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पहाड़ के 528 गांवों में कटेगा पैदल सफर, 19 नए पुलों से दूर होगी गदेरों की आफत

उत्तराखंड में 528 नई सड़कों और 19 पुलों के लिए 3,704 करोड़ के प्रस्ताव पर केंद्र से मुहर जल्द। जानिए कब शुरू होंगे टेंडर और ग्राउंड पर निर्माण कार्य।

Published On: October 12, 2026 3:41 PM
Uttarakhand PMGSY Roads

मुख्य बातें

  • पहले से जारी 1,492 सड़कों के बाद अब 528 नए मार्ग प्रस्तावित।
  • 2,850 किमी सड़कों और 19 पुलों पर 3,704 करोड़ रुपये होंगे खर्च।
  • मंजूरी के दो महीने के भीतर टेंडर कराकर काम शुरू होगा।

देहरादून (12 अक्टूबर) : उत्तराखंड के पर्वतीय अंचलों में आवागमन की तस्वीर बदलने के लिए राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के चौथे चरण के तहत 528 नई सड़कों और 19 पुलों का 3,704 करोड़ रुपये का नया प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है। राज्य में पहले से मंजूर 1,492 सड़कों पर जमीनी काम तेज होने के बीच यह कदम उठाया गया है, जिससे सूबे में कुल ग्रामीण सड़क निर्माण का दायरा 5,000 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच चुका है। ग्राम्य विकास विभाग के मुताबिक, केंद्र से इस प्रस्ताव पर अक्टूबर के अंत या नवंबर के पहले सप्ताह तक मंजूरी मिलने के संकेत हैं।

पहाड़ पर 5,000 करोड़ के सड़क नेटवर्क का महाप्लान

उत्तराखंड के पर्वतीय भूगोल में सड़क सिर्फ सफर का जरिया नहीं, बल्कि जीवनरेखा है। पीएमजीएसवाई के चौथे चरण में राज्य के लिए 1,492 सड़कों को पहले ही हरी झंडी मिल चुकी है, जिनमें से 184 सड़कों की टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और करीब 120 सड़कों पर मौके पर काम चल रहा है। बाकी बची सड़कों पर भी एक सप्ताह से एक महीने के भीतर निर्माण शुरू करने की तैयारी है। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए शासन ने 2,850 किलोमीटर लंबी 528 अतिरिक्त सड़कों का नया प्रस्ताव केंद्र को सौंपा है। यदि इस प्रस्ताव को तय समय में मंजूरी मिल जाती है, तो राज्य में ग्रामीण संपर्क ढांचे पर कुल 5,000 करोड़ रुपये से अधिक का काम एक साथ जमीन पर उतरेगा।

बरसाती गदेरों से कटते गांवों के लिए 19 पुल

इस नए प्रस्ताव का सबसे अहम पहलू 19 नए पुलों का निर्माण है। मानसून के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में बरसाती गदेरे, नाले और उफनती नदियां दर्जनों गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से पूरी तरह काट देती हैं। मरीजों को डोली-पालकी में अस्पताल ले जाना और बच्चों का स्कूल छूटना यहां की रोजमर्रा की पीड़ा रही है। प्रस्तावित 2,850 किलोमीटर सड़कों के साथ इन 19 पुलों के बनने से दूरदराज के सीमांत और दुर्गम गांवों को बारहमासी सुरक्षित मार्ग मिल सकेगा। ग्राम्य विकास मंत्री भरत चौधरी के अनुसार, सरकार की प्राथमिकता उन बसावटों को मुख्यधारा से जोड़ना है, जहां के ग्रामीणों को आज भी मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए मीलों पैदल नापना पड़ता है।

नवंबर तक मंजूरी मिलने पर दो माह में टेंडर

योजना की वित्तीय और भौतिक फाइल फिलहाल केंद्र के पाले में है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, केंद्र से औपचारिक स्वीकृति मिलते ही अगले एक से दो महीने के भीतर टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी, ताकि कार्यदायी संस्थाएं बिना समय गंवाए मौके पर काम शुरू कर सकें। राज्य सरकार ने अगले दो से तीन वर्षों के भीतर उन सभी पात्र ग्रामीण बसावटों को पक्की सड़क से जोड़ने का लक्ष्य तय किया है जो अब तक बुनियादी कनेक्टिविटी से वंचित हैं। हालांकि, इन 528 सड़कों और 19 पुलों का वास्तविक लाभ समयबद्ध टेंडर और तय सीमा में निर्माण पूरा होने पर ही निर्भर करेगा।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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