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देहरादून: पलटन बाजार में नुक्कड़ नाटक, लोगों को बताया कैसे सांसों में जहर घोलते हैं पटाखे

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Sat, 07 Nov 2026 08:26 PM IST

देहरादून नगर निगम ने दीपावली से पहले पलटन बाजार में नुक्कड़ नाटक कर लोगों को पटाखों से होने वाले वायु प्रदूषण और इसके खतरों के प्रति जागरूक किया।

Artists performing street play in dehradun paltan bazaar to raise awareness about diwali air pollution

मुख्य बातें

  • देहरादून नगर निगम ने पलटन बाजार में नुक्कड़ नाटक के जरिए जागरूकता अभियान चलाया।
  • अभियान का मकसद दिवाली पर पटाखों से निकलने वाले खतरनाक धुएं को रोकना है।
  • पटाखों का धुआं बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित होता है।

देहरादून, 7 नवंबर: दीपावली और त्योहारी सीजन को देखते हुए देहरादून नगर निगम वायु प्रदूषण को लेकर सख्त हो गया है। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के तहत शनिवार को शहर के सबसे व्यस्त पलटन बाजार में एक विशेष जन-जागरूकता अभियान चलाया गया। नगर आयुक्त के निर्देश पर निगम की टीम ने नुक्कड़ नाटक के जरिए आम जनता और व्यापारियों को पटाखों से निकलने वाले जहरीले धुएं के खतरों के बारे में बताया।

बच्चों और बुजुर्गों की सांसों पर भारी पड़ता है धुआं

नुक्कड़ नाटक के माध्यम से कलाकारों ने समझाया कि पटाखों से निकलने वाले सूक्ष्म कण, जिन्हें पीएम 2.5 और पीएम 10 कहा जाता है, सीधे फेफड़ों तक पहुंचते हैं। ठंड के मौसम में यह धुआं हवा में नीचे ही ठहर जाता है, जिससे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है। यह स्थिति छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस की बीमारी या अस्थमा झेल रहे मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। निगम की टीम ने पलटन बाजार में खरीदारी करने आए लोगों से अपील की कि वे इस बार पर्यावरण के अनुकूल दीपावली मनाएं और पटाखों का कम से कम इस्तेमाल करें।

स्वच्छ वायु कार्यक्रम में शामिल है दून शहर

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की रिपोर्ट के मुताबिक, देहरादून देश के उन ‘नॉन-अटेनमेंट’ शहरों में शामिल है, जहां हवा की गुणवत्ता लगातार राष्ट्रीय मानकों से नीचे रही है। इसी को सुधारने के लिए शहर में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम लागू किया गया है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य हवा में मौजूद पीएम 10 और पीएम 2.5 जैसे प्रदूषकों की मात्रा को 2026 तक 40 प्रतिशत तक कम करना है। निगम का यह अभियान इसी बड़े लक्ष्य का हिस्सा है, ताकि त्योहारों के दौरान हवा को और ज्यादा जहरीली होने से बचाया जा सके।

वायु गुणवत्ता (AQI) स्थिति स्वास्थ्य पर असर
0-50 अच्छी (Good) कोई असर नहीं, हवा सुरक्षित
101-200 मध्यम (Moderate) फेफड़े और दिल के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत
301-400 बहुत खराब (Very Poor) लंबे समय तक संपर्क में रहने पर सांस की गंभीर बीमारी

नगर निगम देहरादून लगातार यह प्रयास कर रहा है कि शहर के नागरिक खुद आगे आकर प्रदूषण कम करने में मदद करें। अधिकारियों ने साफ किया है कि बिना जनभागीदारी के स्वच्छ और स्वस्थ वायु का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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