ताज़ा समाचार देश विदेश क्राइम बिज़नेस खेल मनोरंजन ऑटो गैजेट्स धर्म राशिफल आज का पंचांग
हेल्थ लाइफस्टाइल करियर ट्रेंडिंग

UPI लेन-देन पर शुल्क के विरोध में उतरे दून के कारोबारी, कांग्रेस ने साधा केंद्र पर निशाना

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Thu, 17 Sep 2026 03:53 PM IST

देहरादून में UPI पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क की सुगबुगाहट से व्यापारियों और विपक्ष में भारी आक्रोश है। फेस्टिव सीजन से पहले कारोबारियों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।

UPI Transaction Charges

मुख्य बातें

  • ₹2,000 से ऊपर के भुगतान पर 0.40% तक MDR शुल्क की चर्चा।
  • दून उद्योग व्यापार मंडल ने दी सीधी चेतावनी—शुल्क नहीं हटा तो आंदोलन।
  • कांग्रेस ने साधा निशाना, इसे बताया जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ।
  • देहरादून में बीते दो वर्षों में कैश निकासी 30 फीसदी घटी।
  • जिले भर में 110 एटीएम स्थायी रूप से हुए बंद।

दून हॉराइज़न, देहरादून (17 सितंबर): त्योहारी सीजन की आहट के बीच डिजिटल पेमेंट (Digital Payment) व्यवस्था को लेकर राजधानी देहरादून के बाजारों में भारी सुगबुगाहट और आक्रोश देखने को मिल रहा है। यूपीआई से होने वाले भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर (MDR) शुल्क लगाए जाने की चर्चाओं ने शहर के व्यापारियों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।

सड़क से लेकर सियासत तक इस मुद्दे पर उबाल है। एक तरफ जहां कांग्रेस ने इसे आम जनता की जेब पर डाका करार दिया है, वहीं दूसरी ओर दून उद्योग व्यापार मंडल और कपड़ा कमेटी ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि यह अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं हटाया गया, तो कारोबारी चुप नहीं बैठेंगे।

तय स्लैब का गणित और व्यापारियों की दोहरी मार

सामने आई व्यवस्था के तहत ₹2,000 तक के छोटे भुगतानों को फिलहाल इस दायरे से बाहर रखा गया है। इसके बाद ₹3,000 के लेन-देन पर 0.40 प्रतिशत यानी 12 रुपये, ₹50,000 के ट्रांजेक्शन पर ₹200 और ₹7.50 लाख तक के भुगतान पर ₹300 का शुल्क प्रस्तावित बताया जा रहा है। अधिकतम स्लैब ₹7.50 लाख से ऊपर पर भी ₹300 ही तय किया गया है।

दून उद्योग व्यापार मंडल के महासचिव सुनील मैसोन का साफ कहना है कि व्यापारी पहले से ही जीएसटी और आयकर के दायरे में बंधा हुआ है। ऐसे में कोई भी दुकानदार अपनी जेब से यह अतिरिक्त शुल्क वहन नहीं करेगा। नतीजा यह होगा कि सामान की कीमतों में इजाफा होगा और अंततः इसका भार आम उपभोक्ता पर ही पड़ेगा।

कारोबारियों का यह भी तर्क है कि सरकार को डिजिटल इंडिया को मजबूत करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर सब्सिडी देनी चाहिए थी, न कि सफल हो चुके माध्यम पर नया टैक्स जैसा बोझ लादना चाहिए।

फेस्टिव सीजन के मुहाने पर कपड़ा कमेटी की चेतावनी

देहरादून कपड़ा कमेटी के प्रधान प्रवीण कुमार जैन ने इस फैसले के समय पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि त्योहारी सीजन पूरे साल के नुकसान की भरपाई का वक्त होता है। ठीक इसी मौके पर ऐसा फैसला लागू होने से बाजार का मनोबल टूटेगा। ग्राहक और दुकानदार दोनों के बीच असमंजस की स्थिति बनेगी। कपड़ा कमेटी ने स्पष्ट किया है कि वे सरकार के इस कदम के खिलाफ किसी भी बड़े आंदोलन में पूरी ताकत से शामिल होंगे।

उधर, कांग्रेस ने भी इस मामले में तीखे राजनीतिक बाण चलाए हैं। कांग्रेस भवन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने तंज कसा कि केंद्र सरकार ने देश की जनता को यह अजीबोगरीब तोहफा दिया है। उन्होंने सवाल दागा कि जब हालिया बजट पेश हुआ था, तब इस शुल्क का जिक्र क्यों नहीं किया गया? सरकार पिछले दरवाजे से आम नागरिकों की जेब खाली करने में जुटी है।

दून में 110 एटीएम हुए बंद, क्या फिर पलटेगा ट्रेंड?

दिलचस्प बात यह है कि इस विवाद के बीच देहरादून जिले का बैंकिंग परिदृश्य भी बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। डिजिटल लेनदेन की रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 24 महीनों में जिले में एटीएम से कैश निकासी करीब 30 फीसदी तक नीचे आ गई।

जिले के लीड बैंक अधिकारी संजय भटिया के मुताबिक, क्यूआर कोड की सुलभता ने लोगों की जेब से नकदी पूरी तरह गायब कर दी थी। इसी का परिणाम रहा कि देहरादून में 110 एटीएम स्थायी रूप से बंद कर दिए गए। मौजूदा समय में 27 प्रमुख बैंकों की 670 शाखाओं के अधीन अब केवल 650 एटीएम ही सक्रिय बचे हैं। कई बैंकों ने तो खर्च घटाने के लिए एटीएम कियोस्क से सुरक्षा गार्ड तक हटा लिए हैं और नए एटीएम लगाने पर अघोषित रोक है।

लेकिन अगर ₹2,000 से ऊपर के डिजिटल भुगतानों पर वास्तव में शुल्क की कटौती होने लगी, तो बाजार का मिजाज पलट सकता है। व्यापारी ग्राहकों से नकद भुगतान की मांग करेंगे, जिससे बंद होते एटीएम बूथों पर एक बार फिर से लंबी कतारें लौटने की प्रबल संभावना बन रही है।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

Leave a Comment