देहरादून (20 अक्टूबर) : राजधानी देहरादून के ऐतिहासिक परेड ग्राउंड में आयोजित 79वें दशहरा महोत्सव के दौरान तकनीकी गफलत का एक अनूठा वाकया सामने आया। यहाँ देश के सबसे ऊंचे पुतलों में शामिल 181 फीट लंबे रावण के दहन के लिए आधुनिक रिमोट और सेंसर की व्यवस्था की गई थी, लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मौजूदगी में ऐन मौके पर रिमोट ने काम करना बंद कर दिया।
तकनीक के पूरी तरह फेल होने के बाद आनन-फानन में वैकल्पिक इंतजाम किए गए और बमुश्किल मैनुअल तरीके से रावण का दहन किया गया। इस तकनीकी बाधा के बीच मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में देवभूमि के मूल स्वरूप को बचाने को लेकर हुंकार भरी।
रिमोट फेल होने पर मैनुअल जला रावण
बन्नू बिरादरी दशहरा कमेटी की ओर से आयोजित इस भव्य समारोह में पहली बार 181 फीट लंबे रावण के साथ 70-70 फीट ऊंचे कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले खड़े किए गए थे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जब रिमोट का बटन दबाकर असत्य पर सत्य की विजय का संदेश देने वाले थे, तभी सेंसर ने अचानक धोखा दे दिया। कुछ पलों के लिए आयोजन स्थल पर असमंजस की स्थिति बन गई। हालांकि, आयोजकों ने तुरंत सूझबूझ दिखाते हुए पारंपरिक तरीके यानी मैन्युअली पुतले में आग लगाई, जिसके बाद रावण की लंका धू-धू कर जल उठी। इस तकनीकी चूक की चर्चा पूरे शहर में बनी रही।
देवभूमि का मूल स्वरूप नहीं बिगड़ने देंगे
तकनीकी बाधा के ठीक बाद सीएम धामी ने जनसभा को संबोधित करते हुए अपने तीखे और स्पष्ट तेवर दिखाए। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि उत्तराखंड राज्य के मूल स्वरूप और संस्कृति से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। प्रदेश में किसी भी तरह के डेमोग्राफिक चेंज को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि लव जिहाद, लैंड जिहाद और मजार जिहाद के बाद अब थूक जिहाद के कलंक को भी देवभूमि की धरती से पूरी तरह मिटाकर ही दम लेंगे। सरकार ने पहले ही यूसीसी लागू करने और अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण जैसे बड़े कदम उठाए हैं।
1947 से चली आ रही परंपरा का निर्वहन
आजादी के साल यानी 1947 से ही बन्नू बिरादरी दशहरा कमेटी देहरादून में लगातार इस ऐतिहासिक पर्व का आयोजन करती आ रही है। इस बार कमेटी का यह 79वां दशहरा उत्सव था, जिसमें उमड़ी भारी भीड़ ने तमाम प्रशासनिक और तकनीकी चुनौतियों के बीच बुराई पर अच्छाई की जीत के इस पर्व का गवाह बनने का लुत्फ उठाया। भगवान श्रीराम के आदर्शों को याद करते हुए वक्ताओं ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी सिद्धांतों से समझौता न करना ही असली विजय है।




