देहरादून (31 अक्टूबर) : पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत और उनकी करीबी सहयोगी जसवीर कौर आनंद उर्फ सोनिया आनंद रावत से जुड़े करीब 43.2 लाख रुपये के कथित संपत्ति विवाद को लेकर उत्तराखंड में राजनीतिक तापमान चढ़ गया है। दोनों हाथ से दिव्यांग पीड़ित हरिओम सहगल के बकाया भुगतान और चेक बाउंस होने के आरोपों को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और पूर्व मंत्री की नैतिकता पर सीधा हमला बोला है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) देहरादून ने प्रकरण की निष्पक्ष और विस्तृत जांच पुलिस अधीक्षक नगर (एसपी सिटी) को सौंप दी है।
दिव्यांग के बकाये पर पूर्व मंत्री की चुप्पी पर सवाल
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता हनी पाठक ने प्रेस बयान जारी कर कहा कि दूसरों को जनसेवा और शुचिता का पाठ पढ़ाने वाले पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत को पहले अपने करीबियों से जुड़े इस गंभीर आर्थिक विवाद पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायतकर्ता हरिओम सहगल एक दिव्यांग व्यक्ति हैं, जिनके दोनों हाथ नहीं हैं। पाठक ने सवाल उठाया कि जब संपत्ति का सौदा हुआ था, तो अब तक पीड़ित का 43.2 लाख रुपये का कथित बकाया क्यों नहीं चुकाया गया? उन्होंने कहा कि किसी भी नेता का राजनीतिक रसूख किसी निर्दोष के वैध बकाये और कानूनी जवाबदेही से बचने की ढाल नहीं बन सकता।
चेक बाउंस और 2021 के जमीन सौदे का कानूनी विवाद
शिकायत के अनुसार, यह पूरा विवाद वर्ष 2021 में हुए एक जमीन सौदे से जुड़ा हुआ है। पीड़ित पक्ष का दावा है कि सौदे के एवज में जो चेक दिए गए थे, वे बैंक में बाउंस हो गए, जिसके बाद से कथित भुगतान अटका हुआ है। कानून विशेषज्ञों के अनुसार, चेक बाउंस का मामला निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (NI Act) की धारा 138 के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है, जिसमें दीवानी और आपराधिक दोनों स्तरों पर जवाबदेही तय होती है। भाजपा प्रवक्ता ने जोर देकर कहा कि अगर ये आरोप बेबुनियाद हैं तो संबंधित पक्ष को सार्वजनिक रूप से दस्तावेजों और बैंक लेन-देन के पुख्ता तथ्यों के साथ सामने आकर अपना पक्ष रखना चाहिए।
पुलिस जांच शुरू होने से बढ़ी राजनीतिक और कानूनी सरगर्मी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार की अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का हवाला देते हुए भाजपा ने कहा कि प्रदेश में कानून का शासन सर्वोपरि है और किसी भी रसूखदार को जांच प्रभावित करने की छूट नहीं मिलेगी। देहरादून पुलिस के अनुसार, एसएसपी ने एसपी सिटी को संपत्ति के अनुबंध, वित्तीय लेन-देन और चेक संबंधी सभी दस्तावेजों की गहन पड़ताल के निर्देश दिए हैं। पुलिस जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद स्पष्ट होगा कि मामले में समझौते के आधार पर देनदारी तय होती है या फिर धोखाधड़ी और चेक बाउंस की धाराओं में औपचारिक कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।




