गोपेश्वर (31 अक्टूबर): उत्तराखंड के चमोली जिले में बद्रीनाथ धाम से लौट रहे श्रद्धालुओं के हेलीकॉप्टर क्रैश में पायलट और कर्नाटक (बेंगलुरु) के पांच यात्रियों समेत छह लोगों की जान चली गई। पहली नजर में यह हादसा सिर्फ तकनीकी खराबी या मौसम का फेर दिखता है, लेकिन इसके पीछे विमानन कंपनियों के संचालन का एक बेहद चौंकाने वाला और उलझा हुआ ढांचा सामने आया है।
जिस हेलीकॉप्टर में छह लोग सवार थे, उसकी लीज, परमिट, उड़ान और मेंटेनेंस का जिम्मा किसी एक ऑपरेटर के पास नहीं, बल्कि चार अलग-अलग कंपनियों के बीच बंटा हुआ था। इस सिंडिकेट मॉडल ने पहाड़ी राज्य में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चार कंपनियों के हाथों में बंटी थी चॉपर की जिम्मेदारी
सामने आई जानकारी के मुताबिक, दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर का मालिकाना हक और संचालन कई हाथों से गुजर रहा था। यह चॉपर ‘शिव भोले ट्रेवल मार्ट’ ने ‘स्काई पल्स’ कंपनी से लीज पर लिया था। शिव भोले ट्रेवल मार्ट के पास खुद का आधिकारिक परमिट अभी प्रक्रिया में है, इसलिए वह इसका संचालन ‘ट्रांस भारत एविएशन’ के परमिट पर कर रही थी। इतना ही नहीं, कॉकपिट में बैठा पायलट ‘चिपसन एविएशन’ का था, जबकि तकनीकी जांच और मेंटेनेंस का जिम्मा ‘शौर्य एयरोनॉटिक्स’ संभाल रही थी।
हादसे के बाद जब जिम्मेदारी तय करने की बात आई, तो उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) के सीईओ प्रतीक जैन ने साफ किया कि यह मामला उनके सीधे अधिकार क्षेत्र में नहीं आता और इसकी विस्तृत तकनीकी जांच महानिदेशालय नागरिक उड्डयन (डीजीसीए) की विशेष टीम करेगी।
सिंगल इंजन पर सवार यात्रियों की जिंदगी और पुराना अलर्ट
हादसे ने चारधाम रूट पर चलने वाले सिंगल इंजन हेलीकॉप्टरों की सुरक्षा पर भी बहस छेड़ दी है। देहरादून के सहस्त्रधारा व जौलीग्रांट से बद्रीनाथ-केदारनाथ तक की 45 मिनट की उड़ान हो या गुप्तकाशी, फाटा और सिरसी से शटल सेवा-ज्यादातर संचालन सिंगल इंजन चॉपर से ही होता है। सिंगल इंजन वाले हेलीकॉप्टर वजन में हल्के और सस्ते पड़ते हैं, लेकिन हवा में खराबी आने पर इमरजेंसी लैंडिंग ही एकमात्र विकल्प बचता है।
इसके उलट, डबल इंजन वाले चॉपर में एक इंजन फेल होने पर भी दूसरा इंजन सुरक्षित लैंडिंग करा सकता है। ट्रांस भारत एविएशन से जुड़ा यह कोई पहला मामला नहीं है; इससे पहले 24 अक्टूबर को नई टिहरी के बौराड़ी स्टेडियम में भी इसी कंपनी के एक अन्य हेलीकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी थी।
सुरक्षा मानकों पर डीजीसीए की जांच और आगामी सख्त कदम
चमोली पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने घटनास्थल से सभी शव बरामद कर कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। डीजीसीए की टीम अब ब्लैक बॉक्स, मेंटेनेंस लॉग और लीज समझौतों की बारीकी से पड़ताल करेगी कि क्या मानकों की अनदेखी कर सिर्फ कागजी खानापूर्ति के सहारे उड़ान भरी जा रही थी। चारधाम यात्रा में हर साल लाखों श्रद्धालु दुर्गम घाटियों में हेली सेवा का सहारा लेते हैं, लेकिन एक ही चॉपर को चार कंपनियों द्वारा आउटसोर्स करने का यह मॉडल अब कानूनी घेरे में है। राज्य सरकार और उड्डयन विशेषज्ञों की नजर अब डीजीसीए की प्राथमिक रिपोर्ट पर है, जिसके आधार पर पहाड़ी उड़ानों के परमिट और लीज नियमों को लेकर कड़े दिशा-निर्देश तय किए जा सकते हैं।




