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क्या सच में कांग्रेस छोड़ने जा रहे थे हरीश रावत? खुद सामने आकर बताई पूरी सच्चाई

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Sat, 12 Sep 2026 03:18 PM IST

देहरादून में पूर्व ओएसडी के ठिकानों पर ईडी की कार्रवाई के बाद पूर्व सीएम हरीश रावत ने इस्तीफे की खबरों पर बड़ा यूटर्न लिया है। उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस उनके खून और हड्डियों में बसी है।

Harish Rawat Resignation

मुख्य बातें

  • पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पार्टी छोड़ने की तमाम अटकलों को पूरी तरह खारिज किया।
  • चंदन सिंह जीना के घर केंद्रीय एजेंसी की छापेमारी के बाद सियासी पारा चढ़ा।
  • रावत ने जांच एजेंसियों के जरिए नया नैरेटिव खड़ा करने का गंभीर आरोप लगाया।
  • पूर्व सीएम केवल पार्टी के संगठनात्मक पदों को छोड़ने की बात पर अड़े।

दून हॉराइज़न, देहरादून (12 सितंबर): उत्तराखंड की सियासत में शनिवार का दिन भारी सियासी उठापटक के नाम रहा, जब पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत (Harish Rawat) के एक बयान ने कांग्रेस संगठन से लेकर सत्ता के गलियारों तक खलबली मचा दी।

सोशल मीडिया पर पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से त्यागपत्र की पेशकश करने के महज कुछ ही घंटों बाद उन्होंने यूटर्न ले लिया। रावत ने दो टूक शब्दों में साफ किया कि मीडिया के एक हिस्से में उनके पार्टी छोड़ने की जो खबरें चलाई जा रही हैं, वे पूरी तरह निराधार हैं।

छापेमारी की आंच और संगठन से दूरी की पेशकश

दरअसल, सारा विवाद देहरादून में पूर्व मुख्यमंत्री के करीबी और पूर्व विशेष कार्याधिकारी यानी ओएसडी चंदन सिंह जीना के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ED Raid) की दबिश से जुड़ा है। भर्ती परीक्षाओं और ओएमआर शीट में धांधली की जांच के सिलसिले में हुई इस कार्रवाई में भारी नकदी व जेवरात मिलने की खबरें सामने आई थीं। इसके तुरंत बाद हरीश रावत ने एक्स पर लंबा संदेश लिखकर नैतिक आधार पर पदों से हटने की बात कह डाली।

सियासी तौर पर यह कदम बेहद चौंकाने वाला था। रावत का कहना था कि यदि उनके लंबे समय से सहयोगी रहे व्यक्ति की भूमिका गड़बड़ियों में साबित होती है, तो यह उनके लिए व्यक्तिगत शर्मिंदगी का विषय होगा। ऐसे में पार्टी की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम को आंच न पहुंचे, इसलिए वे कांग्रेस कार्यसमिति (AICC Working Committee) और प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य पद से इस्तीफा देने को तैयार थे।

‘कांग्रेस मेरी हड्डियों में है’—बयान पर तत्काल सफाई

इस्तीफे की खबर जंगल की आग की तरह फैली, जिसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री को फौरन स्थिति साफ करनी पड़ी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बात सिर्फ संगठनात्मक जिम्मेदारियों से हटने की थी, पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने की नहीं। उनके शब्दों में, पार्टी की सदस्यता उनके खून और हड्डियों में रची-बसी है, जो उनके साथ ही जाएगी।

रावत ने आगे जांच एजेंसियों के समय पर सवाल उठाते हुए इसे सोची-समझी रणनीति करार दिया। उन्होंने तंज कसा कि राज्य में जब भी चुनाव या बड़े सियासी घटनाक्रम नजदीक होते हैं, केंद्रीय एजेंसियां सक्रिय हो जाती हैं। इस बार निशाने पर वे खुद न होकर उनके पुराने सहयोगी बने हैं, ताकि जनता के बीच एक अलग माहौल बनाया जा सके।

राज्य की राजनीति में मजबूत पकड़

उत्तराखंड के चुनावी समीकरणों में हरीश रावत का कद बेहद कद्दावर माना जाता है। 1980 के दशक में दिग्गज भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी को हराकर संसद पहुंचने वाले रावत केंद्रीय मंत्री रहने के साथ-साथ तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल चुके हैं। ऐसे में उनके किसी भी अप्रत्याशित कदम का सीधा असर प्रदेश कांग्रेस के आंतरिक संतुलन और आगामी रणनीति पर पड़ना तय है।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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