देहरादून (22 अक्टूबर) : उत्तराखंड की सियासत में साल 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मी तेजी से बढ़ने लगी है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की न्याय यात्रा के राजनीतिक प्रभाव को बेअसर करने के लिए अब सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान किया कि बीजेपी राज्यभर में ‘लोकतंत्र बचाओ यात्रा’ निकालेगी, जिसके तहत पार्टी जनता के बीच जाकर कांग्रेस के सियासी हमलों का जवाब देगी और अपनी बात रखेगी।
श्रीनगर और देहरादून में इस दिन होगी पदयात्रा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पार्टी प्रदेश कार्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए ‘लोकतंत्र बचाओ यात्रा’ का पूरा शेड्यूल भी साझा किया। उन्होंने बताया कि इस राजनीतिक अभियान की शुरुआत 31 अक्टूबर को श्रीनगर में पदयात्रा के साथ होगी, जबकि 2 नवंबर को राजधानी देहरादून में भव्य पदयात्रा निकाली जाएगी। इसके अलावा, ऊधम सिंह नगर जिले में भी इस यात्रा का आयोजन किया जाएगा, हालांकि वहां की अंतिम तारीखों का ऐलान होना अभी बाकी है। इन कार्यक्रमों के जरिए पार्टी का पूरा जोर ज़मीनी स्तर पर जनता से जुड़ने और कांग्रेस के बयानों की हवा निकालने पर है।
चुनाव आयोग और कांग्रेस पर बरसे सीएम धामी
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सीएम धामी ने कांग्रेस पार्टी पर जमकर निशाना साधा और उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कांग्रेस द्वारा उठाए जा रहे सवालों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जिस संस्था के तहत हुए चुनावों में पार्टी को पहले जीत मिलती है, हार मिलने पर उसी पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक संस्कृति के अनुकूल नहीं है। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि केवल राजनीतिक नारे देने और यात्राएं निकालने से जनता का भरोसा हासिल नहीं किया जा सकता, इसके लिए जनता के बीच जाकर काम करना पड़ता है।
2027 के रण से पहले सियासी पारा हुआ हाई
उत्तराखंड में एक तरफ जहां कांग्रेस अपनी न्याय यात्रा के जरिए सियासी ज़मीन मजबूत करने में जुटी है, वहीं बीजेपी ने भी अपनी रणनीतिक गतिविधियों को तेज कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में दोनों प्रमुख दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और अधिक तीखा होने वाला है। बीजेपी की यह नई पदयात्रा राज्य के चुनावी समीकरणों को किस हद तक प्रभावित करती है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन इसने प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल जरूर पैदा कर दी है।




