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मेट्रो शहरों से भी आगे निकला दून, सबसे ज्यादा वेतन देने में बना देश का नंबर 1 शहर

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Sun, 13 Sep 2026 04:16 PM IST

देहरादून ने गैर-कॉर्पोरेट क्षेत्र के कामगारों को वेतन देने में दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु को पीछे छोड़ दिया है। केंद्र सरकार के MoSPI सर्वे में दून ₹4.60 लाख औसत वेतन के साथ देश में अव्वल रहा।

Dehradun highest average salary

मुख्य बातें

  • देहरादून में अनिगमित कामगारों का औसत वेतन ₹4.60 लाख सालाना दर्ज हुआ।
  • यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत ₹1.47 लाख से तीन गुना से भी अधिक है।
  • मुंबई और बेंगलुरु जैसे मेट्रो शहर ₹3 लाख औसत वेतन पर सिमटे।
  • उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में औसत वार्षिक वेतन ₹1.15 से ₹1.40 लाख के बीच रहा।

दून हॉराइज़न, देहरादून (13 सितंबर): भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के ताजा सर्वेक्षण के अनुसार, उत्तराखंड की राजधानी देहरादून देश में गैर-कॉर्पोरेट यानी अनिगमित क्षेत्र के कामगारों को सबसे अधिक औसत वेतन देने वाला शहर बन गया है।

यहां काम करने वाले अनिगमित श्रमिकों की औसत सालाना कमाई 4.60 लाख रुपये दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय औसत से तीन गुना से भी ज्यादा है। इस मामले में देहरादून ने दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े मेट्रो शहरों को भी पीछे छोड़ दिया।

आंकड़े चौंकाते हैं। जहां देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और आईटी सिटी बेंगलुरु में गैर-कॉर्पोरेट कामगारों का औसत वेतन 3 लाख रुपये सालाना तक सीमित रहा, वहीं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में यह आंकड़ा करीब 2.50 लाख रुपये सालाना दर्ज किया गया। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में यह आंकड़ा 1.65 लाख रुपये रहा, जबकि पटना और रांची जैसे शहरों में कमाई राष्ट्रीय औसत (1.47 लाख रुपये) से भी नीचे रही।

आईटी, कोचिंग और प्रोफेशनल सर्विसेज ने बदला ढांचा

देहरादून में हाल के वर्षों में उच्च शिक्षा, राष्ट्रीय स्तर के कोचिंग संस्थानों, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT), हॉस्पिटैलिटी और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में उल्लेखनीय उछाल दर्ज हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, जिले में सक्रिय 74,843 अनिगमित उद्यमों में लगभग 1.72 लाख श्रमिक कार्यरत हैं। इनमें से करीब 31 फीसदी इकाइयां दैनिक मजदूरी वाले कामगारों पर निर्भर हैं। यहां उच्च मूल्य वाली सेवाओं और कुशल मानव संसाधन की लगातार बढ़ती मांग ने वेतन के इस ढांचे को शीर्ष पर पहुंचाया है।

उत्तराखंड के अन्य जिलों की स्थिति: मैदानी क्षेत्र आगे, पहाड़ पीछे

प्रदेश के भीतर ही वेतन असमानता का एक स्पष्ट दायरा नजर आता है। जहां मैदानी औद्योगिक जिलों में कामगारों को बेहतर पारिश्रमिक मिल रहा है, वहीं पर्वतीय जिलों की स्थिति अभी भी राष्ट्रीय औसत के इर्द-गिर्द सिमटी हुई है:

  • हरिद्वार: सिडकुल (SIDCUL), मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स की बदौलत यहां का औसत सालाना वेतन 2.40 लाख रुपये रहा।
  • उधम सिंह नगर: ऑटोमोबाइल, पैकेजिंग और फार्मास्युटिकल कंपनियों की मौजूदगी के चलते औसत वेतन 2.25 लाख रुपये दर्ज हुआ।
  • हल्द्वानी (नैनीताल): कुमाऊं के सबसे बड़े व्यापारिक केंद्र के रूप में यहां औसत कमाई 2.10 लाख रुपये रही।
  • पर्वतीय जिले: टिहरी में औसत वार्षिक वेतन 1.60 लाख रुपये रहा, जबकि उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा जैसे अधिकांश पहाड़ी जिलों में यह आंकड़ा 1.15 लाख से 1.40 लाख रुपये के बीच दर्ज किया गया।

निस्संदेह, यह रिपोर्ट देहरादून की आर्थिकी में पारंपरिक सरकारी नौकरियों और पेंशनर्स के शहर वाली छवि से हटकर एक गतिशील, आधुनिक सेवा-आधारित बाजार के उभार को रेखांकित करती है।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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