और मोटापे का खतरा पैदा कर सकता है।
  • पैकेट पर 'Frozen Dessert' लिखा होना इस बात का प्रमाण है कि उसमें दूध की जगह सस्ते तेल का इस्तेमाल हुआ है।

हेल्थ डेस्क, 05 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। भीषण गर्मी के दस्तक देते ही देश भर में ठंडी चीजों की मांग तेजी से बढ़ गई है, लेकिन आपकी पसंदीदा ‘आइसक्रीम’ (Ice Cream Side Effects) आपकी सेहत के लिए एक मीठा खतरा भी साबित हो सकती है।

ज्यादातर लोगस्वाद के चक्कर में यह गौर नहीं करते कि वे जो खा रहे हैं, वह असल में शुद्ध दूध से बनी आइसक्रीम है या फिर वनस्पति तेल से तैयार किया गया ‘फ्रोजन डेजर्ट’।

इन दोनों के बीच का सबसे बुनियादी अंतर इनके बेस में छिपा होता है। असली आइसक्रीम को बनाने के लिए केवल दूध, क्रीम और डेयरी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल किया जाता है, जो शरीर को जरूरी कैल्शियम और पोषक तत्व प्रदान करते हैं।

वहीं, फ्रोजन डेजर्ट को तैयार करने के लिए हाइड्रोजनेटेड वेजिटेबल ऑयल यानी वनस्पति वसा का प्रयोग किया जाता है। कीमत का यह गणित सीधा मुनाफाखोरी से जुड़ा हुआ है।

जहां बाजार में शुद्ध मिल्क फैट की कीमत करीब 400 रुपये प्रति किलो के आसपास होती है, वहीं वेजिटेबल फैट महज 100 रुपये प्रति किलो में उपलब्ध हो जाता है।

यही कारण है कि कंपनियां अधिक मुनाफे के लिए फ्रोजन डेजर्ट को बढ़ावा देती हैं और ये ग्राहकों को आइसक्रीम के मुकाबले काफी सस्ती भी पड़ती हैं।

सेहत के नजरिए से देखें तो फ्रोजन डेजर्ट एक साइलेंट किलर की तरह काम कर सकता है। इसमें इस्तेमाल होने वाले वेजिटेबल ऑयल में ट्रांस फैट की मात्रा अत्यधिक होती है, जो सीधे तौर पर आपके दिल की धमनियों को ब्लॉक कर सकता है और शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ा देता है।

इतना ही नहीं, यह शरीर के मेटाबॉलिज्म रेट को भी धीमा कर देता है, जिससे वजन तेजी से बढ़ने लगता है। पाचन तंत्र के लिए भी फ्रोजन डेजर्ट किसी चुनौती से कम नहीं है।

आइसक्रीम में प्राकृतिक मिठास और डेयरी फैट होता है, लेकिन फ्रोजन डेजर्ट को मीठा बनाने के लिए अक्सर लिक्विड ग्लूकोज और कई तरह के आर्टिफिशियल स्वीटनर्स का सहारा लिया जाता है।

ये एडिटिव्स पेट में जलन, एसिडिटी और पाचन संबंधी गंभीर विकार पैदा कर सकते हैं। कंपनियों के लिए FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) के कड़े नियम हैं, जिसके तहत उन्हें पैकेट पर साफ तौर पर ‘Frozen Dessert’ लिखना अनिवार्य है।

अगर किसी उत्पाद में डेयरी फैट की जगह वनस्पति तेल का 1% भी हिस्सा है, तो उसे कानूनी रूप से ‘आइसक्रीम’ नहीं कहा जा सकता। इसलिए अगली बार खरीदारी करते समय पैकेट के पीछे दी गई सामग्री (Ingredients) को ध्यान से पढ़ें।

असली आइसक्रीम की पहचान का सबसे सटीक मंत्र यह है कि यदि पैकेट पर ‘Vegetable Oil’ या ‘Hydrogenated Fat’ लिखा है, तो उसे तुरंत किनारे कर दें।

अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए हमेशा उन ब्रांड्स को प्राथमिकता दें जो 100% मिल्क फैट का दावा करते हैं और जिनके लेबल पर स्पष्ट रूप से ‘आइसक्रीम’ शब्द अंकित हो।

Rama Pun

रमा पुन 'दून हॉराइज़न' में हेल्थ और लाइफस्टाइल संपादक के रूप में अपनी अहम जिम्मेदारी निभा रही हैं। स्वास्थ्य, फिटनेस, खानपान और मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) के विषयों पर उनकी पकड़ बेहद मजबूत है। रमा का फोकस हमेशा मेडिकल एक्सपर्ट्स की पुख्ता सलाह और वैज्ञानिक शोध पर आधारित (Evidence-based) खबरें लिखने पर रहता है। उनका स्पष्ट मानना है कि सेहत से जुड़ी कोई भी जानकारी शत-प्रतिशत प्रामाणिक होनी चाहिए। अपनी आकर्षक और तथ्यपरक लेखनी से वे पाठकों को एक स्वस्थ, तनावमुक्त और संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए निरंतर प्रेरित और जागरूक करती हैं।

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