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केवल 5 फैकल्टी के भरोसे अल्मोड़ा नर्सिंग कॉलेज, डीजी ने दिए कड़े निर्देश

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Tue, 27 Oct 2026 11:33 PM IST

अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज में डीजी प्रो. आशुतोष सयाना के दौरे में खुली कमियों की पोल। वीआईपी दौरे पर चमके वार्ड, रेडियोलॉजिस्ट और फैकल्टी संकट पर दिए निर्देश।

Almora Medical College

मुख्य बातें

  • वीआईपी दौरे पर चमके वार्ड, डंपिंग जोन में मिला कूड़े का ढेर
  • अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज को जल्द नया रेडियोलॉजिस्ट मिलने का मिला आधिकारिक आश्वासन
  • मात्र पांच शिक्षकों के सहारे चल रहा नर्सिंग कॉलेज, फैकल्टी संकट गहराया

अल्मोड़ा (27 अक्टूबर) : अल्मोड़ा स्थित सोबन सिंह जीना राजकीय आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान (अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज) में महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा प्रो. आशुतोष सयाना के निरीक्षण के दौरान अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। आम दिनों में वार्डों में गंदगी और अव्यवस्था का सामना करने वाले मरीजों को वीआईपी दौरे के दिन अस्पताल बिल्कुल चकाचौंध नजर आया, हालांकि परिसर में डंपिंग जोन के पीछे जमा कचरे के वीडियो ने अस्पताल के इस ‘टेंपरेरी मेकओवर’ की पोल खोल दी।

सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे की शिकायत पर महानिदेशक ने तत्काल कूड़ा हटाने, रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती करने और स्टाफ को तीमारदारों के साथ मानवीय व्यवहार करने के सख्त निर्देश जारी किए।

वीआईपी दौरे पर चमके वार्ड लेकिन पीछे मिला कचरा

महानिदेशक के दौरे के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे ने अस्पताल परिसर में डंपिंग जोन के पीछे भारी मात्रा में डंप किए गए मेडिकल कचरे का वीडियो महानिदेशक प्रो. आशुतोष सयाना को दिखाया। इस पर महानिदेशक ने गहरी नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को तुरंत कूड़ा हटाने और शौचालयों की सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखने का कड़ा फरमान सुनाया। स्थानीय प्रतिनिधियों का कहना था कि अस्पताल की व्यवस्था केवल अधिकारियों के दौरे के दिन चमकने के बजाय सामान्य दिनों में भी दुरुस्त रहनी चाहिए। इस दौरान महानिदेशक ने आईसीयू, एनआईसीयू और प्रसूति विभाग का सघन निरीक्षण किया।

डॉक्टरों की कमी से रेफरल सेंटर बनने का संकट

पहाड़ी जिलों के लिए संजीवनी माने जाने वाले इस मेडिकल कॉलेज में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, यूरोलॉजी, न्यूरोलॉजी और रेडियोलॉजिस्ट जैसे अहम विशेषज्ञों की भारी किल्लत बनी हुई है। विशेषज्ञ डॉक्टरों और जांच सुविधाओं के अभाव में मरीजों को मजबूरन हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल या देहरादून रेफर किया जा रहा है। मामले पर महानिदेशक ने आश्वस्त किया कि रेडियोलॉजिस्ट की व्यवस्था जल्द पूरी कर ली जाएगी। दूसरी तरफ नर्सिंग कॉलेज का शैक्षणिक ढांचा भी बदहाल है, जहां सैकड़ों छात्राओं के भविष्य की जिम्मेदारी सिर्फ पांच फैकल्टी पर टिकी है, जिनमें एक संविदा पर है और दूसरी सेवानिवृत्ति की कगार पर हैं।

मरीजों से बदसलूकी रोकने और एंबुलेंस सुधार के निर्देश

अस्पताल में दूर-दराज से आने वाले तीमारदारों और मरीजों के साथ स्टाफ के रूखे बर्ताव की शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए महानिदेशक ने कर्मचारियों को संवेदनशीलता और सेवा भाव से पेश आने की सख्त हिदायत दी। उन्होंने 108 और स्थानीय एंबुलेंस सेवा की कमियों को दूर करने के लिए कॉलेज प्रशासन को ठोस कदम उठाने को कहा। इस बैठक में प्राचार्य प्रो. जी.एस. तितियाल, प्रो. अशोक कुमार, डॉ. अनिल पाण्डे, मिशिगन यूनिवर्सिटी के डीन प्रो. आशीष जोशी, नर्सिंग अधीक्षिका डॉ. आशा गंगोला और सामाजिक कार्यकर्ता आशीष जोशी सहित कई प्रमुख अधिकारी मौजूद रहे।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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