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विकासनगर से डोईवाला तक बुक्सा जनजाति के 46 गांवों में पहुंचेगी बिजली और पानी, लापरवाही पर नपेंगे अफसर

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Thu, 29 Oct 2026 03:11 PM IST

देहरादून के विकासनगर, सहसपुर और डोईवाला के 46 बुक्सा गांवों में पीएम-जनमन योजना से विकास कार्य तेज। डीएम ने स्कूलों और बुनियादी सुविधाओं के ऑडिट के निर्देश दिए।

Buksa tribe Dehradun

मुख्य बातें

  • 46 बुक्सा गांवों में योजनाओं की 100 फीसदी संतृप्ति का आदेश।
  • स्कूलों में शिक्षक, शौचालय और कंप्यूटर की स्थिति जांची जाएगी।
  • योजनाओं में लापरवाही बरतने वाले अफसरों पर सीधी कार्रवाई होगी।

देहरादून (29 अक्टूबर) : देहरादून जिले के तीन विकासखंडों में निवासरत बुक्सा जनजाति को मूलभूत हक दिलाने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने विकासनगर, सहसपुर और डोईवाला के 46 गांवों में केंद्र व राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को शत-प्रतिशत लागू करने का कड़ा निर्देश जारी किया है। प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) के तहत विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) में दर्ज बुक्सा परिवारों का जीवन स्तर सुधारने के लिए प्रशासन अब कागजी दावों से आगे बढ़कर सीधे धरातल पर उतरने की तैयारी में है।

तीन ब्लॉकों के 46 गांवों में जमीनी ऑडिट

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि विकासनगर, सहसपुर और डोईवाला के 46 गांवों में रहने वाले प्रत्येक बुक्सा परिवार तक विकास की किरण पहुंचना अनिवार्य है। डीएम ने सभी संबंधित महकमों को निर्देश दिया कि इन बस्तियों में पक्के आवास, स्वच्छ पेयजल, निर्बाध बिजली, स्वास्थ्य और राशन जैसी प्राथमिक सुविधाओं की मौजूदा स्थिति का पूरा डाटा तैयार किया जाए। पात्र लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें बिना किसी देरी के सरकारी योजनाओं से आच्छादित करने के आदेश दिए गए हैं, ताकि कोई भी जरूरतमंद परिवार व्यवस्था की सुस्ती के चलते विकास की दौड़ में पीछे न छूटे।

सरकारी स्कूलों में शिक्षक और कंप्यूटर की होगी जांच

आदिवासी बस्तियों में शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए प्रशासन ने कड़ा ढांचा तैयार किया है। जिलाधिकारी ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इन 46 गांवों के प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों का भौतिक सत्यापन किया जाए। इसमें शिक्षकों की नियमित तैनाती, विद्यालय भवनों की मजबूती, छात्र-छात्राओं के लिए अलग शौचालय, स्वच्छ पेयजल और विद्युत संयोजन की पड़ताल शामिल है। इसके अलावा, डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए स्कूलों में कंप्यूटर और प्रिंटर की उपलब्धता की अलग से रिपोर्ट मांगी गई है, ताकि तकनीकी संसाधनों का अभाव तुरंत दूर किया जा सके।

विभागों को तय प्रारूप पर देनी होगी रिपोर्ट

योजनाओं के धरातल पर क्रियान्वयन में हीलाहवाली करने वाले अधिकारियों पर सीधी कार्रवाई तय की गई है। जनजाति कल्याण, समाज कल्याण, राजस्व, ग्राम्य विकास, पंचायती राज, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, पेयजल, विद्युत और लोक निर्माण विभाग समेत सभी संबंधित विभागों को निर्धारित प्रारूप में प्रगति रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। प्रशासन का सीधा संदेश है कि विकास का यह खाका केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तय समयसीमा के भीतर हर बुक्सा परिवार को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा से जोड़कर जमीनी बदलाव लाया जाएगा।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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