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Dr Tanvi suicide case : कार के भीतर मौत से पहले क्या कोई और भी था मौजूद?

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Sat, 28 Mar 2026 02:06 PM IST

देहरादून के एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज की पीजी छात्रा डॉ. तन्वी की आत्महत्या के मामले में पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के जरिए मौत की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। सीओ सदर के नेतृत्व में जांच टीम इस बात की पुष्टि कर रही है कि सुसाइड के वक्त छात्रा के साथ कार में कोई अन्य व्यक्ति मौजूद था या नहीं।

Dr Tanvi suicide case : कार के भीतर मौत से पहले क्या कोई और भी था मौजूद?

मुख्य बातें

  • पुलिस अस्पताल से लेकर घटनास्थल तक के सभी सीसीटीवी कैमरों की टाइमिंग का मिलान कर रही है।
  • शरीर में इंजेक्शन लगाने के लिए इस्तेमाल किए गए कैनुला और दवाओं के स्रोत की भी गहन जांच शुरू।
  • देहरादून ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी ने विभागाध्यक्ष डॉ. प्रियंका गुप्ता का पक्ष लेते हुए उन्हें समर्पित पेशेवर बताया।

देहरादून। श्री गुरु राम राय (एसजीआरआर) इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज की पीजी छात्रा डॉ. तन्वी (Dr Tanvi suicide case update) की मौत की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस ने अब पूरी ताकत झोंक दी है। शुक्रवार को जांच का केंद्र पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और घटनास्थल के आसपास की परिस्थितियों पर टिका रहा।

पुलिस की एक विशेष टीम ने अस्पताल परिसर से लेकर उस अंतिम लोकेशन तक के सभी सीसीटीवी फुटेज कब्जे में लिए हैं, जहां डॉ. तन्वी की कार खड़ी मिली थी। सीओ सदर अंकित कंडारी के अनुसार, तफ्तीश का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि क्या डॉ. तन्वी ने जब खुद को कैनुला के जरिए जहरीला इंजेक्शन लगाया, तब उनके साथ कार में कोई और मौजूद था।

नाइट ड्यूटी खत्म करने के बाद डॉ. तन्वी जब अस्पताल से कार लेकर निकलीं, तो उस पूरे रूट पर उनकी गतिविधियों को ट्रैक किया जा रहा है। पुलिस उन कैमरों की टाइमिंग और कार के भीतर की हलचल का बारीकी से मिलान कर रही है ताकि यह साफ हो सके कि वह कार में अकेली थीं या किसी और के प्रभाव में थीं।

जांच का एक दूसरा अहम सिरा उन दवाओं से जुड़ा है जिनका इस्तेमाल खुदकुशी के लिए किया गया। पुलिस इस बात का पता लगा रही है कि डॉ. तन्वी ने वे दवाएं और मेडिकल उपकरण अस्पताल के स्टॉक से लिए थे या कहीं बाहर से खरीदे थे। इस बीच, कॉलेज के प्राचार्य डॉ. उत्कर्ष शर्मा ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि मामले की जांच के लिए स्थानीय प्रशासन ने उच्च स्तरीय समिति गठित कर दी है।

विवादों के बीच देहरादून ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी ने नेत्र विभाग की प्रमुख डॉ. प्रियंका गुप्ता का बचाव किया है। सोसाइटी के सदस्यों का कहना है कि डॉ. प्रियंका एक अनुभवी और समर्पित चिकित्सक हैं, और उन पर उठ रहे सवाल निराधार हो सकते हैं। फिलहाल, पुलिस और प्रशासनिक जांच समिति की रिपोर्ट ही इस रहस्यमयी सुसाइड केस की असली सच्चाई सामने लाएगी।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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