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देहरादून में आवारा और पालतू पशुओं का बनेगा डिजिटल पोर्टल, सड़कों पर निगरानी होगी तेज

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Thu, 29 Oct 2026 03:18 PM IST

देहरादून डीएम आशीष चौहान ने बैठक में खुद 1962 पशु हेल्पलाइन पर कॉल कर पोल खोली। लापरवाही पर कर्मचारियों का वेतन रोकने और डिजिटल पोर्टल बनाने के दिए कड़े निर्देश।

Dehradun animal helpline 1962

मुख्य बातें

  • डीएम ने 1962 हेल्पलाइन जांची, लापरवाही पर कर्मचारियों का वेतन रोका।
  • निराश्रित और पालतू पशुओं की ट्रैकिंग के लिए बनेगा समर्पित डिजिटल पोर्टल।
  • शहर की सीमाओं पर सीसीटीवी कैमरे लगेंगे, डेयरियों का होगा अनिवार्य सर्वे।

देहरादून (29 अक्टूबर) : देहरादून में निराश्रित और पालतू पशुओं की बदहाली पर बुलाई गई समीक्षा बैठक उस वक्त अप्रत्याशित मोड़ पर पहुंच गई, जब जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने दावों की हकीकत परखने के लिए अधिकारियों के सामने ही पशु आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर ‘1962’ पर खुद कॉल मिला दिया। फोन पर अपेक्षित रिस्पॉन्स न मिलने और पशु एम्बुलेंस की अनुपलब्धता की पोल खुलते ही डीएम बिफर पड़े। उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) को संबंधित लापरवाह कार्मिकों की जवाबदेही तय कर उनका तत्काल प्रभाव से वेतन रोकने के निर्देश जारी कर दिए।

डीएम ने खुद मिलाया हेल्पलाइन नंबर, तुरंत वेतन रोका

ऋषिपर्णा सभागार में नगर निगम, नगर निकायों और पशुपालन विभाग के शीर्ष अधिकारियों के साथ आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में डीएम ने साफ कर दिया कि आपात सेवाओं में ढिलाई किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं होगी। हेल्पलाइन 1962 और पशु एम्बुलेंस को लेकर आम जनता से लगातार मिल रही शिकायतों का संज्ञान लेते हुए डीएम ने लाइव रियलिटी चेक किया था।

व्यवस्था दुरुस्त न पाए जाने पर उन्होंने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. डी.के. चंद को सख्त आदेश दिए कि पशुओं के उपचार और रेस्क्यू संबंधी कॉल्स का समयबद्ध निस्तारण हो। इसके साथ ही पशु एम्बुलेंस की उपलब्धता और उसके मूवमेंट की डेली मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने को कहा गया, ताकि बेजुबानों को संकट के समय तुरंत चिकित्सकीय मदद मिल सके।

सीमाओं पर सीसीटीवी कैमरे, डेयरियों का होगा अनिवार्य सर्वे

सड़कों पर लावारिस गोवंश छोड़ने की बढ़ती प्रवृत्ति पर नकेल कसने के लिए जिला प्रशासन अब आधुनिक निगरानी का सहारा लेगा। डीएम ने नगर निगम और नगर निकाय क्षेत्रों के सभी प्रमुख प्रवेश व निकासी मार्गों पर हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए हैं, ताकि बाहर से लाकर शहर की सीमा में गोवंश डंप करने वालों को रंगे हाथ पकड़ा जा सके।

इसके साथ ही जिले की सभी व्यावसायिक डेयरियों का अनिवार्य सर्वे कराया जाएगा, जिसमें पशुओं की कुल संख्या और उनके पंजीकरण का पूरा डेटा संकलित होगा। प्रशासन एक समर्पित ‘पशु पंजीकरण एवं मॉनिटरिंग पोर्टल’ भी विकसित कर रहा है, जिससे हर पशु का डिजिटल रिकॉर्ड रहेगा। डीएम ने जनपद की सभी गौशालाओं में चारे, पानी, साफ-सफाई और इलाज की व्यवस्थाओं का नियमित ऑडिट करने के भी कड़े निर्देश दिए।

कुत्ता काटने पर दस दिन आइसोलेशन, बंदरों का रेस्क्यू

सड़कों पर जनसुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवारा और पालतू कुत्तों के प्रबंधन पर भी कड़े फैसले लिए गए हैं। श्वान काटने (डॉग बाइट) की घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई के लिए रैपिड रेस्क्यू टीमों को सक्रिय कर दिया गया है। नियमानुसार, ऐसे श्वानों को पकड़कर एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर में 10 दिनों तक अनिवार्य आइसोलेशन और निगरानी में रखा जाएगा।

वहीं, शहरी और ग्रामीण आबादी वाले इलाकों में बंदरों के आतंक से निजात दिलाने के लिए वन विभाग के साथ संयुक्त रेस्क्यू अभियान चलाया जाएगा। बैठक में वरिष्ठ पशुपालन अधिकारी डॉ. वी.के. अग्रवाल और नगर निगम देहरादून के डॉ. रोहित गहलोत सहित ऋषिकेश व अन्य निकायों के अधिकारी मौजूद रहे।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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